पॉक्सो विशेष न्यायालय ने सुनाया फैसला, दोनों आरोपियों पर कुल 27 हजार रुपये का अर्थदंड
इंदौर। 14 वर्षीय बालिका को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाने और उसके साथ दुष्कृत्य किए जाने के मामले में विशेष न्यायालय पॉक्सो ने दो आरोपियों को दोषी ठहराते हुए कठोर सजा सुनाई है। न्यायालय ने आरोपी कमलेश उर्फ कालू, उम्र 22 वर्ष, निवासी राजस्थान को संबंधित धाराओं में कुल 20 वर्ष के सश्रम कारावास के साथ अतिरिक्त सजा तथा आरोपी विष्णुदास वैष्णव, उम्र 40 वर्ष, निवासी राजस्थान को पॉक्सो अधिनियम के तहत 20 वर्ष के सश्रम कारावास से दंडित किया है। दोनों आरोपियों पर कुल 27 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
अभियोजन के अनुसार, 19 सितंबर 2026 को विशेष न्यायालय पॉक्सो द्वारा थाना एरोड्रम से संबंधित विशेष प्रकरण क्रमांक 59/2025 में यह निर्णय पारित किया गया। आरोपी कमलेश उर्फ कालू को भारतीय न्याय संहिता की धारा 65(1) तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(एल)/6 के तहत 20 वर्ष का सश्रम कारावास तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 87 के तहत 3 वर्ष का सश्रम कारावास सुनाया गया। वहीं आरोपी विष्णुदास वैष्णव को पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(एल)/6 सहपठित धारा 16/17 के तहत 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा दी गई।
1 जनवरी 2025 को दर्ज हुई थी रिपोर्ट
अभियोजन की ओर से प्रस्तुत मामले के अनुसार, 1 जनवरी 2025 को नाबालिग बालिका के दादा ने थाना एरोड्रम, इंदौर में अज्ञात व्यक्ति के विरुद्ध बालिका को बहला-फुसलाकर ले जाने की शिकायत दर्ज कराई थी। इस पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2) के तहत प्रकरण दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की।
विवेचना के दौरान 29 जनवरी 2025 को बालिका को राजस्थान के राजसमंद जिले से आरोपी के कब्जे से दस्तयाब किया गया। इसके बाद पुलिस द्वारा बालिका के बयान सहित अन्य साक्ष्य एकत्र किए गए।
अभियोजन के अनुसार, बालिका ने अपने बयान में बताया कि मई 2024 में वह राजस्थान में अपनी मौसी के घर एक विवाह कार्यक्रम में गई थी, जहां उसकी पहचान कमलेश उर्फ कालू से हुई थी। इसके बाद 31 दिसंबर 2024 को आरोपी ने उसे फोन कर घूमने चलने के लिए कहा और उसे लेने इंदौर आया। दोनों बस से मुंबई गए, लेकिन वहां रहने की व्यवस्था नहीं होने पर राजस्थान चले गए।
बताया गया कि राजस्थान पहुंचने के बाद आरोपी कमलेश का काका विष्णुदास मिला। अभियोजन के अनुसार, विष्णुदास दोनों को एक मकान में लेकर गया और वहां उन्हें भाई-बहन बताकर कमरे में ठहराया गया। बाद में पुलिस ने उक्त मकान से बालिका को बरामद किया।
जांच के बाद अन्य धाराएं जोड़ी गईं
विवेचना के दौरान पुलिस ने साक्षीगण के कथन दर्ज किए। अभियोजन के अनुसार, आरोपी विष्णुदास पर अपराध में सहयोग करने का आरोप सामने आने के बाद उसे दुष्प्रेरण के अपराध में गिरफ्तार किया गया। जांच के दौरान आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ पॉक्सो अधिनियम की संबंधित धाराओं का इजाफा किया गया।
संपूर्ण विवेचना के बाद पुलिस द्वारा अभियोग-पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से 14 साक्षियों के बयान न्यायालय के समक्ष दर्ज कराए गए। अभियोजन ने साक्ष्य और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष प्रस्तुत किया।न्यायालय ने प्रकरण में प्रस्तुत साक्ष्यों और साक्षियों के कथनों का परीक्षण करने के बाद दोनों आरोपियों को दोषी माना और निर्धारित दंड से दंडित किया।
पीड़िता को 6 लाख रुपये प्रतिकर की अनुशंसा
मामले में न्यायालय द्वारा पीड़ित प्रतिकर योजना के अंतर्गत नाबालिग पीड़िता को हुई शारीरिक एवं मानसिक क्षति को ध्यान में रखते हुए 6 लाख रुपये की राशि प्रदान किए जाने की अनुशंसा भी की गई है।प्रकरण में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक सुनील मणी त्रिपाठी ने पैरवी की। अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के समक्ष उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपों को प्रमाणित किया, जिसके बाद न्यायालय ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।
