दमोह। जिले में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है और पिछले कुछ दिनों से रुक-रुककर हो रही बारिश ने मौसम को पूरी तरह सुहावना बना दिया है। खेतों में हरियाली लौटने लगी है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के चेहरे भी खिल उठे हैं। हालांकि बारिश का सिलसिला अब गति पकड़ रहा है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि इस वर्ष अब तक हुई कुल वर्षा पिछले वर्ष की तुलना में अभी भी काफी कम है।
21 जुलाई की शाम तक प्राप्त भू-अभिलेख विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में 1 जून से अब तक 377.6 मिलीमीटर (14.8 इंच) औसत वर्षा दर्ज की गई है। जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि तक 610.4 मिलीमीटर (24 इंच) औसत वर्षा रिकॉर्ड की गई थी। इसका मतलब है कि इस वर्ष अब तक जिले में 232.8 मिलीमीटर (9.2 इंच) कम बारिश हुई है। वर्षा की यह कमी जलाशयों, तालाबों और भूजल स्तर के लिए चिंता का विषय बनी हुई है, हालांकि पिछले कुछ दिनों की लगातार बारिश से हालात में धीरे-धीरे सुधार की उम्मीद बढ़ी है।
पटेरा बना जिले का सबसे अधिक वर्षा वाला क्षेत्र
जिले के सभी सात वर्षामापी केंद्रों के आंकड़ों पर नजर डालें तो पटेरा सबसे आगे दिखाई देता है, जहां अब तक 590.4 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है। यह आंकड़ा जिले के औसत से काफी अधिक है और दर्शाता है कि इस क्षेत्र में मानसून पूरी तरह मेहरबान रहा है।
इसके अलावा हटा में 480.4 मिलीमीटर, पथरिया में 444 मिलीमीटर, जबेरा में 344 मिलीमीटर, दमोह मुख्यालय में 332 मिलीमीटर, तेंदूखेड़ा में 289.6 मिलीमीटर तथा बटियागढ़ में सबसे कम 163 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में वर्षा का वितरण समान नहीं रहा है। कुछ इलाकों में अच्छी बारिश हुई है, जबकि कुछ क्षेत्रों में अभी भी सामान्य से कम वर्षा रिकॉर्ड की जा रही है।
24 घंटे में तेंदूखेड़ा में बरसे सबसे ज्यादा बादल
बीते 24 घंटों के दौरान जिले में औसतन 22 मिलीमीटर (0.8 इंच) वर्षा दर्ज की गई। इस अवधि में तेंदूखेड़ा सबसे अधिक बारिश वाला क्षेत्र रहा, जहां 68.8 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई। लगातार हुई बारिश से क्षेत्र के कई नालों और छोटे जलस्रोतों में पानी का प्रवाह बढ़ गया।
इसी अवधि में जबेरा में 37 मिलीमीटर, हटा में 21.8 मिलीमीटर, बटियागढ़ में 11 मिलीमीटर, पटेरा में 9 मिलीमीटर, दमोह में 4 मिलीमीटर तथा पथरिया में 3 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। कुछ स्थानों पर तेज बारिश तो कुछ क्षेत्रों में हल्की फुहारों का दौर देखने को मिला।
किसानों के लिए राहत, खरीफ फसलों को मिलेगा लाभ
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई के दूसरे पखवाड़े में हो रही लगातार बारिश खरीफ सीजन की फसलों के लिए काफी लाभदायक साबित होगी। सोयाबीन, धान, मक्का, उड़द, मूंग और तिल जैसी फसलों को इस समय पर्याप्त नमी की आवश्यकता होती है। लगातार हो रही बारिश से खेतों में नमी बनी रहेगी और फसलों की बढ़वार बेहतर होगी।
हालांकि जिन क्षेत्रों में अब तक सामान्य से कम वर्षा हुई है, वहां किसानों की निगाहें आने वाले दिनों की बारिश पर टिकी हुई हैं। यदि आगामी सप्ताह में भी मानसून सक्रिय रहता है तो फसल उत्पादन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है।
जलाशयों और भूजल स्तर में सुधार की उम्मीद
बारिश का असर जिले के तालाबों, बांधों और जलाशयों पर भी दिखाई देने लगा है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यदि अगले कुछ दिनों तक इसी प्रकार बारिश होती रही तो जलाशयों का जलस्तर तेजी से बढ़ेगा। इससे पेयजल संकट से राहत मिलने के साथ-साथ सिंचाई व्यवस्था भी मजबूत होगी। वहीं लगातार बारिश से भूजल स्तर में भी सुधार आने की संभावना जताई जा रही है।
प्रशासन ने बरतने को कहा एहतियात
बारिश के चलते प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक आवागमन से बचने की अपील की है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली गिरने की घटनाओं को देखते हुए खराब मौसम के दौरान खुले मैदानों, पेड़ों और विद्युत पोलों के आसपास खड़े न होने की सलाह भी दी गई है। संबंधित विभागों को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तत्काल निपटा जा सके।
जिले में अब तक दर्ज वर्षा (1 जून से 21 जुलाई शाम तक)
- पटेरा – 590.4 मिमी
- हटा – 480.4 मिमी
- पथरिया – 444.0 मिमी
- जबेरा – 344.0 मिमी
- दमोह – 332.0 मिमी
- तेंदूखेड़ा – 289.6 मिमी
- बटियागढ़ – 163.0 मिमी
बीते 24 घंटे की वर्षा
- तेंदूखेड़ा – 68.8 मिमी
- जबेरा – 37.0 मिमी
- हटा – 21.8 मिमी
- बटियागढ़ – 11.0 मिमी
- पटेरा – 9.0 मिमी
- दमोह – 4.0 मिमी
- पथरिया – 3.0 मिमी
लगातार सक्रिय हो रहे मानसून ने जिले में राहत की उम्मीद जरूर बढ़ाई है, लेकिन पिछले वर्ष की तुलना में वर्षा का बड़ा अंतर यह संकेत देता है कि आने वाले दिनों की बारिश जिले के जल संसाधनों और कृषि व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है। यदि मानसून इसी तरह सक्रिय बना रहता है तो किसानों के साथ-साथ आम लोगों को भी इसका व्यापक लाभ मिलेगा।
