नूरुल इस्लाम मोनी ने संसद सत्र समाप्त होने के बाद पत्रकारों से बातचीत में भारत के साथ हुए समझौतों को लेकर सरकार की स्थिति बताई। उन्होंने कहा कि भारत के साथ किए गए सभी 101 समझौतों की समीक्षा की जा रही है। जब उनसे पूछा गया कि क्या इनमें से कुछ समझौते खत्म किए जा सकते हैं, तो उन्होंने कहा कि इसका जवाब जल्द सामने आएगा। हालांकि, उन्होंने किसी विशेष समझौते का नाम नहीं बताया।
BNP नेता के मुताबिक, सरकार पिछली सरकार के कार्यकाल में लिए गए उन फैसलों की भी दोबारा समीक्षा कर रही है, जिन्हें देश के हित में सही नहीं माना गया था। उनका कहना है कि सरकार देश के हित को सबसे ऊपर रखकर पुराने फैसलों पर विचार कर रही है। ऐसे समझौतों में बदलाव की संभावना जताई गई है, जिनसे बांग्लादेश को नुकसान होने का आकलन किया जा रहा है।
भारत के साथ हुए समझौतों की समीक्षा के बीच बंदरगाहों से जुड़े पुराने फैसले भी चर्चा में हैं। नूरुल इस्लाम मोनी ने चट्टोग्राम और मोंगला बंदरगाहों के इस्तेमाल से संबंधित नीतियों पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि पहले कुछ ऐसे नियम बनाए गए थे, जिनसे विदेशी जहाजों को अधिक फायदा मिला। उन्होंने कहा कि आगे होने वाले फैसलों में बांग्लादेश की जरूरतों और देश की संप्रभुता को सबसे अधिक महत्व दिया जाएगा।
हालांकि, अभी तक सरकार की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि 101 समझौतों में से किन पर सबसे पहले कार्रवाई की जाएगी। इसी तरह यह भी सामने नहीं आया है कि किन समझौतों को बदला या समाप्त किया जा सकता है। BNP नेता ने केवल इतना संकेत दिया है कि समीक्षा के बाद कुछ फैसले जल्द सामने आ सकते हैं।
इस बीच ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर भी BNP ने नाराजगी जताई है। नूरुल इस्लाम मोनी ने दिल्ली में हो रही बैठक में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को आमंत्रित नहीं किए जाने पर असंतोष जाहिर किया। उन्होंने इसे बांग्लादेश जैसे स्वतंत्र देश के लिए निराशाजनक बताया।
ब्रिक्स सम्मेलन में निमंत्रण नहीं मिलने के मुद्दे पर भी मोनी ने भारत की ओर इशारा करते हुए अपनी नाराजगी व्यक्त की। इस तरह भारत के साथ 101 समझौतों की समीक्षा और ब्रिक्स सम्मेलन में निमंत्रण नहीं मिलने का मुद्दा बांग्लादेश की मौजूदा राजनीतिक चर्चा में प्रमुखता से सामने आया है।
फिलहाल समीक्षा की प्रक्रिया जारी है और किसी विशेष समझौते को बदलने या खत्म करने का आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है। BNP नेता के अनुसार, आने वाले समय में सरकार के फैसलों से यह स्पष्ट हो सकता है कि भारत के साथ हुए समझौतों को लेकर बांग्लादेश की आगे की नीति किस दिशा में जाती है।
