दमोह में हालिया घटनाओं के बाद बढ़ी चिंता, फॉस्फीन गैस के खतरे को लेकर किसानों और आमजन को किया गया सतर्क
दमोह, 20 जून (शनिवार)। जिले में सल्फास के असुरक्षित उपयोग से सामने आई हालिया दुखद घटनाओं के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। अनाज भंडारण और फ्यूमिगेशन के दौरान बरती जाने वाली लापरवाही से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने विस्तृत सुरक्षा एडवाइजरी जारी करते हुए किसानों, गोदाम संचालकों, व्यापारियों और आम नागरिकों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।
कलेक्टर श्री यादव ने कहा कि सल्फास, जिसे एल्यूमिनियम फॉस्फाइड के नाम से भी जाना जाता है, एक अत्यंत विषैला रासायनिक पदार्थ है। इसका उपयोग मुख्य रूप से अनाज भंडारण के दौरान कीट नियंत्रण और फ्यूमिगेशन के लिए किया जाता है, लेकिन निर्धारित मात्रा से अधिक उपयोग और सुरक्षा मानकों की अनदेखी गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बन सकती है।
उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में यह देखा गया है कि जानकारी के अभाव और लापरवाही के कारण कई लोग सल्फास का उपयोग बिना किसी विशेषज्ञ सलाह के कर रहे हैं। कई बार एक क्विंटल अनाज के लिए निर्धारित एक छोटे पाउच के बजाय पूरा पाउच एक ही बोरी में डाल दिया जाता है, जिससे जरूरत से कहीं अधिक मात्रा में फॉस्फीन गैस उत्पन्न होती है।
कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि फॉस्फीन गैस रंगहीन होने के साथ-साथ अत्यधिक जहरीली होती है। बंद कमरों, गोदामों या भंडारण स्थलों में इसकी अधिक मात्रा कुछ ही मिनटों में जानलेवा साबित हो सकती है। उन्होंने कहा कि थोड़ी सी लापरवाही भी किसी परिवार के लिए बड़ा हादसा बन सकती है।
उन्होंने किसानों और भंडारणकर्ताओं से अपील की कि वे सल्फास को बच्चों की पहुंच से दूर रखें और इसका उपयोग केवल प्रशिक्षित व्यक्तियों की निगरानी में ही करें।
कृषि विभाग ने शुरू किया जागरूकता अभियान
उपसंचालक कृषि जे.एल. प्रजापति ने बताया कि कृषि विभाग द्वारा जिले के किसानों, सहकारी समितियों, गोदाम संचालकों और व्यापारियों को सल्फास के सुरक्षित उपयोग के संबंध में लगातार जागरूक किया जा रहा है। इसके लिए कृषि विस्तार अधिकारियों को गांव-गांव जाकर किसानों को जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने बताया कि सल्फास नमी के संपर्क में आते ही फॉस्फीन गैस छोड़ता है, इसलिए इसका भंडारण और उपयोग अत्यंत सावधानी के साथ किया जाना चाहिए। विभाग ने किसानों से किसी भी प्रकार की शंका होने पर कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेने की अपील की है।
प्रशासन ने जारी किए सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश
जिला प्रशासन द्वारा जारी एडवाइजरी के अनुसार—
- सल्फास का उपयोग केवल प्रशिक्षित और अधिकृत व्यक्ति ही करें।
- फ्यूमिगेशन के दौरान दस्ताने, मास्क या रेस्पिरेटर, सुरक्षात्मक चश्मा और पूरे शरीर को ढंकने वाले कपड़ों का उपयोग अनिवार्य रूप से करें।
- अनाज के ढेर, बोरियों और गोदाम को अच्छी तरह सील करें, ताकि गैस बाहर न निकल सके।
- उपचारित क्षेत्र में किसी भी व्यक्ति या पशु का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रखें।
- फ्यूमिगेशन स्थल के बाहर स्पष्ट चेतावनी बोर्ड लगाएं।
- दवा को हमेशा सूखी, ठंडी और सुरक्षित जगह पर रखें तथा इसे नमी और पानी से दूर रखें।
- सल्फास को भोजन सामग्री, पशुचारे और पेयजल से अलग स्थान पर संग्रहित करें।
- दवा का उपयोग केवल लेबल और सरकारी निर्देशों के अनुसार निर्धारित मात्रा में ही करें।
- प्रतिबंधित सल्फास टैबलेट का उपयोग किसी भी स्थिति में न करें।
- फ्यूमिगेशन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद गोदाम को पर्याप्त समय तक खुला छोड़ें, ताकि विषैली गैस पूरी तरह बाहर निकल सके।
- खाली पाउच और रासायनिक अवशेषों का निपटान स्थानीय नियमों और उत्पाद दिशा-निर्देशों के अनुसार ही करें।
इन लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
विशेषज्ञों के अनुसार, फॉस्फीन गैस के संपर्क में आने वाले व्यक्ति में सिरदर्द, आंखों में जलन, चक्कर आना, उल्टी, बेचैनी, सांस लेने में कठिनाई, सीने में दर्द और अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी व्यक्ति में ऐसे लक्षण दिखाई दें तो घरेलू उपचार के भरोसे न रहें और तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल में चिकित्सकीय सहायता प्राप्त करें।
जैविक विकल्प अपनाने पर दिया जोर
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने कहा कि जहां तक संभव हो, रासायनिक कीटनाशकों के स्थान पर सुरक्षित और जैविक विकल्पों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने किसानों को भंडारण के दौरान नीम की पत्तियों, नीम तेल और अन्य पारंपरिक उपायों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया।
उन्होंने कहा कि सुरक्षित खेती और सुरक्षित भंडारण केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामूहिक दायित्व है। जनजागरूकता, वैज्ञानिक जानकारी और सुरक्षा मानकों का पालन करके ही ऐसी दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है।
कलेक्टर ने जिलेवासियों से अपील करते हुए कहा कि यदि कहीं भी सल्फास का असुरक्षित उपयोग होता दिखाई दे या कोई व्यक्ति बिना सुरक्षा उपायों के इसका इस्तेमाल कर रहा हो, तो तत्काल संबंधित कृषि अधिकारी या प्रशासन को सूचना दें।
उन्होंने कहा, “सावधानी और जागरूकता ही सल्फास से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय है।”
