अशोक पंडित ने बी.पी. सिंह के निधन पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उनके बनाए अपराध और डर पर आधारित धारावाहिकों ने देशभर के दर्शकों को लंबे समय तक बांधे रखा। उन्होंने कहा कि बी.पी. सिंह का काम आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा बना रहेगा। पंडित ने यह भी बताया कि जब बी.पी. सिंह भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन निर्देशक संघ के अध्यक्ष थे, तब उन्हें उनके साथ करीबी सहयोगी के रूप में काम करने का अवसर मिला था।
उन्होंने दिवंगत निर्माता-निर्देशक को बेहतरीन इंसान और प्रिय मित्र बताते हुए उनके परिवार तथा करीबियों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त कीं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, बी.पी. सिंह का अंतिम संस्कार 28 अक्टूबर को किया जाएगा। अंतिम संस्कार के समय और स्थान से जुड़ी विस्तृत जानकारी बाद में साझा किए जाने की बात कही गई है।
बी.पी. सिंह का पूरा नाम बृजेंद्रपाल सिंह था। उनका जन्म उत्तराखंड के देहरादून में हुआ था। उन्होंने वर्ष 1973 में दूरदर्शन के साथ समाचार कैमरामैन के रूप में अपने पेशेवर करियर की शुरुआत की। करीब दस वर्षों तक कैमरे के पीछे काम करने के बाद वह मुंबई पहुंचे। इसके बाद उन्होंने टेलीविजन कार्यक्रमों के निर्माण और निर्देशन की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई।
उनके करियर में दूरदर्शन के लिए बनाई गई टेलीफिल्म ‘सिर्फ चार दिन’ का अहम स्थान रहा। इस फिल्म की तैयारी के दौरान वह पुलिस की अपराध शाखा में जाने लगे थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात निरीक्षक जयंत वागले से हुई। पुलिस की जांच प्रक्रिया और अपराधों को सुलझाने के तरीकों में उनकी रुचि बढ़ी। आगे चलकर यही दिलचस्पी उनके चर्चित अपराध धारावाहिक ‘सीआईडी’ की पृष्ठभूमि बनी।
वर्ष 1998 में शुरू हुए ‘सीआईडी’ ने बी.पी. सिंह को भारतीय टेलीविजन के प्रमुख निर्माताओं और निर्देशकों में शामिल कर दिया। अपराधों की जांच, रहस्य और पुलिस की कार्यप्रणाली पर आधारित इस धारावाहिक ने दर्शकों के बीच व्यापक पहचान बनाई। लंबे समय तक प्रसारित होने के कारण यह भारतीय टेलीविजन के चर्चित कार्यक्रमों में गिना गया।
‘सीआईडी’ से पहले वर्ष 1995 में प्रसारित हुए डर और रहस्य पर आधारित धारावाहिक ‘आहट’ के निर्माण और निर्देशन में भी बी.पी. सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही। डरावनी कहानियों और रहस्यमय घटनाओं पर आधारित इस कार्यक्रम ने भी दर्शकों के बीच लोकप्रियता हासिल की। इन दोनों धारावाहिकों के जरिए उन्होंने टेलीविजन पर अपराध और हॉरर शैली को मजबूत पहचान दिलाने में योगदान दिया।
उनके काम का दायरा इन दो धारावाहिकों तक सीमित नहीं था। वह ‘एक शून्य शून्य’, ‘सीआईडी: स्पेशल ब्यूरो’, ‘अचानक 37 साल बाद’, ‘रात होने को है’, ‘जिंदगी बदल सकता है हादसा’, ‘गुटुर गू’, ‘सूर्य द सुपर कॉप’, ‘हम ने ली है शपथ’, ‘सुपरकॉप्स वर्सेज सुपर विलेन’ और ‘दिव्य दृष्टि’ जैसे कार्यक्रमों से भी जुड़े रहे।
बी.पी. सिंह का निधन भारतीय टेलीविजन के उस दौर की एक महत्वपूर्ण हस्ती का जाना है, जिन्होंने समाचार कैमरे से अपने करियर की शुरुआत कर अपराध और रहस्य आधारित धारावाहिकों के जरिए व्यापक पहचान बनाई। उनके काम और लोकप्रिय कार्यक्रमों को लंबे समय तक याद किया जाएगा।
