दमोह। जैविक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दमोह नगर में प्रारंभ किए गए जैविक हाट बाजार की व्यवस्थाएं अब किसानों के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही हैं। भीषण गर्मी के बीच छाया और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जैविक उत्पाद बेचने वाले किसान चिलचिलाती धूप में घंटों बैठने को मजबूर हैं। रविवार को लगे बाजार में कई किसान अपने साथ लाए फल-सब्जियों को धूप से बचाने के लिए कपड़े, तिरपाल और गत्तों का सहारा लेते नजर आए, वहीं खुद भी गर्मी से बचने के लिए अस्थायी इंतजाम करते दिखाई दिए।
विदित हो कि दमोह कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर के निर्देशन में नगर के जटाशंकर क्षेत्र के समीप प्रति रविवार जैविक हाट बाजार प्रारंभ किया गया था। इस बाजार का उद्देश्य जिले के जैविक खेती करने वाले किसानों को सीधे उपभोक्ताओं से जोड़ना और रसायन मुक्त उत्पादों को बढ़ावा देना था। शुरुआत में इस पहल को किसानों और नागरिकों का अच्छा प्रतिसाद मिला और बड़ी संख्या में किसान अपने उत्पाद लेकर यहां पहुंचने लगे।समय बीतने के साथ बाजार को जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पड़े महिला बस्ती गृह के प्रांगण में स्थानांतरित कर दिया गया। इसके बाद बाजार को सप्ताह में दो दिन—रविवार और बुधवार—को आयोजित किया जाने लगा। किसानों का कहना है कि बाजार को स्थानांतरित किए जाने के बाद से व्यवस्थाएं लगातार कमजोर होती गईं और अब स्थिति यह है कि यहां स्थायी शेड, पेयजल, शौचालय और बैठने की पर्याप्त व्यवस्था भी नहीं है।

किसानों के अनुसार पहले जहां विशाल टीन शेड के नीचे बाजार लगता था, वहीं वर्तमान में बांस के सहारे ग्रीन नेट डालकर अस्थायी व्यवस्था बनाई गई है। तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच यह व्यवस्था पूरी तरह नाकाफी साबित हो रही है। कई स्थानों पर ग्रीन नेट फटी हुई है, जिससे सीधी धूप नीचे बैठने वाले किसानों और उनके उत्पादों पर पड़ रही है। इससे हरी सब्जियां जल्दी मुरझा जाती हैं और किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।महिला किसानों ने अव्यवस्थाओं को लेकर घोर आपत्ति जताते हुए कहा कि वे सुबह से दोपहर तक खुले में बैठने को मजबूर हैं। पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से उन्हें अपने घर से पानी लाना पड़ता है या फिर आसपास भटकना पड़ता है। उन्होंने शासन-प्रशासन से मांग की है कि स्थायी टीन शेड, ठंडे पेयजल, पंखे या कूलर जैसी व्यवस्था के साथ बैठने के लिए उचित प्लेटफॉर्म बनाया जाए, ताकि जैविक हाट बाजार का उद्देश्य पूरा हो सके।
पुरुष किसानों ने भी बताया कि व्यवस्थाओं की कमी का असर ग्राहकों की संख्या पर भी पड़ रहा है। पहले जहां बड़ी संख्या में लोग जैविक फल-सब्जियां खरीदने आते थे, वहीं अब कम ग्राहक पहुंच रहे हैं। गर्मी के कारण लोग ज्यादा देर तक बाजार में रुकना नहीं चाहते, जिससे बिक्री प्रभावित हो रही है। किसानों का कहना है कि यदि उचित छाया, पार्किंग और पेयजल की व्यवस्था हो तो बाजार की रौनक फिर से लौट सकती है।
बाजार में पहुंचे कुछ ग्राहकों ने भी अव्यवस्था पर नाराजगी जताई। उनका कहना था कि जैविक उत्पाद खरीदने की इच्छा के बावजूद धूप और असुविधा के कारण अधिक समय तक रुकना मुश्किल हो जाता है। कई ग्राहकों ने कहा कि यदि बाजार को व्यवस्थित किया जाए, साफ-सफाई और छाया की बेहतर व्यवस्था हो, तो अधिक लोग यहां आएंगे और किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।
किसानों ने यह भी बताया कि बाजार को शुरू हुए डेढ़ वर्ष के करीब समय बीत चुका है और 100 से अधिक दिवस बाजार लग चुका है, लेकिन स्थायी व्यवस्थाओं को लेकर अब तक ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। उनका कहना है कि जैविक खेती को बढ़ावा देने की बात तो की जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर किसानों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं।कुल मिलाकर जैविक हाट बाजार, जो किसानों को सीधे उपभोक्ताओं से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता था, वर्तमान में मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द स्थायी शेड, पेयजल, बैठने की व्यवस्था, साफ-सफाई और प्रचार-प्रसार की व्यवस्था की जाए, ताकि जैविक हाट बाजार का उद्देश्य सफल हो और किसानों को इसका वास्तविक लाभ मिल सके।
