
दमोह, 25 मार्च 2026। किसान कल्याण वर्ष 2026 के उपलक्ष्य में कृषि विभाग द्वारा जिला मुख्यालय के तहसील ग्राउंड दमोह में जिला स्तरीय कृषि विज्ञान मेला सह प्रदर्शनी का भव्य आयोजन किया गया। इस आयोजन में जिले भर से बड़ी संख्या में किसान, जनप्रतिनिधि, कृषि वैज्ञानिक एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत बीज, जैविक एवं प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण, जल संरक्षण और कृषि यंत्रीकरण के बारे में जानकारी प्रदान करना रहा, ताकि किसान कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर अपनी आय बढ़ा सकें।
कार्यक्रम में भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम शिवहरे, गोपाल पटैल, जनपद अध्यक्ष हटा गंगाराम पटैल, महेश पटैल, हेमंत पटैल, हरिश्चंद्र पटैल, मयंक श्रीवास्तव सहित जिले के अनेक जनप्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। अतिथियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण किया तथा किसानों से संवाद कर उनकी समस्याओं और सुझावों को भी सुना।
कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत एवं रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए उप संचालक कृषि जी.एल. अहिरवार ने की। उन्होंने बताया कि किसान कल्याण वर्ष के अंतर्गत किसानों को नई तकनीकों से जोड़ने, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने तथा कृषि को लाभकारी बनाने के उद्देश्य से जिले में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे विभागीय योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लें और वैज्ञानिक पद्धति से खेती अपनाकर उत्पादन बढ़ाएं।
मेले में कृषि विशेषज्ञों द्वारा किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन दिया गया। डॉ. शांति स्वरूप सारस्वित (नीमच) ने औषधीय फसलों की खेती की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि अश्वगंधा, सर्पगंधा, तुलसी, शतावरी, कालमेघ जैसी औषधीय फसलें कम लागत में अधिक आय प्रदान कर सकती हैं। उन्होंने किसानों को बाजार की मांग के अनुसार फसल चयन करने तथा अनुबंध खेती की संभावनाओं पर भी विचार करने की सलाह दी।
कृषि विज्ञान केंद्र दमोह के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. मनोज अहिरवार ने नरवाई प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, जैविक एवं प्राकृतिक खेती के लाभों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि फसल अवशेष जलाने से मिट्टी की उर्वरता कम होती है तथा पर्यावरण प्रदूषित होता है, इसलिए किसान नरवाई का उपयोग जैविक खाद बनाने में करें। उन्होंने जीरो बजट प्राकृतिक खेती, जीवामृत, घनजीवामृत तथा प्राकृतिक कीट नियंत्रण विधियों की जानकारी भी किसानों को दी।
मेले में कृषि विभाग, उद्यानिकी विभाग, पशुपालन विभाग, मत्स्य पालन विभाग, आत्मा परियोजना तथा निजी कृषि यंत्र निर्माताओं द्वारा स्टॉल लगाए गए। इन स्टॉलों पर उन्नत बीज, उर्वरक प्रबंधन, जैविक उत्पाद, कीट नियंत्रण तकनीक, ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली, आधुनिक कृषि उपकरण, फसल बीमा योजना, मृदा परीक्षण तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी प्रदर्शित की गई। किसानों ने इन स्टॉलों पर पहुंचकर विशेषज्ञों से चर्चा की और नई तकनीकों के बारे में जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम में प्राकृतिक खेती हाट-बाजार का भी आयोजन किया गया, जहां किसानों द्वारा तैयार जैविक उत्पादों का प्रदर्शन किया गया। इसमें जैविक अनाज, दालें, सब्जियां, मसाले तथा अन्य उत्पाद प्रदर्शित किए गए, जिन्हें देखने और समझने में किसानों ने विशेष रुचि दिखाई। इसके साथ ही उन्नत कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी में आधुनिक उपकरण जैसे सीड ड्रिल, मल्चर, रोटावेटर, स्प्रेयर, रीपर एवं अन्य कृषि यंत्रों का प्रदर्शन किया गया। किसानों ने इन यंत्रों की उपयोगिता और लागत के बारे में जानकारी ली।
इस अवसर पर अनुविभागीय कृषि अधिकारी एस.एल. कुर्मी, सहायक कृषि यंत्री राशि श्रीवास्तव, जिला सलाहकार कृषि विभाग गिरवर पटैल, समस्त वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, विकासखंड तकनीकी प्रबंधक आत्मा, सहायक तकनीकी प्रबंधक आत्मा, समस्त कृषि विस्तार अधिकारी, पशुपालन विभाग, उद्यानिकी विभाग एवं मत्स्य पालन विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान किसानों को विभागीय योजनाओं, अनुदान, प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा कृषि से जुड़े नवीन नवाचारों के बारे में भी जानकारी दी गई। किसानों ने प्रदर्शनी में लगे स्टॉलों का अवलोकन कर वैज्ञानिकों से सीधे संवाद किया और अपनी खेती से संबंधित समस्याओं का समाधान प्राप्त किया।
कार्यक्रम का संचालन विपिन चौबे द्वारा किया गया, जबकि आभार प्रदर्शन परियोजना संचालक आत्मा जे.एल. प्रजापति ने किया। आयोजन के अंत में किसानों ने इस प्रकार के कृषि विज्ञान मेलों को नियमित रूप से आयोजित करने की मांग की, ताकि उन्हें समय-समय पर नई तकनीकों और योजनाओं की जानकारी मिलती रहे।
जिला स्तरीय कृषि विज्ञान मेला किसानों के लिए ज्ञान, तकनीक और अनुभव साझा करने का महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ। इस आयोजन से किसानों में आधुनिक खेती, प्राकृतिक कृषि और कृषि यंत्रीकरण को लेकर जागरूकता बढ़ी तथा खेती को लाभकारी बनाने की दिशा में सकारात्मक पहल देखने को मिली।
