पॉक्सो एक्ट में 3 वर्ष और धारा 354 में 1 वर्ष की सजा, न्यायालय ने लगाया कुल 5 हजार रुपये का अर्थदंड
इंदौर। 14 वर्षीय नाबालिग बालिका से आपत्तिजनक तरीके से छूने और हाथ पकड़ने के मामले में विशेष पॉक्सो न्यायालय ने ई-रिक्शा चालक को दोषी ठहराते हुए 3 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के तहत भी आरोपी को 1 वर्ष के सश्रम कारावास से दंडित किया है। दोनों धाराओं में कुल 5 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।अभियोजन विभाग के उपनिदेशक अभियोजन राजेन्द्र सिंह भदौरिया के अनुसार, 22 सितंबर 2026 को विशेष न्यायालय (पॉक्सो), इंदौर द्वारा थाना चंदननगर के विशेष प्रकरण क्रमांक एसी 43/2023 में यह फैसला सुनाया गया। प्रकरण में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक सुनील मणी त्रिपाठी ने पैरवी की।
ई-रिक्शा में नाबालिग से की थी आपत्तिजनक हरकत
अभियोजन के अनुसार घटना 19 दिसंबर 2022 की शाम की है। 14 वर्षीय बालिका अपनी मां और दो छोटे भाइयों के साथ अपनी दादी के घर ई-रिक्शा से जा रही थी। रास्ते में उसकी मां ई-रिक्शा से उतर गई और बालिका अपने दोनों भाइयों के साथ आगे जा रही थी।आरोप के अनुसार, इसी दौरान ई-रिक्शा चालक राहुल उर्फ लेखपाल ने चालक सीट से पीछे हाथ निकालकर बालिका को आपत्तिजनक तरीके से छुआ। बालिका को शुरुआत में लगा कि शायद गलती से हाथ लगा होगा, लेकिन आरोपी ने दोबारा ऐसी हरकत की। इससे बालिका डर गई।कुछ समय बाद रास्ते में उसकी बुआ का घर आया। बालिका ने ई-रिक्शा चालक से कहा कि उसे अपनी बुआ के घर चाबी लेने जाना है और वाहन रोकने के लिए कहा। आरोप के अनुसार, ई-रिक्शा से उतरते समय चालक ने उसका हाथ पकड़ लिया। बालिका डरकर भागते हुए अपनी बुआ के घर पहुंची और घटना की जानकारी बुआ तथा फूफा को दी।इसके बाद उसके फूफा आरोपी ई-रिक्शा चालक को लेकर थाने पहुंचे। बालिका की शिकायत पर थाना चंदननगर पुलिस ने आरोपी राहुल उर्फ लेखपाल के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 354 तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 7/8 के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की।
9 गवाहों के बयान के आधार पर अभियोजन ने मामला प्रमाणित किया
विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने अभियोग-पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 9 साक्षियों के बयान न्यायालय के समक्ष दर्ज कराए गए। अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के कथनों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी पाया।न्यायालय ने पॉक्सो अधिनियम की धारा 7/8 के तहत 3 वर्ष का सश्रम कारावास तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के तहत 1 वर्ष का सश्रम कारावास एवं कुल 5 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
पीड़िता को 50 हजार रुपये प्रतिकर की अनुशंसा
प्रकरण में न्यायालय ने पीड़ित प्रतिकर योजना के अंतर्गत नाबालिग को हुई शारीरिक एवं मानसिक क्षति को ध्यान में रखते हुए 50 हजार रुपये की राशि प्रदान किए जाने की अनुशंसा भी की है।अभियोजन विभाग के अनुसार, मामले में प्रभावी पैरवी के चलते न्यायालय द्वारा आरोपी को दोषसिद्ध कर दंडित किया गया।
