बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व क्षेत्र में वन्यजीवों की लगातार हो रही मौतों ने एक बार फिर पार्क प्रबंधन को कठघरे में खड़ा कर दिया है। तीन दिन पहले एक बाघिन की मौत की घटना अभी ठंडी भी नहीं पड़ी थी कि अब एक नर तेंदुए की मौत की खबर सामने आने से वन्यजीव प्रेमियों में चिंता बढ़ गई है।जानकारी के अनुसार 21 मार्च 2026 को पनपथा बफर परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम महरोई राजस्व क्षेत्र में लगभग 4 वर्ष आयु के नर तेंदुए के कुएं में गिरने से मौत की सूचना मिली। अनुपम सहाय ने बताया कि सूचना मिलते ही बीटीआर प्रबंधन टीम मौके पर पहुंची और शव को बाहर निकालकर निर्धारित एसओपी के अनुसार जांच प्रक्रिया शुरू की गई।
मौके पर डॉग स्क्वाड और मेट
ल डिटेक्टर से सर्च कराया गया। इसके बाद वन्य प्राणी स्वास्थ्य अधिकारी एवं पशु चिकित्सकों की टीम ने शव परीक्षण किया, जिसमें तेंदुए की मृत्यु का कारण कुएं में डूबना पाया गया। बाद में एनटीसीए प्रतिनिधि, तहसीलदार मानपुर, वन्यप्राणी स्वास्थ्य अधिकारी, पशु चिकित्सा अधिकारी, सरपंच पनपथा और वन विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति में शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
हालांकि इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि पहले बिना मुंडेर वाले कुओं में गिरने से वन्यजीवों की मौत होती रही है। इसके बाद जिला पंचायत स्तर पर सर्वे कराकर करोड़ों रुपये की लागत से कुओं पर मुंडेर निर्माण का दावा किया गया था। ऐसे में मुंडेर बनने के बाद भी तेंदुए के कुएं में गिरने की घटना ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि सुरक्षा कार्य वास्तव में किए गए हैं तो फिर इस तरह की घटनाएं कैसे हो रही हैं। लगातार हो रही मौतों ने पार्क प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों से पारदर्शी जांच और स्पष्ट जवाब की मांग उठने लगी है।
