गणेश चतुर्थी से दो दिन पहले होता है बप्पा का भव्य आगमन, दस दिनों तक विधि-विधान से होती है पूजा-अर्चना
दमोह। गणेशोत्सव को लेकर इन दिनों पूरे शहर में श्रद्धा और उत्साह का वातावरण बना हुआ है। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में भगवान श्रीगणेश की प्रतिमाएं अलग-अलग स्वरूपों में विराजमान की गई हैं। इसी क्रम में दमोह के आसाटी वार्ड में चौरसिया परिवार के घर विराजित श्रीमंत दगड़ूसेठ हलवाई स्वरूप के भगवान श्रीगणेश की मनमोहक प्रतिमा इन दिनों श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। प्रतिमा का आकर्षक स्वरूप और परिवार द्वारा की जा रही विशेष पूजा-अर्चना लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है।
चौरसिया परिवार के अमन चौरसिया ने बताया कि उनके परिवार में भगवान गणपति के आगमन की परंपरा पिछले पांच वर्षों से निरंतर चली आ रही है। परिवार की विशेष धार्मिक परंपरा के अनुसार गणेश चतुर्थी के दो दिन पूर्व ही भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा का भव्य आगमन कराया जाता है। बप्पा के आगमन के साथ ही परिवार में उत्सव का माहौल शुरू हो जाता है और घर धार्मिक गतिविधियों से सराबोर हो जाता है।
अमन चौरसिया के अनुसार, उनके परिवार के लिए गणपति उत्सव केवल दस दिनों तक चलने वाला धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह आस्था, परिवार की एकजुटता और धार्मिक संस्कारों से जुड़ी परंपरा बन चुका है। भगवान श्रीगणेश के आगमन के समय परिवार के सदस्य पूरे उत्साह के साथ उनकी अगवानी करते हैं। इसके बाद प्रतिदिन विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना, आरती और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।
परिवार के राजकुमार चौरसिया, शशि चौरसिया और प्रिंस चौरसिया सहित अन्य सदस्य दस दिनों तक भगवान गणेश की सेवा और पूजा में जुटे रहते हैं। सुबह और शाम भगवान श्रीगणेश की आरती की जाती है। परिवार के सदस्य अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार बप्पा को भोग अर्पित करते हैं तथा परिवार और समाज की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना करते हैं।

आकर्षक स्वरूप बना श्रद्धालुओं के लिए केंद्र
चौरसिया परिवार के घर स्थापित श्रीमंत दगड़ूसेठ हलवाई स्वरूप के गणपति की प्रतिमा बेहद आकर्षक दिखाई दे रही है। प्रतिमा का स्वरूप भक्तों को पुणे के प्रसिद्ध श्रीमंत दगड़ूसेठ हलवाई गणपति की याद दिलाता है। यही कारण है कि क्षेत्र में इस प्रतिमा को देखने और भगवान के दर्शन करने के लिए लोगों में विशेष उत्साह दिखाई दे रहा है।
गणपति बप्पा के दर्शन के लिए परिवार के परिचितों, रिश्तेदारों और आसपास के लोगों का भी पहुंचना लगातार जारी है। भगवान गणेश के दर्शन के साथ श्रद्धालु परिवार की इस अनूठी परंपरा की सराहना कर रहे हैं।
पांच वर्षों से जारी है परंपरा
अमन चौरसिया ने बताया कि पिछले पांच वर्षों से उनके परिवार द्वारा इसी तरह गणपति उत्सव मनाया जा रहा है। प्रत्येक वर्ष गणेश चतुर्थी के दो दिन पहले भगवान श्रीगणेश का आगमन कराया जाता है और दस दिनों तक पूरी श्रद्धा एवं विधि-विधान से उनकी सेवा की जाती है। परिवार के युवा सदस्य भी इस धार्मिक आयोजन में बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं, जिससे नई पीढ़ी में भी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति जुड़ाव बना रहे।गणेशोत्सव के माध्यम से चौरसिया परिवार भगवान श्रीगणेश की आराधना के साथ आपसी प्रेम, भाईचारे और पारिवारिक एकता का संदेश भी दे रहा है। परिवार का मानना है कि गणपति बप्पा विघ्नहर्ता हैं और उनकी आराधना से घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।आसाटी वार्ड में चौरसिया परिवार के घर विराजे श्रीमंत दगड़ूसेठ हलवाई स्वरूप के गणपति इस समय क्षेत्र में चर्चा का विषय बने हुए हैं। पांच वर्षों से चली आ रही इस परंपरा ने परिवार के धार्मिक उत्साह को एक विशेष पहचान दी है और गणेशोत्सव के दौरान यह आयोजन स्थानीय लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन गया है।
