ई-एचआरएमएस में ई-अटेंडेंस समाप्त करने, अतिरिक्त वेतन ग्रेड और क्षेत्र भत्ता बढ़ाने समेत प्रमुख मांगों को लेकर मप्र कृषि विस्तार अधिकारी संघ जिला दमोह ने कृषि मंत्री को सौंपा ज्ञापन
दमोह। मध्यप्रदेश कृषि विभाग में कार्यरत कृषि विस्तार अधिकारियों की विभिन्न मांगों को लेकर असंतोष अब आंदोलन की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। मप्र कृषि विस्तार अधिकारी संघ, जिला शाखा दमोह ने किसान कल्याण तथा कृषि विकास मंत्री के नाम उपसंचालक कृषि के माध्यम से ज्ञापन भेजकर अपनी प्रमुख मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की मांग की है। संघ ने चेतावनी दी है कि मांगों का निराकरण नहीं होने की स्थिति में 11 अगस्त 2026 से प्रदेश के समस्त कृषि विस्तार अधिकारी अनिश्चितकालीन क्रमबद्ध कार्य बहिष्कार पर जाने को मजबूर होंगे।
ज्ञापन में संघ ने कहा है कि कृषि विस्तार अधिकारी ग्रामीण क्षेत्रों में शासन की कृषि योजनाओं और किसान हितैषी कार्यक्रमों को धरातल तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कृषि विस्तार अधिकारी सीधे किसानों के बीच रहकर कृषि तकनीकों का प्रचार-प्रसार, शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन तथा किसानों की समस्याओं के निराकरण का कार्य करते हैं। संघ के अनुसार वर्तमान परिस्थितियों में कृषि विस्तार अधिकारियों को अपने दायित्वों के निर्वहन के दौरान विभिन्न कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
ई-एचआरएमएस में ई-अटेंडेंस समाप्त करने की मांग
संघ की प्रमुख मांगों में ई-एचआरएमएस प्रणाली में ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता समाप्त करना शामिल है। ज्ञापन में कहा गया है कि कृषि विस्तार अधिकारियों का कार्य मुख्य रूप से मैदानी एवं भ्रमण आधारित है। अधिकारी किसानों के खेतों, गांवों तथा विभिन्न शासकीय गतिविधियों में विभागीय कार्यों के लिए लगातार भ्रमण करते हैं।
संघ का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में ई-एचआरएमएस के माध्यम से ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता व्यावहारिक कठिनाइयां उत्पन्न करती है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क और तकनीकी सुविधाओं की उपलब्धता भी एक समस्या है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि महिला कृषि विस्तार अधिकारियों के लिए सुरक्षा संबंधी परिस्थितियों को देखते हुए ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता समाप्त की जानी चाहिए।
संघ ने मांग की है कि पूर्व में प्रचलित कार्यप्रणाली के अनुसार उपस्थिति व्यवस्था लागू रखी जाए और जब तक कृषि विस्तार अधिकारियों को ई-एचआरएमएस प्रणाली के माध्यम से ई-अटेंडेंस से मुक्त नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रखा जाएगा।
2400 रुपये अतिरिक्त वेतन ग्रेड देने की मांग
ज्ञापन में कृषि विस्तार अधिकारी संवर्ग को 2400 रुपये का अतिरिक्त वेतन ग्रेड प्रदान किए जाने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई है। संघ का कहना है कि कृषि विस्तार अधिकारियों के कार्य की प्रकृति, तकनीकी योग्यता, मैदानी दायित्व और किसानों के साथ प्रत्यक्ष रूप से किए जाने वाले कार्यों को देखते हुए उन्हें अतिरिक्त वेतन ग्रेड का लाभ दिया जाना उचित है।
संघ ने शासन से इस संबंध में आवश्यक आदेश शीघ्र जारी करने की मांग की है।
अतिरिक्त क्षेत्र भत्ता 500 से बढ़ाकर 5000 रुपये करने की मांग
कृषि विस्तार अधिकारियों द्वारा अतिरिक्त क्षेत्रों का दायित्व संभालने के बावजूद उन्हें मिलने वाले अतिरिक्त क्षेत्र भत्ते को लेकर भी संघ ने नाराजगी जताई है। ज्ञापन के अनुसार वर्तमान में अतिरिक्त क्षेत्र का दायित्व संभालने वाले अधिकारियों को 500 रुपये प्रतिमाह अतिरिक्त केंद्र भत्ता दिया जा रहा है।
संघ ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों, बढ़ते कार्यभार और अतिरिक्त जिम्मेदारियों की तुलना में यह राशि बेहद कम है। इसलिए अतिरिक्त क्षेत्र भत्ते को 500 रुपये से बढ़ाकर 5000 रुपये प्रतिमाह किया जाना चाहिए।
3 अगस्त से आंदोलन, 11 अगस्त से कार्य बहिष्कार की चेतावनी
ज्ञापन में संघ ने उल्लेख किया है कि अपनी मांगों को लेकर उनका चरणबद्ध आंदोलन 3 अगस्त 2026 से लगातार जारी है। संघ का कहना है कि अभी तक विभाग एवं शासन स्तर से मांगों के संबंध में कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया है।
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि 11 अगस्त 2026 तक उनकी मांगों का निराकरण नहीं किया गया तो प्रदेश के सभी कृषि विस्तार अधिकारी अनिश्चितकालीन क्रमबद्ध कार्य बहिष्कार पर जाने को मजबूर होंगे। इससे कृषि विभाग से जुड़े मैदानी कार्यों और किसानों तक योजनाओं की पहुंच पर असर पड़ने की संभावना है।
ज्ञापन के अंत में संघ ने किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री से मामले में हस्तक्षेप करते हुए कृषि विस्तार अधिकारियों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने और आवश्यक आदेश जारी करने का अनुरोध किया है। ज्ञापन मप्र कृषि विस्तार अधिकारी संघ जिला दमोह की ओर से सौंपा गया है।
फिलहाल निगाहें शासन के रुख पर हैं। यदि मांगों पर समय रहते निर्णय नहीं हुआ तो 11 अगस्त से कृषि विस्तार अधिकारियों का कार्य बहिष्कार प्रदेश में कृषि विभाग के मैदानी कामकाज को प्रभावित कर सकता है।
