केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अशोक नगर में युवाओं के साथ संवाद कार्यक्रम के दौरान एक गाने पर थिरकते नजर आए। उन्होंने अपनी तो जैसे तैसे कोई ऐसे या वैसे कट जाएगी आपका क्या होगा जनाब ए आली गाने पर डांस किया। उनकी इस प्रस्तुति की चर्चा होने लगी। लोगों ने उनके अंदाज को पसंद किया लेकिन गाने के बोल ने भी सियासी गलियारों में चुटकी लेने का मौका दे दिया। अब इस बात पर कयास लगाए जा रहे हैं कि आखिर इस गाने को लेकर लोग क्या संदेश तलाश रहे हैं। हालांकि सिंधिया की ओर से किसी खास राजनीतिक संदेश की बात सामने नहीं आई है।
दूसरी ओर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का भजन भी चर्चा में है। एक गरबा आयोजन के दौरान वे महाकाल डमरू वाले तू न संभाले तो हमें कौन संभाले भजन गाते नजर आए। विजयवर्गीय के भजन गाने का यह पहला मौका नहीं है लेकिन इस बार इसके बोल को लेकर राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गईं। प्रदेश की राजनीति में उनकी भूमिका और सत्ता संगठन में कथित उपेक्षा को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच लोग इसे अपने अपने अंदाज में देख रहे हैं। हालांकि इसे उनकी निजी आस्था और भक्ति की प्रस्तुति के रूप में भी देखा जा सकता है। इसी बीच उनके पुराने मित्र और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने चुटकी लेते हुए उन्हें इंदौर के पितृ पर्वत स्थित हनुमान मंदिर में बैठने की सलाह दी। उनकी टिप्पणी ने इस पूरे मामले को और दिलचस्प बना दिया।
पूर्व मंत्री कमल पटेल का एक वीडियो भी चर्चा में है। हरदा में आयोजित भजन संध्या के दौरान तुम अगर साथ देने का वादा करो मैं यूं ही मस्त नगमे लुटाता रहूं गाना बजा तो वे खुद को थिरकने से रोक नहीं पाए। कमल पटेल पिछला विधानसभा चुनाव हार चुके हैं और अब उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं होती रहती हैं। ऐसे में उनके डांस को लेकर भी लोग मजाकिया अंदाज में राजनीतिक संकेत तलाश रहे हैं। कुछ लोग इसे जनता का साथ पाने की इच्छा से जोड़कर देख रहे हैं लेकिन यह लोगों की अपनी व्याख्या है।
इधर मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की कार में भजन सुनते हुए बनाई गई रील भी चर्चा में आ गई। वे कार में बैठकर माता के भजन सुन रहे थे। इसी दौरान वाहन सड़क पर बने गड्ढों से गुजरा तो कार हिचकोले खाने लगी और अध्यक्ष भी झटकों से हिलते नजर आए। इस वीडियो को लेकर लोगों ने सड़क की हालत पर सवाल उठाए। भले ही वीडियो बनाने का उद्देश्य भक्ति का आनंद लेना रहा हो लेकिन उसमें दिखाई देने वाले गड्ढों ने सड़क की बदहाली को भी सामने ला दिया।
इसी राजनीतिक हलचल के बीच सरकारी विभाग में अनुकंपा नियुक्तियों को लेकर एक मामला भी सामने आया है। खबर के मुताबिक एक विभाग के सचिव स्तर के अधिकारी ने 25 लोगों की सूची तैयार कर वरिष्ठ अधिकारी को भेजी थी। जांच में पता चला कि सूची में शामिल 15 लोगों को पहले ही अनुकंपा नियुक्ति मिल चुकी थी और वे नौकरी कर रहे थे। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारी ने सूची तैयार करने वाले अधिकारी को फटकार लगाई। अब बाकी 10 लोगों की नियुक्ति को लेकर आगे क्या निर्णय होता है इस पर नजर रहेगी। इस तरह मध्य प्रदेश में नेताओं के वीडियो से लेकर प्रशासनिक कामकाज तक कई मुद्दे चर्चा में हैं।
