मध्यप्रदेश में ‘आयुष से आरोग्य’ अभियान की तैयारी तेज, ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की पहल; वात, पित्त और कफ के आकलन में होगा कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग, कुपोषण और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों पर भी सरकार का फोकस

(डॉ.एल.एन.वैष्णव)
भोपाल/ 2 नवंबर 2026मध्यप्रदेश के गांवों में अब स्वास्थ्य जागरूकता की नई पहल शुरू होने जा रही है। सरकार की प्रस्तावित ‘आयुष से आरोग्य’ योजना ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को नई दिशा देने की तैयारी में है। इस अभियान के माध्यम से योग, आयुर्वेद, संतुलित खानपान और बेहतर जीवनशैली को गांव-गांव तक पहुंचाने की योजना बनाई जा रही है। खास बात यह है कि पारंपरिक आयुर्वेदिक सिद्धांतों के साथ आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक का भी सहारा लिया जाएगा। इसका उद्देश्य ग्रामीणों की शारीरिक प्रकृति और संभावित स्वास्थ्य जोखिमों के शुरुआती संकेतों का आकलन कर समय रहते उन्हें उचित परामर्श उपलब्ध कराना है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप आयुष विभाग इस अभियान को पंचायत स्तर तक पहुंचाने की तैयारी कर रहा है। प्रदेश के आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार के नेतृत्व में विभागीय स्तर पर इसकी कार्ययोजना तैयार की जा रही है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य तथा महिला एवं बाल विकास विभाग को इस अभियान से जोड़ने की पहल की गई है। यदि यह योजना निर्धारित स्वरूप में जमीन पर उतरती है तो ग्रामीण स्वास्थ्य जागरूकता के क्षेत्र में मध्यप्रदेश की यह एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकती है।
पंचायत बनेगी ग्रामीण स्वास्थ्य जागरूकता का नया केंद्र
अभियान की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी ग्राम पंचायतों को बनाया जा रहा है। योजना के तहत पंचायत स्तर पर योगाभ्यास के लिए स्थान उपलब्ध कराने की तैयारी है। यहां योग प्रशिक्षकों के माध्यम से ग्रामीणों को नियमित योगाभ्यास कराया जाएगा। केवल योग तक ही यह पहल सीमित नहीं रहेगी, बल्कि लोगों को मौसम के अनुरूप खानपान, दिनचर्या, शारीरिक सक्रियता और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए भी प्रेरित किया जाएगा।
वर्तमान में आयुष वेलनेस सेंटरों में उपलब्ध योग प्रशिक्षकों की सेवाओं का विस्तार ग्रामीण क्षेत्रों तक करने की योजना है। इससे गांवों के बुजुर्गों, महिलाओं, युवाओं और अन्य नागरिकों को स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता एवं परामर्श स्थानीय स्तर पर मिल सकेगा। इसका व्यापक उद्देश्य बीमारी होने के बाद उपचार कराने की प्रवृत्ति के साथ-साथ बीमारी से बचाव के प्रति भी लोगों को जागरूक करना है।
एआई बताएगा वात-पित्त-कफ की स्थिति, शुरुआती स्तर पर मिलेगी चेतावनी
इस अभियान का सबसे चर्चित और आधुनिक पहलू आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग है। आयुष विभाग की योजना में एआई की सहायता से व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति तथा आयुर्वेद के वात, पित्त और कफ संबंधी संतुलन का प्रारंभिक आकलन करने की व्यवस्था शामिल है।इस आकलन के आधार पर संभावित स्वास्थ्य जोखिमों के शुरुआती संकेत पहचानने और व्यक्ति को उसकी आवश्यकता के अनुरूप आयुष परामर्श देने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही खानपान, योग और दिनचर्या में आवश्यक बदलाव के सुझाव दिए जा सकते हैं।
हालांकि यहां यह समझना भी जरूरी है कि एआई द्वारा प्राप्त संकेत किसी बीमारी की चिकित्सकीय पुष्टि नहीं होंगे। बीमारी का वास्तविक निदान चिकित्सकीय परीक्षण से ही संभव है। इसलिए इस तकनीक की उपयोगिता उसकी वैज्ञानिक विश्वसनीयता, सही आकलन और आवश्यकता पड़ने पर आगे की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने पर निर्भर करेगी।
गर्भवती महिलाओं को आयुष किट, मातृ स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान
अभियान में गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को विशेष प्राथमिकता देने की तैयारी है। अस्पतालों में प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) के लिए पहुंचने वाली तथा पंजीकृत गर्भवती महिलाओं को आयुष किट उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 22 मई को आयुष विभाग की समीक्षा बैठक में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने तथा सामान्य प्रसव को प्रोत्साहित करने के लिए केरल और तमिलनाडु की आयुष सेवाओं का अध्ययन करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद विभाग के चार सदस्यीय दल ने दोनों राज्यों का दौरा कर वहां की व्यवस्थाओं का अध्ययन किया और अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।
केरल में गर्भवती महिलाओं को आयुष किट उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी अध्ययन का हिस्सा रही है। इसी अनुभव के आधार पर मध्यप्रदेश की परिस्थितियों के अनुरूप योजना तैयार की जा रही है। आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार के अनुसार, अध्ययन रिपोर्ट के आधार पर प्रदेश में आवश्यक कार्ययोजना बनाई जा रही है।
यहां महत्वपूर्ण है कि गर्भावस्था के दौरान किसी भी औषधि का उपयोग चिकित्सकीय सलाह से ही किया जाना चाहिए। प्रस्तावित आयुष किट नियमित प्रसव पूर्व जांच, आवश्यक दवाओं और आधुनिक चिकित्सा सेवाओं का विकल्प नहीं होगी।
कुपोषण के खिलाफ साझा मोर्चा, बच्चों के स्वास्थ्य पर भी नजर
ग्रामीण क्षेत्रों में कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग को भी अभियान से जोड़ने की तैयारी है। इसके अंतर्गत जरूरतमंद बच्चों तक पोषण और स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं पहुंचाने पर जोर रहेगा। आयुष औषधियों के उपयोग का प्रस्ताव भी सामने आया है, लेकिन इसके लिए औषधियों के मानक, पात्रता, सुरक्षा और चिकित्सकीय निगरानी की स्पष्ट व्यवस्था आवश्यक होगी।इसके साथ ही मोटापा, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के जोखिम को कम करने के लिए संतुलित आहार, नियमित योग और दिनचर्या में सुधार को लेकर जागरूकता अभियान चलाने की योजना है।
तीन विभागों का समन्वय तय करेगा अभियान की सफलता
‘आयुष से आरोग्य’ अभियान को प्रभावी बनाने के लिए पंचायत, स्वास्थ्य और महिला एवं बाल विकास विभाग की संयुक्त भूमिका महत्वपूर्ण होगी। पंचायतों को योगाभ्यास के लिए स्थान उपलब्ध कराना होगा, स्वास्थ्य विभाग को गर्भवती महिलाओं और चिकित्सकीय सेवाओं के समन्वय में सहयोग करना होगा, जबकि महिला एवं बाल विकास विभाग पोषण संबंधी गतिविधियों को आगे बढ़ाएगा।फिलहाल योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू करने के लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है। प्रशिक्षित मानव संसाधन, औषधियों के मानक, एआई आधारित आकलन की विश्वसनीयता और जरूरतमंदों को चिकित्सकीय जांच उपलब्ध कराने जैसे विषयों पर स्पष्ट व्यवस्था बनना अभी बाकी है।
घोषणा से धरातल तक पहुंचने की होगी असली परीक्षा
मध्यप्रदेश में ‘आयुष से आरोग्य’ अभियान की अवधारणा ग्रामीण स्वास्थ्य के लिए संभावनाओं से भरी है। लेकिन इसकी वास्तविक सफलता केवल योजना की घोषणा से नहीं, बल्कि गांवों में नियमित योगाभ्यास, प्रशिक्षित विशेषज्ञों की उपलब्धता, सुरक्षित औषधियों, वैज्ञानिक जांच और समय पर उपचार की व्यवस्था से तय होगी।यदि पंचायत स्तर पर यह व्यवस्था नियमित और प्रभावी ढंग से संचालित होती है तो ग्रामीणों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाने के साथ-साथ निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य संबंधी मार्गदर्शन उपलब्ध कराना इस पहल की बड़ी उपलब्धि हो सकती है।अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि आयुष विभाग इस महत्वाकांक्षी योजना को कितनी जल्दी और किस प्रभावी स्वरूप में गांवों तक पहुंचाता है।
