कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने धारा 163 के तहत जारी किए आदेश, पटाखों के उपयोग और बिक्री के लिए भी निर्धारित किए कड़े नियम
दमोह, 24 अक्टूबर 2026। दमोह जिले में जनसुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जिला प्रशासन ने कैल्शियम कार्बाइड से संचालित होने वाली अवैध देशी गन के निर्माण, उपयोग, भंडारण और विक्रय पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट प्रताप नारायण यादव ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत जिले की राजस्व सीमा में प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। इसके साथ ही पटाखों के निर्माण, भंडारण, बिक्री और उपयोग से संबंधित नियमों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
जिला प्रशासन के संज्ञान में आया था कि कुछ स्थानों पर बच्चे, किशोर और वयस्क लोहे, स्टील अथवा पीवीसी पाइप तथा गैस लाइटर की सहायता से ऐसी देशी गन तैयार कर रहे हैं, जिनसे तेज आवाज उत्पन्न होती है। देखने में सामान्य उपकरण जैसी लगने वाली यह गन असल में गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। आगामी त्योहारों, विवाह समारोहों और अन्य आयोजनों में इसके संभावित उपयोग को देखते हुए प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाया है।

तेज धमाके के शौक में खतरे में पड़ सकती है जान
कैल्शियम कार्बाइड गन का इस्तेमाल करना किसी भी व्यक्ति के लिए जोखिमपूर्ण हो सकता है। कैल्शियम कार्बाइड में पानी मिलाने से एसिटिलीन नामक ज्वलनशील गैस बनती है। गैस के प्रज्वलन से दबाव उत्पन्न होता है, जिससे पाइप फटने अथवा उसके टुकड़े बाहर निकलने की आशंका रहती है। ऐसी घटना में चेहरे, आंखों, त्वचा और कानों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। तेज धमाके से सुनने की क्षमता प्रभावित होने के साथ आसपास खड़े लोगों के घायल होने का खतरा भी बना रहता है।
विशेष रूप से बच्चों और किशोरों द्वारा ऐसी गन का इस्तेमाल करना चिंता का विषय है। थोड़ी-सी असावधानी गंभीर चोट या स्थायी शारीरिक क्षति का कारण बन सकती है। इसी खतरे को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने इस प्रकार की गन के निर्माण से लेकर उसके उपयोग, भंडारण और बिक्री तक पर प्रतिबंध लगाया है। अभिभावकों से अपेक्षा है कि वे बच्चों को इस तरह के खतरनाक उपकरणों से दूर रखें और उन्हें सुरक्षित गतिविधियों के लिए प्रेरित करें।
प्रतिबंधित रसायनों से बने पटाखों पर भी कार्रवाई के निर्देश
जिला प्रशासन ने आतिशबाजी से संबंधित सुरक्षा मानकों के पालन पर भी जोर दिया है। जारी आदेश में बेरियम साल्ट का उपयोग करके बनाए गए पटाखों, निर्धारित ध्वनि सीमा से अधिक आवाज उत्पन्न करने वाले पटाखों तथा एंटीमनी, लिथियम, मर्करी, आर्सेनिक, लेड, स्ट्रोंसियम और क्रोमेट जैसे पदार्थों का उपयोग करके बनाए गए पटाखों के निर्माण, भंडारण और विक्रय पर प्रतिबंध संबंधी प्रावधान शामिल हैं।
पटाखों की खरीद-बिक्री निर्धारित नियमों और लाइसेंस संबंधी शर्तों के अनुसार ही की जा सकेगी। गैर-लाइसेंसी व्यक्तियों द्वारा पटाखों की बिक्री तथा ऑनलाइन माध्यमों से होने वाली बिक्री पर भी आदेश में प्रतिबंधात्मक प्रावधान किए गए हैं। संबंधित व्यापारियों को निर्देशों का पालन करने और प्रतिबंधित सामग्री के कारोबार से दूर रहने की आवश्यकता है।
रात में पटाखे चलाने और शांत क्षेत्रों में आतिशबाजी पर रोक
ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने और आम नागरिकों की सुविधा बनाए रखने के लिए रात 10 बजे से सुबह 7 बजे तक पटाखे एवं आतिशबाजी चलाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। अस्पतालों, नर्सिंग होम, स्वास्थ्य केंद्रों, शिक्षण संस्थानों, न्यायालयों और धार्मिक स्थलों जैसे शांत क्षेत्रों के 100 मीटर के दायरे में पटाखे जलाने पर भी रोक संबंधी निर्देश दिए गए हैं।
इसके अलावा आयुध निर्माणियों, पेट्रोल पंप, गैस गोदाम और अन्य ज्वलनशील स्थानों पर आतिशबाजी से जुड़े सुरक्षा प्रतिबंधों का पालन करना अनिवार्य होगा। इन नियमों का उद्देश्य आगजनी, दुर्घटनाओं और ध्वनि प्रदूषण की आशंका को कम करना है, ताकि उत्सव के दौरान आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
दो दिन के भीतर जांच कर प्रस्तुत करना होगा प्रतिवेदन
प्रतिबंधात्मक आदेश के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अपर कलेक्टर को जिला नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। सभी उपखंड मजिस्ट्रेट अपने-अपने क्षेत्रों में सहायक नोडल अधिकारी के रूप में कार्य करेंगे। उन्हें संबंधित मुख्य नगरपालिका अधिकारी, जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और थाना प्रभारी को शामिल करते हुए निरीक्षण दल गठित करने के निर्देश दिए गए हैं।
गठित दल आगामी दो दिनों के भीतर अवैध देशी गन और प्रतिबंधित पटाखों के निर्माण, भंडारण तथा विक्रय से संबंधित गतिविधियों की जांच एवं निरीक्षण करेंगे। जांच के बाद प्रतिवेदन संबंधित उपखंड मजिस्ट्रेट को प्रस्तुत किया जाएगा। इस व्यवस्था के माध्यम से प्रतिबंधित सामग्री की उपलब्धता का पता लगाने और नियमों के उल्लंघन पर आवश्यक कार्रवाई करने का प्रयास किया जाएगा।
आदेश का उल्लंघन करने पर होगी वैधानिक कार्रवाई
जिला प्रशासन का यह प्रतिबंधात्मक आदेश तत्काल प्रभाव से लागू है। इसे निरस्त या संशोधित नहीं किए जाने की स्थिति में आदेश जारी होने की तारीख से आगामी दो माह तक प्रभावी रहेगा। आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध लागू कानूनों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। परिस्थितियों और संबंधित कानूनी प्रावधानों के आधार पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है।
जनसुरक्षा में नागरिकों की भागीदारी जरूरी
जिला प्रशासन के इस कदम का प्रमुख उद्देश्य संभावित दुर्घटनाओं को रोकना और जिले में सुरक्षित वातावरण बनाए रखना है। नागरिकों से अपील है कि वे प्रतिबंधित देशी गन का उपयोग न करें, बच्चों को इसके खतरों के प्रति जागरूक करें और आतिशबाजी करते समय निर्धारित नियमों का पालन करें। व्यापारी भी प्रतिबंधित सामग्री के निर्माण, भंडारण और विक्रय से दूर रहें।
त्योहारों और सामाजिक आयोजनों की खुशियां तभी सार्थक हैं, जब उनसे किसी की जान, स्वास्थ्य या सार्वजनिक शांति को खतरा न पहुंचे। प्रशासनिक निर्देशों का पालन करना केवल कानूनी बाध्यता नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। नागरिकों के सहयोग से ही दुर्घटनाओं पर नियंत्रण, बच्चों की सुरक्षा और शांतिपूर्ण वातावरण सुनिश्चित किया जा सकता है।
