यह जनहित याचिका मातृ फाउंडेशन की ओर से एडवोकेट अमेय बजाज ने वर्ष 2021 में दायर की थी। इसमें इंदौर-देवास बायपास की खराब हालत के साथ वाहन चालकों की सुरक्षा से जुड़े कई गंभीर मुद्दे उठाए गए हैं। याचिका के अनुसार बायपास पर जगह-जगह बड़े गड्ढे मौजूद रहे हैं। सर्विस रोड की हालत भी खराब बताई गई है। इसके अलावा खुले ड्रेनेज जलभराव और खराब या बंद स्ट्रीट लाइट के कारण वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इन समस्याओं के चलते दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ने का मुद्दा भी याचिका में उठाया गया है।
याचिकाकर्ता ने पहले की सुनवाई में कोर्ट को बताया था कि बायपास की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। उनका आरोप था कि सड़क पर गड्ढों और अन्य खामियों के कारण हादसों का खतरा बना हुआ है। याचिका में यह भी दावा किया गया कि गड्ढे में गिरने से एक महिला की मौत हुई थी। याचिकाकर्ता ने सड़क सुरक्षा से जुड़े न्यायिक निर्देशों का पालन नहीं होने का मुद्दा उठाते हुए संबंधित एजेंसियों से प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने NHAI से यह जानकारी मांगी थी कि वर्ष 2023 में हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद बायपास की स्थिति सुधारने के लिए क्या कदम उठाए गए। इसके जवाब में NHAI ने तस्वीरें पेश करते हुए दावा किया था कि सड़क के गड्ढे भर दिए गए हैं और समस्याओं को दूर करने के लिए जरूरी काम किए गए हैं। हालांकि कोर्ट ने केवल इन दावों के आधार पर स्थिति को अंतिम रूप से स्पष्ट मानने के बजाय याचिकाकर्ता को स्वयं मौके पर जाकर निरीक्षण करने को कहा था।
आज की सुनवाई में सड़क की वास्तविक स्थिति और प्राधिकरण की ओर से किए गए सुधार कार्यों को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है। खास तौर पर यह देखा जाएगा कि गड्ढों की समस्या कितनी दूर हुई है और सर्विस रोड जल निकासी तथा प्रकाश व्यवस्था जैसी समस्याओं में कितना सुधार हुआ है। हालांकि सुनवाई से पहले यह कहना उचित नहीं होगा कि सभी समस्याएं दूर हो चुकी हैं या अभी भी पहले जैसी स्थिति बनी हुई है।
याचिका में राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क सुरक्षा संबंधी निर्देशों के पालन का मुद्दा भी शामिल है। इसमें दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान करने और वहां चेतावनी संकेतक लगाने के साथ पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई है। अवैध पार्किंग अवैध ढाबों और व्यावसायिक अतिक्रमण जैसी समस्याओं पर नियंत्रण तथा आपातकालीन सेवाओं को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया गया है।
याचिकाकर्ता की मांग है कि संबंधित एजेंसियां बायपास की सड़क को सुरक्षित बनाने के लिए ठोस कदम उठाएं। जल निकासी की उचित व्यवस्था की जाए और दुर्घटना संभावित स्थानों पर जरूरी सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं। अब हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि NHAI के सुधार संबंधी दावों और मौके पर सामने आने वाली स्थिति में कितना अंतर है।
