हनुमान मंदिर परिसर और रामकुमार स्कूल में हुए भव्य आयोजन, हजारों लोगों ने की सहभागिता; समाजसेवी विनोद राय ने दी शुभकामनाएं, समाजसेवा और सहयोग का संकल्प दोहराया
दमोह/जबेरा। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर जनजातीय समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक एकता को समर्पित विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। जनपद पंचायत जबेरा के ग्राम गोल पट्टी एवं खेड़ार के बीच स्थित हनुमान मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम के साथ-साथ दमोह के रामकुमार स्कूल में भी विशेष आयोजन किया गया। दोनों स्थानों पर बड़ी संख्या में समाजजन और क्षेत्र के नागरिक शामिल हुए। आयोजनों में जनजातीय संस्कृति, सामाजिक एकजुटता और समाज के उत्थान को लेकर विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई।
विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों में हजारों की संख्या में लोगों की मौजूदगी रही। ग्रामीण अंचल से लेकर दमोह शहर तक समाज के लोगों ने उत्साह के साथ कार्यक्रमों में भाग लिया। इस दौरान जनजातीय समाज की परंपराओं, संस्कृति और सामाजिक विरासत को याद करते हुए आने वाली पीढ़ी तक इसे पहुंचाने का संदेश दिया गया।
गोल पट्टी और खेड़ार के बीच हनुमान मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम में ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। कार्यक्रम के दौरान समाज की एकता, आपसी सहयोग और सामाजिक विकास को लेकर विचार व्यक्त किए गए। वक्ताओं ने कहा कि जनजातीय समाज की संस्कृति और परंपराएं देश की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। अपनी संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करते हुए शिक्षा, रोजगार और सामाजिक विकास की दिशा में आगे बढ़ना समय की आवश्यकता है।
इसी क्रम में दमोह स्थित रामकुमार स्कूल में भी विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। यहां भी बड़ी संख्या में समाजजन और नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में जनजातीय समाज के इतिहास, संस्कृति और सामाजिक योगदान को रेखांकित किया गया। उपस्थित लोगों ने सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे को मजबूत करने का संकल्प लिया।
विनोद राय की विशेष मौजूदगी रही चर्चा में
कार्यक्रम में समाजसेवी और जमीनी स्तर पर लगातार लोगों के सुख-दुख में साथ खड़े रहने वाले विनोद राय ने विशेष रूप से उपस्थिति दर्ज कराई। क्षेत्र में लंबे समय से सामाजिक गतिविधियों और जनसेवा से जुड़े विनोद राय की मौजूदगी को लेकर समाजजनों में उत्साह दिखाई दिया।
विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर विनोद राय ने उपस्थित सभी लोगों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की संस्कृति, परंपराएं और सामाजिक मूल्यों का संरक्षण सभी की जिम्मेदारी है। समाज की मजबूती आपसी सहयोग और एकजुटता से ही संभव है।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार पूर्व में लोगों के सुख-दुख में साथ खड़े होकर समाजसेवा और सहयोग का प्रयास किया जाता रहा है, उसी भावना के साथ आगे भी लगातार समाज और आमजन के बीच रहकर सहयोग किया जाएगा। उन्होंने समाज के प्रत्येक वर्ग के साथ मिलकर सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
हजारों लोगों की मौजूदगी ने बढ़ाया कार्यक्रम का उत्साह
विश्व आदिवासी दिवस के दोनों आयोजनों में बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता रही। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर दमोह शहर तक समाज के लोगों ने कार्यक्रमों में पहुंचकर अपनी एकजुटता का परिचय दिया। आयोजन स्थल पर लोगों में उत्साह का माहौल रहा और विभिन्न सामाजिक विषयों पर चर्चा के साथ जनजातीय समाज की पहचान और संस्कृति को लेकर जागरूकता का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि जनजातीय समाज की पहचान उसकी समृद्ध संस्कृति, परंपराओं, लोक जीवन और प्रकृति के साथ उसके गहरे संबंध से जुड़ी है। बदलते समय में विकास की मुख्यधारा के साथ आगे बढ़ते हुए अपनी सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखना भी आवश्यक है।
समाजसेवा और सहयोग को आगे बढ़ाने का संदेश
इस अवसर पर सामाजिक एकता और जनसेवा के महत्व पर भी जोर दिया गया। उपस्थित लोगों ने कहा कि समाज के जरूरतमंद परिवारों, युवाओं और बच्चों के लिए शिक्षा, रोजगार तथा अन्य सामाजिक क्षेत्रों में सहयोग की भावना को आगे बढ़ाना जरूरी है।
विनोद राय ने भी इस अवसर पर समाज के लोगों को भरोसा दिलाया कि जनहित और समाजसेवा के कार्यों में उनकी सक्रियता पूर्व की तरह जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि समाज के लोगों के सुख-दुख में साथ खड़ा होना और जरूरत के समय सहयोग करना ही वास्तविक सामाजिक जिम्मेदारी है।
विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आयोजित इन कार्यक्रमों ने जनजातीय समाज की एकता, संस्कृति और सामाजिक चेतना को एक मंच पर लाने का काम किया। गोल पट्टी-खेड़ार के बीच हनुमान मंदिर परिसर से लेकर दमोह के रामकुमार स्कूल तक आयोजित कार्यक्रमों में हजारों लोगों की सहभागिता ने आयोजन को व्यापक स्वरूप प्रदान किया।
