एक स्थानीय टीवी चैनल से बातचीत में ख्वाजा आसिफ ने कहा कि जो लोग सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर रहे हैं, उन्हें वह भारत की तरह ही पाकिस्तान का विरोधी मानते हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब पीओके में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव को लेकर तनाव बना हुआ है।
गोलीबारी में 14 लोगों की मौत का दावा
हाल ही में प्रतिबंधित ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में निकाले गए विरोध मार्च के दौरान सुरक्षा बलों पर गोलीबारी करने का आरोप लगाया गया है। संगठन का दावा है कि इस कार्रवाई में कम से कम 14 कार्यकर्ताओं की मौत हुई, जबकि दो दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए।
मंगलवार को रावलकोट से मुजफ्फराबाद की ओर निकाले गए मार्च में हजारों लोग शामिल हुए थे। प्रदर्शनकारी पीओके विधानसभा में कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को समाप्त करने की मांग कर रहे थे। JAAC का कहना है कि यह व्यवस्था स्थानीय लोगों के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करती है और इस्लामाबाद समर्थित दलों को अनुचित लाभ पहुंचाती है।
सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के अलग-अलग दावे
JAAC के मुताबिक, लगभग 5,000 लोग शांतिपूर्ण मार्च में शामिल थे, लेकिन सुरक्षा बलों ने बिना किसी उकसावे के गोलीबारी कर दी। संगठन का दावा है कि मृतकों में उसके संस्थापक सदस्य उमर नजीर के छोटे भाई उस्मान नजीर भी शामिल हैं।
वहीं, पाकिस्तानी अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों के पास आधुनिक हथियार थे और उन्होंने पहले सुरक्षा बलों पर हमला किया, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई की गई। दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
कई सप्ताह से जारी है विरोध प्रदर्शन
पीओके में कई सप्ताह से विरोध प्रदर्शन जारी हैं। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, 5 जून से शुरू हुए आंदोलन और उसके बाद हुई हिंसा तथा सुरक्षा कार्रवाई में अब तक 80 से अधिक लोगों की मौत होने का दावा किया जा चुका है। इससे पहले 40 लोगों के मारे जाने की खबरें सामने आई थीं, जिनमें 34 प्रदर्शनकारी और छह सुरक्षाकर्मी शामिल बताए गए थे।
भारत ने चुनावी प्रक्रिया पर उठाए सवाल
इस घटनाक्रम के बीच पाकिस्तान ने पीओके में तथाकथित विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई है। कई क्षेत्रों में झड़पों और मतपेटियां लूटे जाने जैसी घटनाओं की खबरें सामने आई हैं। विपक्षी दलों ने चुनाव में धांधली और भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदान कराने पर सवाल उठाए हैं।
भारत ने इन चुनावों को पाकिस्तान के अवैध कब्जे को वैध ठहराने की कोशिश बताया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि यह पूरी चुनावी प्रक्रिया केवल दिखावटी कवायद है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में मानवाधिकार उल्लंघनों और अवैध कब्जे को छिपाना है।
उन्होंने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का पूरा केंद्र शासित प्रदेश, जिसमें पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र भी शामिल हैं, भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। साथ ही उन्होंने कहा कि पीओके में जारी विरोध प्रदर्शन वहां के लोगों के आर्थिक शोषण, अधिकारों से वंचित किए जाने और प्रशासनिक दमन का परिणाम हैं।
