कृषि उपज मंडी परिसर में आयोजित कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों एवं सामाजिक पदाधिकारियों ने की सहभागिता, जनजातीय परंपराओं और संस्कृति के संरक्षण का लिया संकल्प
नरसिंहपुर। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर कृषि उपज मंडी, नरसिंहपुर में जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक विरासत को समर्पित भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जनजातीय समाज के बड़ी संख्या में लोगों ने सहभागिता की। इस अवसर पर पारंपरिक संस्कृति, रीति-रिवाजों और सामाजिक एकजुटता की आकर्षक झलक देखने को मिली।
कार्यक्रम में सहभागिता करते हुए उपस्थित अतिथियों ने कहा कि जनजातीय संस्कृति और परंपराएं भारतीय सभ्यता और सामाजिक विविधता की महत्वपूर्ण धरोहर हैं। प्रकृति के साथ सामंजस्य, परंपराओं के प्रति सम्मान और सामाजिक एकजुटता जनजातीय जीवनशैली की विशिष्ट पहचान है। इन परंपराओं को संरक्षित करना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा गया कि जनजातीय संस्कृति और परंपराएं इस सृष्टि का अनमोल उपहार हैं। जनजातीय समाज के बीच बिताए गए पल हृदय को असीम आनंद से भर देते हैं। उनकी जीवनशैली, लोक परंपराएं, कला, संस्कृति और प्रकृति के प्रति गहरा जुड़ाव समाज को एक नई दिशा प्रदान करता है।
विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में जनजातीय समाज के सामाजिक, सांस्कृतिक और सामुदायिक योगदान पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक विकास के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों और पारंपरिक मूल्यों को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है। जनजातीय समाज की समृद्ध परंपराएं देश की सांस्कृतिक विविधता को और अधिक मजबूत बनाती हैं।
कार्यक्रम में भाजपा जिलाध्यक्ष राम स्नेही पाठक, विधायक महेंद्र नागेश, विधायक विश्वनाथ सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं सामाजिक पदाधिकारी उपस्थित रहे। इनके अलावा जिला पंचायत अध्यक्ष शोभा ठाकुर, जिला पंचायत सदस्य सीताराम नामदेव, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि नीलेश काकोड़िया, पूर्व मंडी अध्यक्ष अशोक, गोंड समाज जिलाध्यक्ष एम.एस. धुर्वे, राजवंश परिवार से श्रीमती मीना शाह, गोंड महासभा की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती तरुण लता धुर्वे तथा महिला प्रकोष्ठ की जिलाध्यक्ष श्रीमती सरोज धुर्वे सहित अन्य साथी और समाजजन कार्यक्रम में मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान जनजातीय समाज की परंपरागत वेशभूषा, सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। आयोजन में उपस्थित लोगों ने विश्व आदिवासी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए जनजातीय संस्कृति को सम्मान और संरक्षण देने की बात कही।
वक्ताओं ने कहा कि जनजातीय समाज ने सदियों से जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के साथ प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनकी पारंपरिक जीवन पद्धति में प्रकृति के प्रति सम्मान और पर्यावरण संरक्षण का भाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति, इतिहास और परंपराओं से जोड़ने का अवसर मिलता है।
विश्व आदिवासी दिवस का यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जनजातीय समाज की पहचान, गौरव और अधिकारों के प्रति जागरूकता का संदेश भी देता नजर आया। कार्यक्रम में शामिल जनप्रतिनिधियों और समाज के लोगों ने जनजातीय परंपराओं को आगे बढ़ाने तथा सामाजिक समरसता और एकता को मजबूत करने पर जोर दिया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर उपस्थित अतिथियों और समाजजनों ने एक-दूसरे को विश्व आदिवासी दिवस की शुभकामनाएं दीं। कृषि उपज मंडी परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम ने नरसिंहपुर में जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के प्रति सम्मान की भावना को मजबूती प्रदान की।
