दमोह। पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण शासकीय अध्यापक-शिक्षक संघ म.प्र. के पदाधिकारियों ने वर्ष 2005 एवं उसके बाद संविदा स्कूल शिक्षक भर्ती पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षकों को आगामी जुलाई-अगस्त 2026 में प्रस्तावित शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से मुक्त रखने की मांग उठाई है। इस संबंध में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर शासन से सहानुभूतिपूर्वक निर्णय लेने की अपील की गई है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल के पत्र एवं म.प्र. शासन के राजपत्रों के अनुसार पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। संगठन का कहना है कि वर्ष 2005, 2008 एवं 2011 में व्यापमं द्वारा आयोजित संविदा शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण कर नियुक्त हुए प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षक पहले ही निर्धारित प्रक्रिया से चयनित हो चुके हैं, इसलिए उन्हें पुनः TET में शामिल करना उचित नहीं है।
संगठन ने यह भी बताया कि आगामी जुलाई एवं अगस्त 2026 में प्रस्तावित शिक्षक पात्रता परीक्षा में इन शिक्षकों को शामिल करना अनावश्यक दबाव उत्पन्न करेगा। राजपत्र संशोधन के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा गया कि पात्रता परीक्षा की वैधता परिणाम घोषित होने के बाद दो वर्ष या अगली परीक्षा तक मानी जाती है, ऐसे में पूर्व में पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण शिक्षकों को पुनः परीक्षा के दायरे में लाना न्यायसंगत नहीं है।
ज्ञापन में मांग की गई है कि वर्ष 2005 एवं उसके बाद आयोजित पात्रता परीक्षाओं में उत्तीर्ण प्रदेश के सभी प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षकों को आगामी TET से मुक्त रखा जाए। साथ ही आवश्यकता पड़ने पर राज्य शासन द्वारा माननीय सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर कर शिक्षकों को राहत दिलाने का भी अनुरोध किया गया है।
अंत में संगठन ने शासन से अनुरोध किया है कि शिक्षकों के हित में सहानुभूतिपूर्वक विचार कर शीघ्र उचित निर्णय लिया जाए, ताकि लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों को अनावश्यक परीक्षा से राहत मिल सके।
