मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) द्वारा नव-नियुक्त जूनियर इंजीनियरों (जेई) को तकनीकी रूप से दक्ष और फील्ड कार्य के लिए तैयार करने हेतु व्यापक फील्ड प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत इंदौर में की गई है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रदेशभर में सर्किल स्तर के अनुभवी मेंटर्स के मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य नव-नियुक्त अभियंताओं को वास्तविक कार्य परिस्थितियों से परिचित कराना है।
प्रशिक्षण के पहले चरण में इंदौर स्थित 220 केवी मांगलिया सबस्टेशन को केंद्र बनाते हुए कार्यपालन अभियंता विनीता भावसार के नेतृत्व में प्रशिक्षुओं को ट्रांसमिशन सिस्टम की व्यवहारिक जानकारी दी गई। इस दौरान जूनियर इंजीनियरों को विद्युत ट्रांसमिशन नेटवर्क की संरचना, सबस्टेशन के संचालन और रखरखाव, उपकरणों की कार्यप्रणाली, सुरक्षा मानकों और आकस्मिक परिस्थितियों में त्वरित निर्णय लेने की प्रक्रिया से अवगत कराया गया।मेंटर्स द्वारा विशेष रूप से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि प्रशिक्षु केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें फील्ड में आने वाली वास्तविक चुनौतियों का भी अनुभव हो। सबस्टेशन के विभिन्न सेक्शनों का निरीक्षण कराते हुए उपकरणों की कार्यप्रणाली, फॉल्ट मैनेजमेंट और सिस्टम मॉनिटरिंग की बारीकियों को विस्तार से समझाया जा रहा है।वहीं, जबलपुर स्थित मुख्यालय में इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए एक विशेष कोर टीम का गठन किया गया है, जो पूरे प्रशिक्षण की निगरानी और समन्वय कर रही है। यह टीम प्रशिक्षण की गुणवत्ता, मॉड्यूल की प्रभावशीलता और प्रशिक्षुओं के प्रदर्शन का लगातार मूल्यांकन कर रही है, ताकि उन्हें उच्च स्तर की तकनीकी दक्षता प्रदान की जा सके।
सर्किल स्तर पर तैनात अनुभवी अभियंता और मेंटर्स अपने वर्षों के अनुभव को साझा करते हुए नव-नियुक्त जेई को कार्य के प्रति जिम्मेदारी, अनुशासन और सुरक्षा के महत्व को समझा रहे हैं। साथ ही उन्हें यह भी सिखाया जा रहा है कि बिजली ट्रांसमिशन जैसे संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी प्रकार की लापरवाही गंभीर परिणाम दे सकती है, इसलिए हर कार्य को पूरी सतर्कता और मानकों के अनुरूप करना आवश्यक है।एमपी ट्रांसको की इस पहल को प्रदेश की विद्युत ट्रांसमिशन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़, सुरक्षित और आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल मानव संसाधन की क्षमता में वृद्धि होगी, बल्कि भविष्य में विद्युत आपूर्ति की विश्वसनीयता और गुणवत्ता भी बेहतर होगी।
