दमोह। अध्यापक-शिक्षक संयुक्त मोर्चा, जिला दमोह के बैनर तले बुधवार को कलेक्टर परिसर के सामने एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। सुबह 11 बजे से शुरू हुए इस धरने में जिले भर से आए शिक्षक-शिक्षिकाओं ने भाग लिया। बड़ी संख्या में महिला शिक्षिकाओं की उपस्थिति विशेष रूप से देखने को मिली। धरना समाप्ति के बाद प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन एडीएम मीना मसराम को सौंपकर मांगों पर शीघ्र कार्रवाई की मांग की।संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारियों ने बताया कि अध्यापक-शिक्षक संवर्ग से जुड़े कई मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं, जिनके समाधान के लिए शासन स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन अपेक्षित निर्णय नहीं होने के कारण शिक्षकों को धरना-प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ा।
दो प्रमुख मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन
ज्ञापन में मुख्य रूप से दो महत्वपूर्ण मांगों को प्रमुखता से उठाया गया।पहली मांग में कहा गया कि अध्यापक-शिक्षक संवर्ग के लिए टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता समाप्त की जाए। संयुक्त मोर्चा का कहना है कि इस संबंध में मध्यप्रदेश सरकार अध्यापक-शिक्षक संवर्ग के पक्ष में माननीय सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर करे, ताकि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को राहत मिल सके।दूसरी मांग में अध्यापक-शिक्षक संवर्ग को पेंशन, ग्रेच्युटी और अवकाशों के नगदीकरण का लाभ उनकी प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा अवधि की गणना कर देने की बात कही गई। पदाधिकारियों का कहना है कि इससे शिक्षकों को सेवा संबंधी लाभ मिलने के साथ आर्थिक सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी
धरना-प्रदर्शन में महिला शिक्षिकाओं की बड़ी संख्या मौजूद रही। महिलाओं ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को रखा और शासन से जल्द निर्णय लेने की अपील की। इस दौरान शिक्षकों ने कहा कि वे लंबे समय से शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में योगदान दे रहे हैं, ऐसे में उनकी सेवा शर्तों को स्पष्ट किया जाना आवश्यक है।
विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी रहे मौजूद
कार्यक्रम में अध्यापक-शिक्षक संयुक्त मोर्चा से जुड़े मान्यता प्राप्त और गैर-मान्यता प्राप्त संगठनों के जिला अध्यक्ष, पदाधिकारी एवं सदस्य शामिल हुए। उपस्थित पदाधिकारियों ने एक स्वर में कहा कि यदि मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को आगे और तेज किया जाएगा।धरना समाप्ति के बाद प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर एडीएम को ज्ञापन सौंपा। प्रशासन ने ज्ञापन को शासन तक भेजने का आश्वासन दिया।संयुक्त मोर्चा के प्रतिनिधियों ने उम्मीद जताई कि सरकार शिक्षकों की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर जल्द निर्णय लेगी, जिससे अध्यापक-शिक्षक संवर्ग को राहत मिल सके।
