बैठकों के आयोजन से लेकर कार्यवृत्त पुस्तिका और निर्माण कार्यों की तकनीकी स्वीकृतियों तक पर जांच में आपत्तियां; 15 दिन में जवाब मांगा, एकपक्षीय कार्रवाई की चेतावनी
दमोह। दमोह नगर पालिका परिषद की कार्यप्रणाली को लेकर मध्यप्रदेश शासन के नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने गंभीर सवाल उठाए हैं। नगर पालिका अध्यक्ष मंजू राय को 22 अक्टूबर 2026 को जारी कारण बताओ सूचना पत्र में परिषद की बैठकों के आयोजन, कार्यवृत्त पुस्तिका उपलब्ध कराने तथा विभिन्न निर्माण कार्यों की तकनीकी स्वीकृति और भुगतान से संबंधित कथित अनियमितताओं पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। शासन ने प्रथम दृष्टया अध्यक्ष को संबंधित अनियमितताओं के लिए उत्तरदायी मानते हुए पत्र प्राप्त होने की तारीख से 15 दिन के भीतर लिखित जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।शासकीय पत्र में चेतावनी दी गई है कि निर्धारित समय-सीमा में जवाब प्राप्त नहीं होने पर उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर एकपक्षीय कार्रवाई की जा सकती है। यह नोटिस फिलहाल आरोपों पर पक्ष जानने की प्रक्रिया है। अंतिम निर्णय अध्यक्ष के जवाब और संबंधित अभिलेखों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगा।
पांच वर्ष में तीन परिषद सम्मेलन, 12 अध्यक्षीय परिषद बैठकों का उल्लेख
कारण बताओ नोटिस में पहला सवाल नगर पालिका परिषद के सम्मेलनों और अध्यक्षीय परिषद की बैठकों की संख्या को लेकर उठाया गया है। पत्र के अनुसार, वर्ष 2022 से 2026 के कार्यकाल के दौरान केवल तीन परिषद सम्मेलनों के आयोजन का उल्लेख है। ये सम्मेलन 29 मार्च 2023, 14 अगस्त 2024 और 29 अप्रैल 2026 को आयोजित होना बताया गया है।इसी अवधि में अध्यक्षीय परिषद यानी पीआईसी की 12 बैठकों का विवरण दिया गया है। पत्र में इन बैठकों की तिथियां 7 सितंबर 2022, 21 नवंबर 2022, 20 मार्च 2023, 19 अप्रैल 2023, 27 जून 2023, 25 अगस्त 2023, 2 जनवरी 2024, 14 मार्च 2024, 10 जुलाई 2024, 23 सितंबर 2024, 8 सितंबर 2025 और 9 जुलाई 2026 दर्ज हैं।
शासन ने मध्यप्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1961 की धारा 54 का हवाला देते हुए उल्लेख किया है कि परिषद का सम्मेलन प्रत्येक दो माह में कम से कम एक बार तथा प्रत्येक समिति का सम्मेलन प्रत्येक माह में कम से कम एक बार आयोजित किया जाना चाहिए। नोटिस में बैठक संबंधी इन प्रावधानों के पालन पर सवाल उठाते हुए अध्यक्ष से उनका पक्ष मांगा गया है।
कार्यवृत्त पुस्तिका किसके पास, जांच समिति को क्यों नहीं मिली?
नोटिस का दूसरा महत्वपूर्ण बिंदु परिषद और अध्यक्षीय परिषद की बैठकों की कार्यवृत्त पुस्तिका से संबंधित है। जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य नगर पालिका अधिकारी को बैठक की कार्यवृत्त पुस्तिका उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे। इस पर बताया गया कि पुस्तिका अध्यक्ष की अभिरक्षा में है।पत्र में उल्लेख है कि 11 सितंबर 2026 को सूचना जारी कर अध्यक्षीय परिषद और परिषद की बैठकों की कार्यवृत्त पुस्तिका अपराह्न तीन बजे तक जांच समिति को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे। नोटिस के अनुसार, निर्धारित समय तक पुस्तिका समिति के समक्ष प्रस्तुत नहीं की गई।
शासन ने मध्यप्रदेश नगर पालिका (मेयर-इन-काउंसिल/प्रेसिडेंट-इन-काउंसिल के कामकाज का संचालन तथा प्राधिकारियों की शक्तियां एवं कर्तव्य) नियम, 1998 के नियम 16 का उल्लेख किया है। इसके तहत बैठक की कार्यवाही हिंदी में दर्ज करने, उपस्थित सदस्यों के नाम और हस्ताक्षर, प्रत्येक प्रकरण में लिए गए निर्णय तथा कार्यवृत्त पर अध्यक्ष और सचिव के हस्ताक्षर जैसी व्यवस्थाएं निर्धारित हैं। कार्यवृत्त पुस्तिका पार्षदों के निरीक्षण के लिए कार्यालयीन समय में उपलब्ध रखे जाने का भी प्रावधान है।शासन ने इसी नियम के संदर्भ में पुस्तिका उपलब्ध नहीं कराए जाने पर आपत्ति जताई है। अब इस मामले में अध्यक्ष का स्पष्टीकरण और संबंधित अभिलेख महत्वपूर्ण होंगे।
छह कार्यों की तकनीकी स्वीकृति और भुगतान की जांच
कारण बताओ नोटिस का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा नगर क्षेत्र के विभिन्न वार्डों में कच्चे मार्गों पर मुरम/डस्ट डालने और अलग-अलग स्थानों पर डस्ट फैलाने के कार्यों से संबंधित है। जांच समिति की रिपोर्ट में परियोजना क्रमांक RD1-340-23-013 के अंतर्गत छह कार्यों का विवरण दिया गया है।पत्र में दर्ज विवरण के अनुसार, इन कार्यों के लिए मेसर्स ईशांत बिल्डकॉन कंस्ट्रक्शन, दमोह के नाम से भुगतान किया गया। नोटिस में छह कार्यों की कुल भुगतान राशि 5,94,357 रुपये बताई गई है।
जांच में मुख्य आपत्ति यह है कि एक ही परियोजना क्रमांक के अंतर्गत अलग-अलग स्थानों पर कराए गए छह कार्यों के लिए पृथक-पृथक तकनीकी स्वीकृतियां तैयार किए जाने और उनके आधार पर देयक बनाकर भुगतान किए जाने का उल्लेख है। शासन ने मूल अभिलेखों की अनुपलब्धता, परियोजना विवरण से मेल नहीं खाने और भुगतान संबंधी अभिलेखों में पाई गई विसंगतियों को गंभीर माना है।
नोटिस में इन परिस्थितियों को संभावित कूटरचना की ओर संकेत करने वाला बताते हुए संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ अध्यक्ष की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, इस संबंध में किसी अंतिम निष्कर्ष या दोषसिद्धि का उल्लेख नहीं है। वास्तविक स्थिति का निर्धारण मूल तकनीकी स्वीकृतियों, कार्यादेशों, माप पुस्तिकाओं, बिलों, भुगतान अभिलेखों और संबंधित पक्षों के जवाब के परीक्षण से ही हो सकेगा।
अध्यक्ष की वैधानिक जिम्मेदारी का भी उल्लेख
शासन ने मध्यप्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1961 की धारा 51 का हवाला देते हुए अध्यक्ष के दायित्वों का उल्लेख किया है। इसमें परिषद के सम्मेलनों की अध्यक्षता करना, नियमों के अनुसार कामकाज का संचालन सुनिश्चित करना तथा परिषद के वित्तीय और कार्यकारी प्रशासन पर निगरानी रखना शामिल है।नोटिस में कहा गया है कि प्रथम दृष्टया अध्यक्ष अपने वैधानिक दायित्वों का समुचित निर्वहन करने में विफल रही हैं। इसी आधार पर मध्यप्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1961 की धारा 41-क और अन्य संगत प्रावधानों के अंतर्गत संभावित कार्रवाई के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया है।यहां यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि कारण बताओ नोटिस जारी होना अपने आप में दोष सिद्ध होना नहीं है। संबंधित अध्यक्ष को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है और आगे की कार्रवाई शासन के परीक्षण तथा निर्णय पर निर्भर करेगी।
15 दिन की समय-सीमा, जवाब नहीं मिलने पर एकपक्षीय कार्रवाई
मध्यप्रदेश शासन के नगरीय विकास एवं आवास विभाग की ओर से जारी पत्र में अध्यक्ष मंजू राय को पत्र प्राप्त होने की तारीख से 15 दिन के भीतर लिखित प्रतिवाद प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित अवधि में जवाब नहीं मिलने पर उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर एकपक्षीय कार्रवाई किए जाने की चेतावनी दी गई है।अब इस पूरे मामले में तीन सवाल प्रमुख हैं—क्या परिषद की बैठकों से संबंधित वैधानिक प्रावधानों का पालन हुआ, कार्यवृत्त पुस्तिका और तकनीकी स्वीकृतियों के मूल अभिलेख क्या स्थिति स्पष्ट करते हैं, और छह निर्माण कार्यों के भुगतान में दर्ज विसंगतियों पर अध्यक्ष का क्या पक्ष सामने आता है?इन सवालों के जवाब अध्यक्ष के लिखित प्रतिवाद, संबंधित दस्तावेजों और शासन के आगामी निर्णय से स्पष्ट होंगे। फिलहाल दमोह नगर पालिका की कार्यप्रणाली और वित्तीय अभिलेखों से जुड़ा यह मामला प्रशासनिक जवाबदेही के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
