सड़कों पर भटकते गौवंश को मिलेगा सुरक्षित आश्रय, दमोह में ‘सड़क से गौशाला अभियान’ ने पकड़ी रफ्तार; 2 दिन में 1000 से अधिक गौवंश पहुंचाए गए गौशालाओं में
(डॉ.एल.एन.वैष्णव)
दमोह। भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि और उनकी बाल लीलाओं से गौ सेवा का गहरा संबंध रहा है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व जहां देशभर में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है, वहीं दमोह में इस पावन अवसर को गौ सेवा और गौ संरक्षण के संदेश से जोड़ते हुए एक ऐसा आयोजन किया गया, जिसने धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का भी संदेश दिया।
शहर के मारूताल स्थित वैष्णवी निस्वार्थ गौ-सेवा समिति में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। समिति परिसर में भगवान श्रीकृष्ण के प्रकटोत्सव के साथ गौ माता का विधि-विधान से पूजन किया गया। कार्यक्रम में दमोह कलेक्टर प्रताप नारायण यादव शामिल हुए और उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण का पूजन-अर्चन करने के साथ गौ माता की पूजा कर उन्हें फल और गुड़ खिलाया।कार्यक्रम का वातावरण भक्ति और गौ सेवा की भावना से सराबोर रहा। भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों के बीच गौ पूजन किया गया। इस अवसर पर मौजूद लोगों ने गौ संरक्षण और सेवा के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझने का संदेश भी लिया।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर गौ पूजन का विशेष संदेश
भगवान श्रीकृष्ण का जीवन गौ सेवा, प्रकृति प्रेम और जीवों के प्रति करुणा का संदेश देता है। ऐसे में जन्माष्टमी के अवसर पर गौ पूजन का आयोजन केवल धार्मिक परंपरा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके माध्यम से समाज को यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि आस्था के साथ सेवा और जिम्मेदारी को भी जीवन में स्थान देना जरूरी है।गौ माता की पूजा करने के साथ-साथ उनके संरक्षण और सुरक्षा के लिए काम करना ही सच्ची सेवा है। विशेष रूप से उन गौवंश की देखभाल जरूरी है जो सड़कों पर निराश्रित अवस्था में घूमते हैं और स्वयं भी दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं तथा सड़क पर चलने वाले लोगों के लिए भी खतरा पैदा करते हैं।
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने किया विधि-विधान से पूजन
कार्यक्रम में शहर पुरोहित पंडित चंद्रगोपाल पौराणिक, पंडित मिक्की राजोरिया, पंडित मुकेश पाठक एवं राधे नरेंद्र पाठक द्वारा धार्मिक विधि-विधान से पूजन-अर्चन कराया गया।कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने भगवान श्रीकृष्ण का पूजन-अर्चन कर प्रकटोत्सव मनाया। इसके बाद उन्होंने गौ माता का विधिवत पूजन किया और फल एवं गुड़ खिलाया।इस दौरान गौ सेवा समिति के सदस्यों ने समिति द्वारा गौवंश के संरक्षण एवं सेवा के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी कलेक्टर को दी।
‘गाय साक्षात भगवान का स्वरूप’, कलेक्टर ने दिया भावपूर्ण संदेश

इस अवसर पर कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गाय को साक्षात भगवान का स्वरूप माना गया है। गौ सेवा हमारी संस्कृति और परंपरा का अभिन्न हिस्सा है।उन्होंने कहा कि गौशालाएं केवल गौवंश के रहने की जगह नहीं हैं, बल्कि वे हमारी संस्कृति, परंपरा और गौ संरक्षण की भावना को भी प्रदर्शित करती हैं।कलेक्टर ने कहा कि आज जरूरत इस बात की है कि हम गौ सेवा को केवल धार्मिक पर्वों तक सीमित न रखें। जब कोई गौवंश सड़क पर घायल अवस्था में दिखाई दे तो उसकी मदद करना, निराश्रित गौवंश को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना और गौशालाओं की व्यवस्थाओं में सहयोग करना भी गौ सेवा का ही हिस्सा है।
सड़कों पर गौवंश के कारण होती हैं दुर्घटनाएं
कलेक्टर ने कहा कि सड़कों पर गौवंश के विचरण करने के कारण आए दिन दुर्घटनाओं की स्थिति बनती है। कई बार वाहन चालक अचानक सामने आए गौवंश को बचाने का प्रयास करते हैं और वाहन अनियंत्रित हो जाता है।ऐसी दुर्घटनाओं में जहां इंसानी जान जोखिम में पड़ती है, वहीं गौवंश भी घायल होता है। इसलिए सड़क पर गौवंश की मौजूदगी को केवल यातायात की समस्या के रूप में नहीं, बल्कि मानव जीवन और पशु सुरक्षा से जुड़े गंभीर विषय के रूप में देखने की आवश्यकता है।इसी उद्देश्य से दमोह प्रशासन ने ‘सड़क से गौशाला अभियान’ प्रारंभ किया है।
बलराम जयंती से शुरू हुआ ‘सड़क से गौशाला अभियान’
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने बताया कि दमोह जिले में ‘सड़क से गौशाला अभियान’ की शुरुआत बलराम जयंती के अवसर पर की गई है। अभियान के तहत सड़कों पर विचरण करने वाले गौवंश को चिन्हित कर उन्हें सुरक्षित गौशालाओं तक पहुंचाया जा रहा है।इसके लिए प्रशासन द्वारा अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं। टीमें जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर सड़कों पर मौजूद गौवंश को गौशालाओं में पहुंचाने का कार्य कर रही हैं।अभियान को एक माह तक चलाने की योजना है, जिसके तहत जिले की सड़कों पर मिलने वाले गौवंश को चरणबद्ध तरीके से सुरक्षित गौशालाओं में पहुंचाया जाएगा।
दो दिन में 1000 से अधिक गौवंश गौशालाओं में
कलेक्टर ने बताया कि अभियान के प्रारंभिक चरण में ही बड़ी संख्या में गौवंश को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराया गया है। अभियान शुरू होने के महज दो दिनों में ही एक हजार से अधिक गौवंश को सड़कों से हटाकर गौशालाओं में भेजा जा चुका है।प्रशासन का प्रयास है कि सड़क पर खुले में विचरण करने वाले गौवंश की संख्या लगातार कम हो और उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।
कलेक्टर बोले- यह सिर्फ प्रशासन का अभियान नहीं
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने कहा कि ‘सड़क से गौशाला अभियान’ को सफल बनाने के लिए केवल प्रशासनिक प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। इसमें समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सहभागिता आवश्यक है।उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि जहां भी सड़क पर गौवंश का झुंड दिखाई दे, वहां संबंधित प्रशासनिक टीम को सूचना दें। लोग अपने आसपास के गौशाला संचालकों और गौ सेवा समितियों के साथ भी समन्वय कर सकते हैं।उन्होंने कहा कि यदि जनता और प्रशासन मिलकर कार्य करेंगे तो इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है।
सड़क पर चारा डालने से पहले सोचें, गौवंश की सुरक्षा भी जरूरी
कलेक्टर के संदेश में एक महत्वपूर्ण बात यह भी सामने आई कि गौ सेवा का अर्थ केवल सड़क पर गौवंश को खाना खिलाना नहीं है। यदि सड़क के बीच या व्यस्त मार्गों पर गौवंश को चारा डाला जाता है तो वे उसी स्थान पर एकत्रित हो जाते हैं और दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है।इसलिए यदि कोई व्यक्ति गौ सेवा करना चाहता है तो वह गौशाला में जाकर गौवंश को भोजन करा सकता है अथवा गौशालाओं को चारा, उपचार और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए सहयोग कर सकता है।
गौ सेवा में जनभागीदारी से बदलेगी तस्वीर
दमोह प्रशासन द्वारा शुरू किए गए अभियान को सफल बनाने में सामाजिक संगठनों, गौ सेवा समितियों और आम नागरिकों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।यदि प्रत्येक नागरिक अपने आसपास के निराश्रित गौवंश के प्रति संवेदनशील बने और उन्हें सड़क पर छोड़ने के बजाय सुरक्षित गौशाला तक पहुंचाने में सहयोग करे, तो इससे दोहरा लाभ होगा। एक ओर गौवंश सुरक्षित होंगे, वहीं दूसरी ओर सड़क दुर्घटनाओं की आशंका भी कम होगी।
वैष्णवी निस्वार्थ गौ सेवा समिति ने दिया सेवा का संदेश
मारूताल स्थित वैष्णवी निस्वार्थ गौ-सेवा समिति द्वारा लंबे समय से गौ सेवा और संरक्षण से जुड़े कार्य किए जा रहे हैं। जन्माष्टमी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में धार्मिक आयोजन को गौ सेवा से जोड़कर समाज के सामने एक सकारात्मक संदेश रखा गया।समिति के सदस्यों ने गौवंश की सेवा, भोजन, देखभाल और संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में गौ सेवा समिति प्रमुख दीपक नेमा, आलोक असाटी, सत्यम चौरसिया सहित वैष्णवी निस्वार्थ गौ सेवा समिति की पूरी टीम मौजूद रही।इसके अलावा पशुपालन एवं डेयरी विभाग के उपसंचालक केपी कुर्मी, संजय दुबे सहित गौ सेवा से जुड़े अन्य सदस्य एवं श्रद्धालु भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
जन्माष्टमी का पर्व दे गया बड़ा संदेश
वैष्णवी निस्वार्थ गौ सेवा समिति में मनाई गई श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल धार्मिक उत्सव बनकर नहीं रही। इस आयोजन ने समाज के सामने एक महत्वपूर्ण सवाल भी रखा कि यदि हम भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति करते हैं, तो क्या उनके जीवन से जुड़े सेवा, करुणा और जीवों के प्रति प्रेम के संदेश को भी अपने जीवन में उतार रहे हैं?गौ माता का पूजन करने के साथ उनकी सुरक्षा और संरक्षण की जिम्मेदारी उठाना ही इस पर्व का वास्तविक संदेश बन सकता है।
सड़क पर खड़ा हर गौवंश किसी की जिम्मेदारी का इंतजार करता है। वह किसी की परेशानी नहीं, बल्कि हमारी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की परीक्षा भी है। यदि प्रशासन प्रयास कर रहा है और समाज साथ खड़ा हो जाए, तो सड़कों को सुरक्षित बनाने के साथ-साथ गौवंश को भी सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन दिया जा सकता है।इसी भावना के साथ कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने जिलेवासियों से ‘सड़क से गौशाला अभियान’ में सहयोग करने की अपील की और कहा कि गौ संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों को जनभागीदारी से और मजबूत बनाया जा सकता है।श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के इस पावन अवसर पर दिया गया संदेश साफ है—गौ माता की पूजा केवल एक दिन नहीं, बल्कि उनकी सेवा और सुरक्षा की जिम्मेदारी हर दिन निभाना ही सच्ची आस्था है।
