संघ शिक्षा वर्ग के प्रकट उत्सव में दिखी संगठन शक्ति, अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व की मिसाल

शाजापुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मालवा प्रांत के संघ शिक्षा वर्ग (व्यवसायी) का प्रकट उत्सव रविवार को स्थानीय छत्रपति शिवाजी स्टेडियम ग्राउंड में भव्य, अनुशासित एवं प्रेरणादायी वातावरण में संपन्न हुआ। 15 दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग के समापन अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में स्वयंसेवकों ने शारीरिक दक्षता, संगठन शक्ति और राष्ट्रभक्ति का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। वहीं समाज द्वारा ईंधन बचत, पर्यावरण संरक्षण एवं सार्वजनिक परिवहन के प्रति दिखाई गई जागरूकता कार्यक्रम की विशेष पहचान रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया गया। मंच पर वर्ग सर्वाधिकारी प्रवीण सैनी, जिला संघ चालक हुकम धनगर, मुख्य अतिथि सामाजिक चिंतक गोवर्धनलाल गुवाहाटिया तथा मुख्य वक्ता मध्य क्षेत्र कार्यवाह अशोक अग्रवाल उपस्थित रहे।
प्रकट उत्सव में शिक्षार्थियों ने पूर्ण गणवेश में योग, दंड-योग, समता, आसन, व्यायाम तथा विभिन्न शारीरिक रचनाओं का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। वर्ग की विभिन्न वाहिनियों द्वारा प्रस्तुत कार्यक्रमों में अनुशासन, सामूहिकता और संगठनात्मक दक्षता का अद्भुत समन्वय देखने को मिला। शिक्षार्थियों द्वारा प्रस्तुत सामूहिक गीत ने पूरे वातावरण को राष्ट्रभक्ति और संगठन भावना से ओतप्रोत कर दिया।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण घोष दल की प्रस्तुति रही। घोष वादन के साथ निर्मित विविध चालित आकृतियों और सामूहिक प्रदर्शन ने उपस्थित नागरिकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। घोष दल की सुसंगठित प्रस्तुति ने संघ की प्रशिक्षण पद्धति और सामूहिक कार्यशैली का प्रभावी परिचय कराया।
वर्ग कार्यवाह राधेश्याम पाटीदार ने 15 दिवसीय संघ शिक्षा वर्ग का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए प्रशिक्षण की गतिविधियों और उपलब्धियों की जानकारी दी।
संघ समरस भारत के निर्माण में निभा रहा भूमिका : गोवर्धनलाल गुवाहाटिया
मुख्य अतिथि गोवर्धनलाल गुवाहाटिया ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने पर सभी स्वयंसेवकों और समाजजनों को शुभकामनाएं। उन्होंने कहा कि संघ स्थापना काल से ही राष्ट्रभक्ति, सामाजिक समरसता और संगठन निर्माण का कार्य कर रहा है। उन्हें विश्वास है कि संघ समाज में व्याप्त वैमनस्यता को समाप्त कर समरस और सशक्त भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण का मार्ग प्रशस्त करता है संघ : अशोक अग्रवाल
मुख्य वक्ता अशोक अग्रवाल ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने स्थापना काल से ही समाज को संगठित करने और व्यक्ति निर्माण का कार्य कर रहा है। संघ का उद्देश्य केवल संगठन खड़ा करना नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के भीतर संस्कार, चरित्र और राष्ट्रभक्ति का भाव जागृत करना है। जब व्यक्ति संस्कारित होगा तो परिवार, समाज और राष्ट्र स्वतः सशक्त होंगे।
उन्होंने कहा कि संघ शाखा के माध्यम से स्वयंसेवकों में अनुशासन, सेवा, समर्पण और सामाजिक उत्तरदायित्व के संस्कार विकसित किए जाते हैं। समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पित नागरिकों का निर्माण ही संघ का मूल उद्देश्य है।
अशोक अग्रवाल ने कहा कि भारत की गौरवशाली संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और जीवन दर्शन ने सदियों तक विश्व का मार्गदर्शन किया है। आज जब पूरी दुनिया महामारी, युद्ध, पर्यावरण संकट और सामाजिक विघटन जैसी चुनौतियों से जूझ रही है, तब विश्व की आशाभरी नजरें भारत की ओर हैं। भारतीय संस्कृति का “वसुधैव कुटुम्बकम्” का दर्शन मानवता को नई दिशा देने में सक्षम है।
उन्होंने कहा कि विश्व कल्याण के लिए भारत का विश्वगुरु बनना आवश्यक है। भारत केवल आर्थिक या सैन्य शक्ति के आधार पर नहीं, बल्कि अपने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों के बल पर विश्व का नेतृत्व कर सकता है। वर्तमान समय भारत के पुनर्जागरण का काल है और प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह इस राष्ट्रीय अभियान में अपनी सक्रिय भूमिका निभाए।
पंच परिवर्तन से आएगा सकारात्मक सामाजिक बदलाव
अग्रवाल ने संघ द्वारा समाज जीवन में अपनाए जा रहे पंच परिवर्तन का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को परिवार प्रबोधन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्यों के पालन तथा स्वदेशी भाव को अपने जीवन में उतारना चाहिए। इन मूल्यों के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति को सबसे पहले स्वयं का विकास करना चाहिए, उसके बाद परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए। जब प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्यों के प्रति सजग होगा, तभी भारत विश्व कल्याण के अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकेगा।
ईंधन बचत और सार्वजनिक परिवहन बना प्रेरक उदाहरण
प्रकट उत्सव की एक महत्वपूर्ण विशेषता समाज द्वारा ईंधन संरक्षण और सार्वजनिक परिवहन के संदेश को व्यवहार में उतारना रही। कार्यक्रम से पूर्व संघ द्वारा नागरिकों से निजी वाहनों के स्थान पर सार्वजनिक परिवहन के उपयोग का आग्रह किया गया था, जिसका व्यापक प्रभाव देखने को मिला।
जिले और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग बसों एवं अन्य सार्वजनिक साधनों से कार्यक्रम में पहुंचे। अनेक गांवों के नागरिकों ने समूह बनाकर एक ही वाहन से यात्रा की, जबकि नगर के कई क्षेत्रों से स्वयंसेवक एवं परिवारजन पैदल अथवा सामूहिक परिवहन के माध्यम से कार्यक्रम स्थल पहुंचे।
इस व्यवस्था से न केवल ईंधन की बचत हुई, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, यातायात प्रबंधन और सामाजिक सहभागिता का भी उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत हुआ। उपस्थित नागरिकों ने इसे समाज में उत्तरदायित्व और जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक प्रेरक पहल बताया।
प्रकट उत्सव में बड़ी संख्या में स्वयंसेवक, मातृशक्ति, प्रबुद्धजन एवं नगरवासी उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम में अनुशासन, राष्ट्रभक्ति, संगठन शक्ति और सामाजिक उत्तरदायित्व का भाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
संघ शिक्षा वर्ग का यह प्रकट उत्सव केवल प्रशिक्षण प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने संगठित समाज, पर्यावरण संरक्षण, ईंधन बचत और राष्ट्र निर्माण के मूल्यों का प्रभावी संदेश भी समाज के समक्ष प्रस्तुत किया।
