बीकानेर में मरम्मत के बाद लक्ष्मीबाई स्टेशन पहुंचे कोच, जल्द शुरू हो सकता है पर्यटकों का रोमांचक सफर
रिपोर्ट: आचार्य नारायण वैष्णव
इंदौर। मानसून के मौसम में पातालपानी-कालाकुंड की प्राकृतिक वादियों का आनंद लेने वाले पर्यटकों के लिए अच्छी खबर सामने आई है। लंबे इंतजार के बाद हेरिटेज ट्रेन के संचालन की तैयारियां अंतिम दौर में पहुंच गई हैं। ट्रेन के 12 मीटरगेज कोच राजस्थान के बीकानेर में रखरखाव और मरम्मत के बाद रविवार को मालगाड़ी के जरिए लक्ष्मीबाई रेलवे स्टेशन पहुंच गए हैं। अब इन्हें पातालपानी भेजकर तकनीकी जांच और संचालन से जुड़ी तैयारियां पूरी की जाएंगी।रेलवे से मिली जानकारी के अनुसार कोचों के पातालपानी पहुंचने के बाद जरूरी परीक्षण किए जाएंगे। सब कुछ निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार रहा तो आने वाले दिनों में हेरिटेज ट्रेन का संचालन शुरू किया जा सकता है। हालिया रिपोर्टों में भी कोचों के इंदौर पहुंचने के बाद कुछ दिनों के भीतर संचालन शुरू होने की संभावना जताई गई थी।
155 साल से अधिक पुराना है रेल मार्ग
पातालपानी से कालाकुंड के बीच करीब 9.5 से 10 किलोमीटर लंबा मीटरगेज रेल मार्ग ऐतिहासिक महत्व रखता है। यह मार्ग 155 वर्ष से अधिक पुराना है। इसकी शुरुआत इंदौर रियासत के महाराजा तुकोजी राव होलकर द्वितीय के समय हुई थी और वर्ष 1878 में होलकर स्टेट रेलवे के तहत यह रेल लाइन पूरी हुई थी।बाद में वर्ष 1881-82 के दौरान यह मार्ग राजपूताना-मालवा रेलवे का हिस्सा बना। कठिन पहाड़ी और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण इस हिस्से को ब्रॉडगेज में बदलना आसान नहीं रहा। इसी ऐतिहासिक विरासत और प्राकृतिक खूबसूरती को देखते हुए रेलवे ने वर्ष 2018 में इस खंड को संरक्षित कर हेरिटेज ट्रेन का संचालन शुरू किया था।
सुरंग, पुल और घुमावदार ट्रैक बनाते हैं सफर खास
पातालपानी-कालाकुंड का छोटा सा रेल सफर अपने आप में रोमांच से भरा है। करीब 10 किलोमीटर के इस घाट खंड में चार सुरंगें, लगभग 24 घुमावदार मोड़ और कई छोटे-बड़े पुल हैं। ट्रेन जब घने जंगलों, पहाड़ियों और घाटियों के बीच से गुजरती है तो यात्रियों को मानसून में हरियाली, झरनों और प्राकृतिक नजारों का अनोखा अनुभव मिलता है।
यही वजह है कि इंदौर और आसपास के क्षेत्रों के अलावा प्रदेश के दूसरे हिस्सों से भी पर्यटक इस हेरिटेज ट्रेन के सफर का इंतजार करते हैं।
पिछले साल छह कोच के साथ हुआ था संचालन
पिछले वर्ष हेरिटेज ट्रेन में छह कोच लगाए गए थे। इनमें दो वातानुकूलित चेयरकार और चार सामान्य चेयरकार शामिल थे। एसी चेयरकार के लिए एक तरफ का किराया 265 रुपये और सामान्य चेयरकार के लिए 20 रुपये प्रति टिकट निर्धारित किया गया था।इस वर्ष 12 कोचों के मरम्मत के बाद वापस पहुंचने से ट्रेन की संरचना और संचालन को लेकर पर्यटकों की उत्सुकता बढ़ गई है। हालांकि अंतिम संचालन व्यवस्था और किराए की जानकारी रेलवे की ओर से आधिकारिक रूप से जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
मरम्मत में देरी से इस बार शुरू नहीं हो सका था समय पर संचालन
हेरिटेज ट्रेन का संचालन आमतौर पर मानसून के दौरान पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहता है। वर्ष 2025 में इसका संचालन 26 जुलाई से 16 नवंबर तक शुक्रवार से रविवार के बीच किया गया था। इस वर्ष मीटरगेज कोचों के रखरखाव के लिए उन्हें बीकानेर भेजे जाने के कारण संचालन में देरी हुई। जुलाई में रेलवे की ओर से अगस्त में ट्रेन दोबारा शुरू करने की तैयारी की जानकारी सामने आई थी।अब मरम्मत के बाद कोच इंदौर पहुंच चुके हैं और उन्हें पातालपानी भेजने की तैयारी है। ऐसे में आने वाले दिनों में यदि तकनीकी परीक्षण और अन्य औपचारिकताएं पूरी हो जाती हैं तो पर्यटक एक बार फिर ट्रेन की खिड़की से पातालपानी की पहाड़ियों, जंगलों, घाटियों और झरनों के नजारे देखते हुए कालाकुंड तक का यादगार सफर कर सकेंगे।
