दमोह। स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर दमोह शहर में साहित्य, शायरी और देशप्रेम का अनूठा संगम देखने को मिला। शहर की पुरानी और प्रमुख अदबी साहित्यिक संस्था बज़्मे अहसन की ओर से ‘एक शाम वतन के नाम’ शीर्षक से भव्य मुशायरे का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शहर के विभिन्न शायरों और कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से वतन से मोहब्बत, सामाजिक सरोकार और आपसी भाईचारे का संदेश दिया।
मुशायरे में शहर के साहित्य प्रेमियों और शायरी के शौकीनों की बड़ी संख्या में मौजूदगी रही। जैसे-जैसे शायरों ने मंच से अपने अशआर और ग़ज़लें पेश कीं, वैसे-वैसे कार्यक्रम का माहौल साहित्यिक रंग में रंगता गया। कई प्रस्तुतियों पर श्रोताओं ने जमकर तालियां बजाकर शायरों का उत्साहवर्धन किया। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में देशप्रेम की भावना के साथ साहित्यिक अभिव्यक्ति को प्रमुखता दी गई।
कार्यक्रम में नदीम सुल्तान, मुस्तफ़ा अकमल, शोएब दमोही, अयाज़ सुल्तानी, अब्दुल अनआम, एडवोकेट इरफ़ान उस्मानी, फ़ैसल रज़ा, साहिल दमोही, मौलाना इरफ़ान नूरी, अदीब दमोही, ताबिश नैयर, डॉ. नाज़िर दमोही, कलीम दानिश, डॉ. गणेश राय, उस्ताद ताहिर दमोही, शकील अमजद सुल्तानी, डॉ. रफ़ीक़ आलम और रमेश तिवारी सहित अनेक शायरों एवं कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
सभी शायरों ने अलग-अलग अंदाज में अपनी बात रखी। किसी ने वतन की मोहब्बत को शब्दों में पिरोया तो किसी ने सामाजिक जिम्मेदारियों और इंसानी रिश्तों को अपनी शायरी का विषय बनाया। मंच से प्रस्तुत किए गए अशआर ने श्रोताओं को भावनात्मक रूप से जोड़े रखा। कार्यक्रम में मौजूद साहित्य प्रेमियों ने शायरों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए लगातार तालियों से उनका स्वागत किया।
कार्यक्रम का संचालन उस्ताद ताहिर दमोही ने किया। उन्होंने अपने संचालन के दौरान शायरों और श्रोताओं के बीच साहित्यिक संवाद की कड़ी बनाए रखी। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व सभापति शहज़ाद ख़ान ने की। उनकी अध्यक्षता में आयोजित इस साहित्यिक संध्या में शहर के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने सहभागिता की।
मुशायरे के दौरान इक़बाल पार्षद और शहज़ाद ख़ान ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए समाज में शिक्षा और जागरूकता की आवश्यकता पर जोर दिया। विशेष रूप से बच्चों की तालीम को लेकर लोगों से गंभीरता से ध्यान देने की अपील की गई। वक्ताओं ने कहा कि समाज की बेहतर दिशा के लिए शिक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है और बच्चों को अच्छी शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाने चाहिए।
कार्यक्रम में शहर के अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य नागरिक और साहित्य प्रेमी भी मौजूद रहे। एज़ाज़ आलम कुरैशी, जोश्ने ईद मिलादुन्नबी शहर कमेटी के सदर, अब्दुल वहीद क़ुरैशी, शाहिद नूर, डॉ. मोहन आदर्श, उवैद गौरी, नियाज़ कुरैशी, इक़बाल पार्षद, नसीम अहमद सर, आरिफ़ ख़ान ज़क़ात फ़ाउंडेशन, शाहिद ख़ान मंटू वकील, एडवोकेट शाहिद रिज़वी, मुबीन कुरैशी, वकील कुरैशी सहित बड़ी संख्या में श्रोता कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
बज़्मे अहसन की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम को लेकर आयोजकों का कहना रहा कि साहित्य समाज को जोड़ने और सकारात्मक विचारों को आगे बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है। स्वतंत्रता दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर ‘एक शाम वतन के नाम’ का आयोजन इसी उद्देश्य के साथ किया गया, ताकि शायरी और साहित्य के माध्यम से देशप्रेम की भावना को अभिव्यक्ति दी जा सके।
मुशायरे के दौरान मंच पर मौजूद शायरों ने अपनी-अपनी रचनाओं के माध्यम से कार्यक्रम को यादगार बनाया। श्रोताओं ने भी पूरे कार्यक्रम के दौरान उत्साह के साथ सहभागिता की। साहित्यिक प्रस्तुतियों के बीच तालियों की गूंज से कार्यक्रम स्थल का माहौल जीवंत बना रहा।कार्यक्रम के सफल आयोजन में बज़्मे अहसन से जुड़े सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। व्यवस्था और अनुशासन की जिम्मेदारी संस्था के डिसिप्लिन इंचार्ज इरफ़ान नूरी ने संभाली। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित सभी शायरों, कवियों, अतिथियों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित यह मुशायरा दमोह की साहित्यिक गतिविधियों में एक महत्वपूर्ण आयोजन के रूप में सामने आया, जिसमें देशप्रेम की भावना के साथ शायरी, साहित्य और सामाजिक संदेशों को एक मंच पर स्थान मिला। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता ने शहर में साहित्य और अदब के प्रति लोगों की रुचि को भी प्रदर्शित किया।
