दमोह/जिले में निजी विद्यालयों द्वारा महंगी निजी प्रकाशकों की पुस्तकों को लागू किए जाने के मुद्दे पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर एवं जिला समिति अध्यक्ष सुधीर कुमार कोचर ने स्पष्ट कहा है कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुसार कक्षा 9वीं से 12वीं तक सभी निजी और अशासकीय विद्यालयों में एनसीईआरटी/एससीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों को लागू करना अनिवार्य है, जबकि कक्षा 1 से 8 तक इन पुस्तकों को लागू करने की सख्त सलाह दी गई है।
कलेक्टर कोचर ने कहा कि जिले के निजी विद्यालयों को निर्देशित किया गया है कि वे निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकों के स्थान पर एनसीईआरटी/एससीईआरटी तथा पाठ्य पुस्तक निगम द्वारा प्रकाशित पुस्तकों को ही लागू करें, ताकि विद्यार्थियों और अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े।
189 विद्यालयों ने दी सहमति
प्रशासन के अनुसार दमोह जिले के 189 निजी विद्यालयों ने लिखित रूप से यह सहमति दी है कि वे एनसीईआरटी/एससीईआरटी की पुस्तकों को लागू करेंगे। इन विद्यालयों द्वारा पुस्तकों की सूची भी जिला समिति को सौंप दी गई है, जिसके आधार पर अनुमति आदेश जारी किए जा चुके हैं।
हालांकि जिले में संचालित 77 निजी विद्यालयों ने प्रस्ताव दिया है कि वे शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कुछ कक्षाओं में एनसीईआरटी/एससीईआरटी के साथ निजी प्रकाशकों की पुस्तकें भी लागू करना चाहते हैं।
निजी विद्यालयों की दलील, लेकिन प्रमाण नहीं
कलेक्टर की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में निजी विद्यालयों के प्राचार्य एवं प्रबंधन प्रतिनिधियों ने तर्क दिया कि एनसीईआरटी और एससीईआरटी की पुस्तकों की गुणवत्ता वर्तमान प्रतियोगी वातावरण की आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं है।
हालांकि जब प्रशासन ने इस आकलन का ठोस आधार मांगा तो विद्यालय प्रबंधन कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि एनसीईआरटी/एससीईआरटी की पुस्तकें बाल मनोविज्ञान और शैक्षणिक शोध के आधार पर तैयार की जाती हैं और उनकी गुणवत्ता के प्रमाण उपलब्ध हैं, जबकि निजी प्रकाशकों की पुस्तकों की गुणवत्ता पर विद्यालय कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर पाए।
अभिभावकों की सहमति का भी हवाला
बैठक में सेंट जॉन्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, दमोह द्वारा अभिभावकों के हस्ताक्षरयुक्त दस्तावेज प्रस्तुत किए गए, जिनमें कुछ कक्षाओं के कुछ विषयों में निजी प्रकाशकों की पुस्तकों के उपयोग की सहमति दर्शाई गई। समिति ने विद्यालय प्रबंधन को इन दस्तावेजों की मूल प्रतियां प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
नर्सरी और केजी कक्षाओं को लेकर भी उठे सवाल
विद्यालय प्रबंधन का कहना था कि नर्सरी, केजी-1 और केजी-2 के लिए एनसीईआरटी/एससीईआरटी की एक ही पुस्तक तीन वर्षों तक चलती है, जिससे विद्यार्थियों को नया विषयवस्तु नहीं मिल पाता और दोहराव की स्थिति बनती है।
आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों पर पड़ सकता है बोझ
कलेक्टर कोचर ने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार है और निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आरक्षित हैं।
दमोह जिले में कक्षा 1 से 8 तक लगभग 60 हजार विद्यार्थी नामांकित हैं, जिनमें से करीब 15 हजार विद्यार्थी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आते हैं। यदि निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें लागू होती हैं तो इन परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा, जिससे शिक्षा के अधिकार का मूल उद्देश्य प्रभावित हो सकता है।
विद्यालयों को प्रस्ताव पर पुनर्विचार के निर्देश
कलेक्टर एवं जिला समिति अध्यक्ष सुधीर कुमार कोचर ने सभी चिन्हित निजी विद्यालयों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने प्रस्ताव पर पुनर्विचार करें और शैक्षणिक सत्र 2026-27 में एनसीईआरटी/एससीईआरटी तथा पाठ्य पुस्तक निगम की पुस्तकों के माध्यम से ही अध्ययन-अध्यापन का कार्य संचालित करें।
उन्होंने कहा कि यह निर्णय जिले में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
अभिभावकों से भी अपील
प्रशासन ने अभिभावकों से भी अपील की है कि वे इस विषय का गंभीरता से अध्ययन करें और विद्यालय प्रबंधन से चर्चा कर विद्यार्थियों के हित में उचित निर्णय लें। यदि वे विद्यालय के निर्णय से सहमत नहीं हैं तो वे सक्षम प्राधिकारी अथवा न्यायालय के समक्ष भी अपनी याचिका प्रस्तुत कर सकते हैं।
