दमोह। जिले में गौशाला समितियों को मिलने वाला अनुदान भुगतान कलेक्टर महोदय के निर्देशों के बाद भी जारी नहीं हो पाया है। गौशाला संचालकों का आरोप है कि फाइलें लंबित रखी जा रही हैं, जिससे पिछले चार महीनों से भुगतान अटका हुआ है। भुगतान नहीं मिलने के कारण गौशालाओं के संचालन में आर्थिक संकट गहराता जा रहा है और पशुओं के लिए चारा व्यवस्था करना मुश्किल हो गया है।संचालकों का कहना है कि भुगतान में देरी से जहां गौशालाएं संकट में हैं, वहीं दूसरी ओर भूसा माफिया सक्रिय होकर जिले से अन्य राज्यों में लगातार भूसा भेज रहे हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि यदि समय पर अनुदान जारी हो जाए तो स्थानीय स्तर पर भूसे की उपलब्धता बढ़ेगी और गौशालाओं को राहत मिलेगी।
गौशाला संचालकों ने आशंका जताई है कि फाइल पास न होने के पीछे कहीं अधिकारियों का हिस्सा या अन्य कारण तो नहीं हैं। उनका कहना है कि कलेक्टर के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद भुगतान लंबित रहना कई सवाल खड़े करता है। संचालकों ने यह भी आरोप लगाया कि भुगतान रोककर अप्रत्यक्ष रूप से भूसा माफिया को लाभ पहुंचाया जा रहा है।
उक्त मामले को लेकर गौशाला संचालकों ने सामूहिक रूप से ज्ञापन सौंपते हुए प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया है कि चार माह से अनुदान नहीं मिलने से गौशालाओं की स्थिति गंभीर हो गई है और यदि शीघ्र भुगतान नहीं हुआ तो पशुओं के पालन-पोषण पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा।संचालकों ने मांग की है कि लंबित फाइलों का तत्काल निराकरण कर अनुदान राशि जारी की जाए, साथ ही भूसा की जिले से बाहर हो रही निकासी पर भी रोक लगाई जाए, ताकि गौशालाओं को प्राथमिकता के आधार पर चारा उपलब्ध कराया जा सके।प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मामले की जानकारी ली जा रही है और नियमानुसार प्रक्रिया पूरी कर जल्द भुगतान कराने का प्रयास किया जाएगा।
