दमोह। सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा कलेक्ट्रेट परिसर स्थित दिव्यांग पुनर्वास केंद्र में आयोजित निःशुल्क सहायक उपकरण वितरण एवं पंजीयन शिविर मंगलवार को व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा में रहा। जिले के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में पहुंचे दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिक और उनके परिजनों ने शिविर में बैठने, बारिश से बचाव, पंजीयन प्रक्रिया और चिकित्सा परीक्षण को लेकर अव्यवस्थाओं की शिकायत की। कई हितग्राहियों का कहना था कि उन्हें सुबह से दोपहर तक अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा, जबकि पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं।
जानकारी के अनुसार शिविर में दमोह नगर, दमोह जनपद और हिंडोरिया क्षेत्र सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में दिव्यांगजन पहुंचे थे। विभाग का उद्देश्य पात्र हितग्राहियों का पंजीयन कर उन्हें कृत्रिम अंग, व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, बैसाखी, श्रवण यंत्र तथा अन्य सहायक उपकरणों के लिए चयनित करना था। लेकिन अपेक्षा से अधिक भीड़ पहुंचने के कारण व्यवस्थाएं प्रभावित होती नजर आईं।
भीड़ बढ़ी तो कम पड़ गई बैठने की व्यवस्था
सुबह से ही पुनर्वास केंद्र परिसर में हितग्राहियों की भीड़ जुटना शुरू हो गई थी। जैसे-जैसे समय बीतता गया, परिसर में लोगों की संख्या बढ़ती गई। कई दिव्यांगों और उनके परिजनों को बैठने के लिए कुर्सियां नहीं मिलीं। कुछ लोग पेड़ों की छांव में बैठ गए तो कई लोग जमीन और कीचड़ में बैठकर अपनी बारी का इंतजार करते दिखाई दिए। व्हीलचेयर और बैसाखी के सहारे पहुंचे लोगों को परिसर में आवाजाही के दौरान भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
बारिश ने और बढ़ा दी मुश्किल
मंगलवार को सुबह से ही मौसम खराब रहा और बीच-बीच में बारिश होती रही। दोपहर के समय तेज बारिश शुरू होने पर शिविर में मौजूद लोगों के बीच अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। हितग्राहियों को जल्दबाजी में पुनर्वास केंद्र भवन के अंदर ले जाया गया, लेकिन वहां सीमित स्थान होने के कारण सभी लोगों को समुचित जगह नहीं मिल सकी। कई दिव्यांग और उनके परिजन भीड़ के बीच खड़े रहने को मजबूर रहे।
पंजीयन और परीक्षण में लगा लंबा समय
शिविर में पहुंचे कई लोगों ने बताया कि पंजीयन की प्रक्रिया अपेक्षाकृत धीमी रही। नेत्र परीक्षण और श्रवण परीक्षण के लिए भी उन्हें लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा। कुछ हितग्राहियों का कहना था कि विभिन्न काउंटरों पर स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने से उन्हें कई बार इधर-उधर जाना पड़ा, जिससे परेशानी और बढ़ गई।
यूडीआईडी कार्ड नहीं होने से कई वंचित
शिविर में कई ऐसे दिव्यांग भी पहुंचे जिनका यूडीआईडी (यूनिक डिसएबिलिटी आईडी) कार्ड तैयार नहीं था। आवश्यक दस्तावेज पूरे नहीं होने अथवा कार्ड जारी नहीं होने के कारण ऐसे कई हितग्राही सहायक उपकरण योजना का लाभ नहीं ले सके। ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोगों ने मांग की कि ब्लॉक स्तर पर पहले ही यूडीआईडी कार्ड बनाने की प्रक्रिया पूरी कराई जाए ताकि शिविर के दिन किसी को निराश न लौटना पड़े।
भोजन और विश्राम की सुविधा का भी अभाव
शिविर में पेयजल की व्यवस्था तो थी, लेकिन बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों के लिए चाय, नाश्ता अथवा भोजन की कोई व्यवस्था नहीं थी। सुबह से आए कई दिव्यांग और उनके परिजन घंटों तक भूखे-प्यासे अपनी बारी का इंतजार करते रहे। ग्रामीण क्षेत्रों से आए कुछ परिवार अपने साथ लाया भोजन परिसर के किनारे बैठकर खाते नजर आए।
हितग्राहियों ने सुनाई अपनी परेशानी
राजा पटना गांव के अशोक अहिरवार ने बताया कि वे सुबह आठ बजे से दिव्यांगता प्रमाण-पत्र के नवीनीकरण के लिए पहुंचे थे, लेकिन दोपहर तक उनका नंबर नहीं आया। उन्होंने कहा कि यदि पहले से बेहतर व्यवस्था होती तो दिव्यांगों को इतनी परेशानी नहीं होती।
दमोह निवासी डोमन प्रसाद ने बताया कि बारिश के कारण परिसर में कीचड़ हो गया था और दिव्यांगों को बैठने तथा आने-जाने में कठिनाई हुई। उनका कहना था कि बड़ी संख्या में लोगों के आने की संभावना को देखते हुए पर्याप्त पंडाल और कुर्सियों की व्यवस्था की जानी चाहिए थी।
राजा पटना के सौरव पटेल ने बताया कि वे सुबह से अपने परिजन के साथ शिविर में मौजूद थे। उन्होंने कहा कि पानी के अलावा अन्य कोई सुविधा उपलब्ध नहीं थी और लंबा इंतजार करना पड़ा।
वहीं वरिष्ठ दिव्यांग दीपचंद यादव ने कहा कि बैसाखी के सहारे कीचड़ में चलना बेहद मुश्किल रहा। उन्होंने भविष्य में दिव्यांगों की सुविधा के अनुरूप बेहतर व्यवस्था करने की मांग की।
प्रशासन ने कहा— व्यवस्थाएं पर्याप्त थीं
शिविर में अव्यवस्था के आरोपों पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं सामाजिक न्याय विभाग के नोडल अधिकारी प्रवीण फुलपगारे ने कहा कि विभाग द्वारा पर्याप्त कुर्सियां और आवश्यक व्यवस्थाएं की गई थीं। उनके अनुसार अचानक हुई बारिश के कारण कुछ समय के लिए असुविधा हुई, लेकिन तत्काल सभी हितग्राहियों को पुनर्वास केंद्र भवन के अंदर स्थानांतरित कर दिया गया। उन्होंने कहा कि वे स्वयं शिविर में मौजूद रहे और व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी करते रहे।
भविष्य के लिए उठे सवाल
दिव्यांगजनों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि ऐसे शिविरों में पहले से संभावित भीड़ का आकलन कर पर्याप्त पंडाल, बैठने की व्यवस्था, चिकित्सकों की उपलब्धता, सुगम पंजीयन व्यवस्था और दिव्यांगों की आवश्यकताओं के अनुरूप सुविधाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए। ताकि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने आने वाले किसी भी हितग्राही को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
