(डॉ. एल.एन. वैष्णव)
भोपाल। मध्य प्रदेश में आयुष्मान भारत निरामयम योजना के तहत इलाज कराने वाले लाखों कार्डधारकों के लिए नई व्यवस्था ने चिंता बढ़ा दी है। 1 अप्रैल 2026 से लागू नियमों के बाद बिना NABH प्रमाणन वाले निजी अस्पतालों को योजना से बाहर कर दिया गया है। इस फैसले के चलते प्रदेश के 126 निजी अस्पतालों की मान्यता समाप्त हो गई है, जिससे मुफ्त इलाज के विकल्प अचानक सीमित हो गए हैं।जानकारी के अनुसार प्रभावित अस्पतालों में भोपाल के 51 और इंदौर के 30 अस्पताल शामिल हैं, जबकि ग्वालियर और जबलपुर के कई निजी अस्पताल भी इस दायरे में आए हैं। आयुष्मान भारत निरामयम के सीईओ डॉ. योगेश भरसट के अनुसार यह कदम अस्पतालों में उपचार की गुणवत्ता सुधारने और मरीजों को सुरक्षित सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उठाया गया है।
हालांकि इस निर्णय का सीधा असर आयुष्मान कार्ड पर निर्भर गरीब, वंचित और आदिवासी परिवारों पर पड़ रहा है। अब इन मरीजों को सीमित संख्या में बड़े अस्पतालों का रुख करना पड़ेगा, जिससे वहां मरीजों की भीड़ बढ़ने और इंतजार की अवधि लंबी होने की आशंका जताई जा रही है। छोटे और मध्यम निजी अस्पतालों के बाहर होने से ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों के मरीजों को अधिक दूरी तय करनी पड़ सकती है।
क्या है NABH और क्यों लागू हुई सख्ती
NABH यानी नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स अस्पतालों की गुणवत्ता, सुरक्षा और मरीज देखभाल के मानकों का प्रमाणन करता है। सरकार ने अब आयुष्मान योजना से जुड़े अस्पतालों के लिए फुल NABH प्रमाणपत्र को प्राथमिकता दी है। एंट्री लेवल प्रमाणन वाले अस्पतालों को निर्धारित समय सीमा में फुल NABH हासिल करना होगा, अन्यथा उनकी मान्यता समाप्त की जा सकती है।नई व्यवस्था में मरीजों की प्रतिक्रिया को भी अहम माना गया है। मोबाइल ऐप के माध्यम से मरीज अपने इलाज का फीडबैक दर्ज कर सकेंगे, जिसके आधार पर अस्पतालों की सेवाओं का मूल्यांकन किया जाएगा। इससे योजना में पारदर्शिता बढ़ाने और लापरवाह अस्पतालों पर कार्रवाई आसान करने की बात कही जा रही है।
गुणवत्ता आधारित भुगतान की नई व्यवस्था
नई नीति के तहत अस्पतालों को भुगतान भी उनकी गुणवत्ता के आधार पर किया जाएगा। फुल NABH प्रमाणपत्र वाले अस्पतालों को क्लेम राशि का 115 प्रतिशत तक भुगतान किया जाएगा, जबकि एंट्री लेवल अस्पतालों को अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे अस्पताल बेहतर सुविधाएं विकसित करने के लिए प्रेरित होंगे।
80 प्रतिशत अस्पताल प्रभावित होने की आशंका
प्रदेश के चार प्रमुख शहरों भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में कुल 395 आयुष्मान सूचीबद्ध अस्पताल हैं। इनमें से 212 अस्पताल एंट्री लेवल पर हैं और केवल 59 अस्पतालों के पास फुल NABH प्रमाणपत्र है। बिना प्रमाणन वाले अस्पताल तत्काल योजना से बाहर हो गए हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस बदलाव से प्रदेश के करीब 80 प्रतिशत निजी अस्पताल प्रभावित हो सकते हैं।
अस्पताल संचालकों ने उठाए सवाल
निजी अस्पताल संचालकों का कहना है कि अचानक लागू किए गए नियमों से मरीजों और अस्पतालों दोनों को परेशानी हो सकती है। उनका तर्क है कि यदि बड़ी संख्या में अस्पताल योजना से बाहर हो जाएंगे तो आयुष्मान कार्ड धारकों को समय पर इलाज मिलना कठिन हो जाएगा।नई व्यवस्था का उद्देश्य भले ही इलाज की गुणवत्ता सुधारना हो, लेकिन फिलहाल इस फैसले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सीमित अस्पतालों में बढ़ती भीड़ के बीच गरीब मरीजों को समय पर और सुगम उपचार कैसे मिल पाएगा। आने वाले समय में इस नीति का वास्तविक प्रभाव ही तय करेगा कि यह निर्णय राहत देता है या नई चुनौतियां खड़ी करता है।
