श्रीकृष्ण पर्व के दौरान 1500 से अधिक स्थानीय कलाकार भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं भक्ति लोक परंपराओं और जीवन दर्शन पर आधारित प्रस्तुतियां देंगे। नृत्य-नाटिका रासलीला भजन लोकगायन और शास्त्रीय नृत्य के माध्यम से श्रीकृष्ण के जीवन के अलग-अलग प्रसंग मंच पर जीवंत किए जाएंगे। प्रदेश के 82 मंदिरों में विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुतियां प्रस्तावित हैं। इस आयोजन का उद्देश्य धार्मिक आस्था के साथ मध्यप्रदेश की समृद्ध लोक और सांस्कृतिक परंपराओं को भी व्यापक मंच प्रदान करना है।
मुख्यमंत्री निवास पर श्रीकृष्ण पर्व का विशेष आयोजन आकर्षण का केंद्र रहेगा। यहां 101 से अधिक बच्चे राधा-कृष्ण की वेशभूषा में शामिल होंगे। जन्मोत्सव के दौरान मटकी फोड़ कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बच्चों को माखन-मिश्री लड्डू गोपाल की प्रतिमा और श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं पर केंद्रित पुस्तक भेंट करेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री महू के जानापाव पहुंचकर परशुराम-श्रीकृष्ण लोक का भूमिपूजन करेंगे। यहां भगवान परशुराम द्वारा श्रीकृष्ण को सुदर्शन चक्र प्रदान किए जाने के प्रसंग पर आधारित नृत्य-नाटिका और प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी।
भोपाल में इस्कॉन पटेल नगर हरे कृष्ण लैंड रायसेन रोड पर जन्माष्टमी महोत्सव भव्य रूप से मनाया जाएगा। यहां करीब एक लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई गई है। मंदिर को जैसलमेर की पारंपरिक थीम पर सजाया जा रहा है और थाईलैंड से मंगाए गए विशेष ऑर्किड फूलों का उपयोग भी किया जाएगा। हरे कृष्ण महामंत्र का निरंतर कीर्तन होगा जबकि श्रीकृष्ण कथा और रुक्मिणी कल्याणम् नामक भक्तिमय नाट्य प्रस्तुति प्रमुख आकर्षण रहेगी।
उज्जैन के नारायणा धाम में पांच दिवसीय सांस्कृतिक आयोजन के दौरान श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता गुरु सांदीपनि आश्रम माखन चोरी जन्म और बाल लीलाओं से लेकर गीता उपदेश तक के प्रसंग प्रस्तुत किए जाएंगे। सांदीपनि आश्रम में गुरु-शिष्य परंपरा और श्रीकृष्ण द्वारा 64 कलाओं व 14 विद्याओं का ज्ञान प्राप्त करने की परंपरा को नृत्य-नाटिका के जरिए जीवंत किया जाएगा।
पन्ना अमझेरा और महिदपुर सहित प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में भी श्रीकृष्ण के अलग-अलग प्रसंगों पर आधारित कार्यक्रम होंगे। मथुरा प्रवेश गोवर्धन धारण सुदामा मिलन और कालियानाग मानमर्दन जैसे प्रसंग लोक प्रस्तुतियों और नृत्य-नाटिकाओं के माध्यम से मंचित किए जाएंगे। ग्वालियर रायसेन इंदौर गुना छतरपुर शिवपुरी झाबुआ नीमच मंदसौर और मुरैना सहित कई जिलों में शाम को विशेष कार्यक्रम होंगे।
जन्माष्टमी की रात भोपाल के इस्कॉन मंदिरों गोपाल मंदिर बांके बिहारी मंदिर बिड़ला मंदिर करुणा धाम और अन्य कृष्ण मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। मंदिरों में विशेष श्रृंगार अभिषेक भजन-कीर्तन और जन्मोत्सव के आयोजन होंगे। कुल मिलाकर इस बार श्रीकृष्ण पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विरासत लोक कला और नई पीढ़ी को भगवान श्रीकृष्ण के जीवन मूल्यों से जोड़ने का एक बड़ा प्रयास भी बनेगा।
