कानून के सम्मान और पुलिस सुरक्षा को लेकर दिया मजबूत संदेश
दमोह। ड्यूटी के दौरान पुलिस आरक्षक पर त्रिशूल से हमला करने के बहुचर्चित मामले में न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी को 7 वर्ष के सश्रम कारावास से दंडित किया है। चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश जितेन्द्र नारायण सिंह की अदालत द्वारा सुनाया गया यह फैसला कानून व्यवस्था बनाए रखने में लगे पुलिसकर्मियों की सुरक्षा और सम्मान के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
होलिका दहन कार्यक्रम के दौरान हुई थी घटना
अपर लोक अभियोजक गिरीश राठौर ने जानकारी देते हुए बताया कि 14 मार्च 2025 को थाना कोतवाली क्षेत्र के चैनपुरा मोहल्ले में होलिका दहन का कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा था। इसी दौरान थाना कोतवाली के आरक्षक रानू राय और आरक्षक राजेश गौड़ अपने कर्तव्य के निर्वहन में रात्रि गश्त पर थे।जब दोनों आरक्षक चैनपुरा वार्ड पहुंचे तो उन्होंने वहां मौजूद लोगों से शांतिपूर्वक होलिका दहन करने की अपील की। इसी दौरान चैनपुरा निवासी सूरज अहिरवार हाथ में त्रिशूल लेकर अचानक मौके पर पहुंचा और आरक्षक राजेश गौड़ पर जान से मारने की नियत से पीछे से सिर पर वार कर दिया।
गंभीर रूप से घायल हुए आरक्षक
हमले में आरक्षक राजेश गौड़ को गंभीर चोट आई। घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। घायल आरक्षक को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज किया गया। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपी सूरज अहिरवार के खिलाफ थाना कोतवाली में प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू की।
एक वर्ष में पूर्ण हुआ विचारण
प्रकरण का विचारण न्यायालय में सुनवाई के बाद लगभग एक वर्ष की अवधि में पूर्ण किया गया। अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों और परिस्थितिजन्य प्रमाणों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी पाया और उसे 7 वर्ष के सश्रम कारावास से दंडित किया।
न्यायालय के फैसले की सराहना
न्यायालय का यह निर्णय समाज में कानून के प्रति विश्वास को मजबूत करने वाला माना जा रहा है। ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर हमला न केवल कानून व्यवस्था को चुनौती देता है बल्कि समाज की सुरक्षा व्यवस्था को भी प्रभावित करता है। ऐसे मामलों में सख्त सजा से स्पष्ट संदेश जाता है कि कानून हाथ में लेने वालों के साथ कठोरता से निपटा जाएगा।
समाज के लिए महत्वपूर्ण संदेश
यह फैसला समाज के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण है —
- कानून व्यवस्था बनाए रखने वाले कर्मचारियों पर हमला बर्दाश्त नहीं
- त्योहारों के दौरान शांति बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी
- पुलिस की कार्रवाई में बाधा डालना गंभीर अपराध
- हिंसा के बजाय संवाद और सहयोग का रास्ता अपनाना आवश्यक
पुलिस और न्याय व्यवस्था में बढ़ा विश्वास
इस फैसले से आम नागरिकों में यह संदेश गया है कि कानून अपना काम करता है और दोषियों को सजा मिलती है। साथ ही पुलिस बल का मनोबल भी बढ़ता है, जो कठिन परिस्थितियों में भी अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं।
प्रभावी पैरवी से मिला न्याय
मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक गिरीश राठौर द्वारा प्रभावी पैरवी की गई, जिसके परिणामस्वरूप न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार देते हुए कठोर सजा सुनाई।न्यायालय का यह फैसला कानून के राज को मजबूत करने के साथ-साथ समाज में शांति और अनुशासन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
