छोटे व्यापारियों को हटाने के विरोध में घंटाघर पर गरमाया माहौल, व्यापारी महासंघ ने दी धनतेरस के दूसरे दिन दमोह बंद की चेतावनी
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने कहा—अव्यवस्था फैलाने वाला कोई भी हो, उसके विरुद्ध होगी कार्रवाई
दमोह 2 Nov 2026 / दीपावली के प्रमुख त्योहारों के बीच दमोह नगर के हृदय स्थल घंटाघर पर फुटपाथी दुकानदारों को हटाने को लेकर विवाद गहरा गया है। सड़क किनारे मिट्टी के बर्तन, सिंघाड़ा, फल एवं पूजन सामग्री बेचकर आजीविका चलाने वाले छोटे व्यापारियों ने घंटाघर पर जमकर हंगामा किया। महिला एवं पुरुष दुकानदारों ने व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष एवं भारतीय जनता पार्टी के जिला उपाध्यक्ष संजय यादव के विरुद्ध नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि उनके दबाव में उन्हें घंटाघर के आसपास के मार्गों से हटाकर अन्यत्र व्यापार करने के लिए भेजने का प्रयास किया जा रहा है।
इस दौरान काफी देर तक घंटाघर क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी का दौर चलता रहा। छोटे दुकानदारों ने संजय यादव मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए प्रशासन और नगर पालिका की व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि त्योहार के समय जब उनकी दुकानदारी सबसे अधिक होती है, तब उन्हें हटाने की कोशिश करना उनके परिवारों की आजीविका पर सीधा प्रहार है।
घंटाघर पर शुरू हुआ यह विवाद शाम तक एक नए राजनीतिक एवं व्यापारिक घटनाक्रम में बदल गया। जहां एक ओर छोटे दुकानदार अपनी दुकानें हटाए जाने का विरोध कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष संजय यादव के नेतृत्व में लगभग आधा सैकड़ा व्यापारी संयुक्त कलेक्ट्रेट भवन पहुंचे और प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए धनतेरस के दूसरे दिन दमोह बंद करने की चेतावनी दे डाली।
घंटाघर पर छोटे दुकानदारों का आक्रोश, महिला-पुरुषों ने लगाए नारे
दमोह के घंटाघर क्षेत्र में सड़क किनारे छोटे-छोटे व्यवसाय करने वाले दुकानदारों में उस समय आक्रोश देखने को मिला, जब उन्हें घंटाघर के आसपास के मार्गों से हटाकर अन्य स्थानों पर व्यापार करने के लिए भेजे जाने की बात सामने आई।इन दुकानदारों में मिट्टी के बर्तन बेचने वाले, सिंघाड़ा विक्रेता, फल विक्रेता और पूजन सामग्री की दुकान लगाने वाले छोटे व्यापारी शामिल हैं। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं, जो त्योहारों के दौरान सड़क किनारे दुकान लगाकर अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करती हैं।
प्रदर्शन कर रहे दुकानदारों का आरोप था कि उन्हें जबरन हटाने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष संजय यादव पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके कहने पर ही छोटे व्यापारियों को घंटाघर क्षेत्र से हटाने की कोशिश की जा रही है।छोटे व्यापारियों का कहना था कि यदि प्रशासन को यातायात व्यवस्था बेहतर बनानी है, तो इसके लिए सभी व्यापारियों के साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए। केवल छोटे दुकानदारों को हटाना और बड़े व्यापारियों को छूट देना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है।इस दौरान प्रदर्शनकारी दुकानदार लगातार नारेबाजी करते रहे। घंटाघर पर काफी देर तक माहौल तनावपूर्ण बना रहा और छोटे व्यापारियों के आक्रोश के चलते प्रशासन एवं पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
छोटे व्यापारियों का सवाल—हमारा अतिक्रमण दिखता है, बड़े व्यापारियों का क्यों नहीं?
घंटाघर पर प्रदर्शन कर रहे छोटे दुकानदारों ने प्रशासन और नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना था कि यदि सड़क किनारे दुकान लगाने से यातायात बाधित होता है और कानून एवं व्यवस्था प्रभावित होती है, तो बड़े व्यापारियों द्वारा किए गए अतिक्रमण पर भी समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए।दुकानदारों ने सवाल उठाया कि छोटे व्यापारी कुछ स्थानों पर बैठकर मिट्टी के बर्तन, फल, सिंघाड़ा एवं पूजन सामग्री बेचते हैं, तो उन्हें तत्काल हटाने की बात कही जाती है। लेकिन बड़े व्यापारियों द्वारा सड़क एवं फुटपाथ पर सामान रखने के मामलों में प्रशासन की कार्रवाई कहां दिखाई देती है?
उनका आरोप था कि बड़े व्यापारी अपने हितों को सुरक्षित रखने के लिए छोटे दुकानदारों को निशाना बना रहे हैं। त्योहारों के समय छोटे दुकानदारों की दुकानें हटाने से उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित होगी और परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो सकता है।प्रदर्शनकारियों ने व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष संजय यादव का नाम लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और व्यापारी महासंघ की ओर से इन्हें निराधार बताया गया है।
पुलिस अधिकारियों ने काफी देर तक की समझाइश
घंटाघर पर हंगामे की सूचना मिलने के बाद सिटी कोतवाली थाना प्रभारी मनीष कुमार, महिला थाना प्रभारी फेमीदा खान एवं यातायात थाना प्रभारी दलबीर सिंह मार्को पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे।पुलिस अधिकारियों ने हंगामा कर रहे महिला एवं पुरुष दुकानदारों से बातचीत कर स्थिति को शांत करने का प्रयास किया। अधिकारियों ने दुकानदारों की समस्याएं सुनीं और उन्हें समझाने का प्रयास किया कि त्योहारों के दौरान नगर में यातायात एवं कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है।
काफी देर तक चले समझाइश के दौर के बावजूद दुकानदार अपनी मांगों पर अड़े रहे। इसके बाद सभी दुकानदार सिटी कोतवाली पहुंचे, जहां पुलिस अधिकारियों ने आपसी सामंजस्य स्थापित कर विवाद का समाधान निकालने का प्रयास किया।पुलिस की ओर से दुकानदारों को आश्वासन दिया गया कि उन्हें बेहतर व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। बावजूद इसके छोटे व्यापारी इस बात पर सहमत नहीं हुए कि उन्हें घंटाघर क्षेत्र से हटाकर अन्यत्र भेज दिया जाए।
नगर पालिका की भूमिका पर भी उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान नगर पालिका की भूमिका भी चर्चा का विषय बनी रही। मुख्य नगर पालिका अधिकारी पूरे मामले में कहीं नजर नहीं आए, जबकि विवाद सीधे तौर पर नगर पालिका की व्यवस्था, फुटपाथी दुकानदारों और अतिक्रमण से जुड़ा हुआ था।वहीं नगर पालिका के अधिकारी जितेंद्र पटेल अपनी टीम के कुछ सदस्यों के साथ मौके पर दिखाई दिए। बताया गया कि नगर पालिका की टीम उच्च अधिकारियों के निर्देशों का इंतजार कर रही थी।
छोटे दुकानदारों का कहना था कि नगर पालिका को स्पष्ट नीति बनानी चाहिए, ताकि त्योहारों के समय छोटे व्यापारियों को बार-बार हटाने की स्थिति उत्पन्न न हो। उनका आरोप था कि नगर में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में समानता नहीं दिखाई देती और छोटे दुकानदारों पर ही दबाव बनाया जाता है।
शाम को व्यापारी महासंघ का कलेक्ट्रेट पहुंचकर शक्ति प्रदर्शन
घंटाघर पर छोटे दुकानदारों के हंगामे के बाद शाम के समय पूरे मामले में नया मोड़ सामने आया। व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष संजय यादव के नेतृत्व में लगभग आधा सैकड़ा व्यापारी संयुक्त कलेक्ट्रेट भवन पहुंचे।यहां व्यापारियों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और डिप्टी कलेक्टर बृजेश सिंह से संवाद किया। इस दौरान व्यापारी महासंघ की ओर से स्पष्ट रूप से कहा गया कि यदि प्रशासन उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देता है, तो धनतेरस के दूसरे दिन दमोह बंद रहेगा।
व्यापारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि आज वे ज्ञापन सौंपने आए हैं और प्रशासन को अपनी बात से अवगत करा रहे हैं। यदि उनकी मांगों पर कोई निर्णय नहीं लिया गया, तो आगे ज्ञापन देने की आवश्यकता नहीं होगी।व्यापारी महासंघ की ओर से कहा गया कि घंटाघर पर रामधुन की जाएगी और व्यापार बंद रखा जाएगा। इस चेतावनी के बाद त्योहारों से ठीक पहले नगर के व्यापारिक माहौल में हलचल तेज हो गई है।
संजय यादव ने आरोपों को बताया निराधार, व्यापारियों की समस्याएं रखीं
व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष संजय यादव ने अपने ऊपर लगाए गए संपूर्ण आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने छोटे दुकानदारों द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए व्यापारी महासंघ की ओर से अन्य व्यापारियों की समस्याओं को प्रशासन के सामने रखा।संजय यादव ने अपनी बात रखते हुए कहा कि दुकानें 20-30 दिन तक बंद रहने से भी उन्हें व्यक्तिगत रूप से कोई परेशानी नहीं होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यापारी महासंघ की ओर से व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए मांगें रखी जा रही हैं।
उनके नेतृत्व में कलेक्ट्रेट पहुंचे व्यापारियों ने प्रशासन से मांग की कि घंटाघर क्षेत्र में यातायात व्यवस्था के नाम पर की जा रही व्यवस्थाओं पर पुनर्विचार किया जाए और व्यापारियों की समस्याओं का समाधान निकाला जाए।इस घटनाक्रम में एक ओर छोटे दुकानदार संजय यादव पर आरोप लगा रहे थे, तो दूसरी ओर संजय यादव के नेतृत्व में व्यापारी प्रशासन के सामने अपनी मांगें रख रहे थे। इससे घंटाघर का विवाद अब नगर की प्रमुख व्यापारिक चर्चा बन गया है।
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने दिए स्पष्ट निर्देश
जानकारी के अनुसार, कुछ व्यापारी कलेक्टर प्रताप नारायण यादव के पास भी पहुंचे। कलेक्टर ने स्पष्ट रूप से कहा कि अव्यवस्था फैलाने वाला चाहे कोई भी हो, उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।कलेक्टर के इस कथन को घंटाघर पर उत्पन्न विवाद के बीच प्रशासन की सख्त चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि नगर पालिका अधिकारी एवं पुलिस अधिकारियों को इस पूरे मामले में विशेष निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन की प्राथमिकता त्योहारों के दौरान आम नागरिकों को बेहतर व्यवस्था उपलब्ध कराना, यातायात को सुचारु रखना और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था को रोकना है।हालांकि प्रशासन की ओर से छोटे दुकानदारों को लेकर क्या अंतिम निर्णय लिया जाएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं हुआ है। फिलहाल दोनों पक्ष अपनी-अपनी मांगों पर कायम दिखाई दे रहे हैं।
त्योहारों में घंटाघर के पांचों मार्गों पर होती है विशेष व्यवस्था
दमोह नगर का घंटाघर प्रमुख व्यापारिक केंद्र होने के साथ-साथ नगर के पांच प्रमुख मार्गों का संगम स्थल भी है। दीपावली, धनतेरस और अन्य बड़े त्योहारों के दौरान यहां बड़ी संख्या में लोग खरीदारी के लिए पहुंचते हैं।भीड़ और यातायात के दबाव को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन एवं पुलिस द्वारा विशेष व्यवस्था की जाती है। त्योहारों के दौरान घंटाघर के पांचों मार्गों पर लगभग आधा किलोमीटर पहले से तीन एवं चार पहिया वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी जाती है।
इन वाहनों के लिए आसपास के मैदानों में पार्किंग की व्यवस्था की जाती है, ताकि बाजार क्षेत्र में भीड़ नियंत्रित रहे और पैदल चलने वाले नागरिकों को परेशानी न हो।सूत्रों के अनुसार, व्यापारी महासंघ की ओर से प्रशासन एवं पुलिस से मांग की गई है कि घंटाघर क्षेत्र में बैरिकेडिंग नहीं की जाए तथा तीन एवं चार पहिया वाहनों के प्रवेश पर रोक नहीं लगाई जाए।व्यापारी महासंघ का कहना है कि फुटपाथ पर दुकान लगाने वाले छोटे दुकानदारों के कारण अव्यवस्था उत्पन्न होती है। वहीं छोटे दुकानदारों का आरोप है कि बड़े व्यापारी अपने हितों को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें हटाने का दबाव बना रहे हैं।
छोटे और बड़े व्यापारियों के बीच बढ़ती खाई, प्रशासन के सामने चुनौती
घंटाघर पर सामने आया विवाद अब केवल फुटपाथी दुकानदारों को हटाने तक सीमित नहीं रह गया है। यह मामला छोटे एवं बड़े व्यापारियों के हितों, अतिक्रमण, यातायात व्यवस्था, नगर पालिका की कार्यप्रणाली और त्योहारों के दौरान आम नागरिकों की सुविधाओं से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बन गया है।एक ओर छोटे दुकानदार अपनी आजीविका बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तो दूसरी ओर व्यापारी महासंघ बाजार में यातायात व्यवस्था को लेकर अपनी मांगें रख रहा है।
ऐसे में प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है। उसे एक तरफ कानून एवं व्यवस्था बनाए रखनी है, वहीं दूसरी तरफ छोटे दुकानदारों को उनकी आजीविका से वंचित किए बिना बाजार में बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करनी है।यदि प्रशासन सभी व्यापारियों के लिए समान नीति बनाता है और अतिक्रमण तथा यातायात व्यवस्था को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करता है, तो संभव है कि इस विवाद का समाधान निकल सके।फिलहाल घंटाघर पर हुए हंगामे, व्यापारी महासंघ की दमोह बंद की चेतावनी और छोटे दुकानदारों के विरोध के बीच सभी की निगाहें प्रशासन के अगले निर्णय पर टिकी हुई हैं।
