अंतिम दिन यात्रियों को वितरित किया गया गर्मागर्म सूजी का हलुआ प्रसाद, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुभाष सोलंकी ने की सेवा
दमोह, 15 जून। पुरुषोत्तम माह के पावन अवसर पर मध्य प्रदेश के दमोह रेलवे स्टेशन पर सेवा, श्रद्धा और समर्पण की अनूठी मिसाल देखने को मिली। गायत्री शक्तिपीठ दमोह द्वारा पूरे एक माह तक चलाए गए निःशुल्क शीतल जल वितरण अभियान का सोमवार को विधिवत समापन हुआ। अभियान के अंतिम दिन रेल यात्रियों को आरओ का शुद्ध एवं शीतल जल उपलब्ध कराने के साथ-साथ गर्मागर्म सूजी का हलुआ प्रसाद भी कागज के दोने और लकड़ी की चम्मच के साथ श्रद्धापूर्वक वितरित किया गया।भीषण गर्मी और उमस के बीच लगातार 30 दिनों तक चले इस सेवा अभियान ने हजारों रेल यात्रियों को राहत पहुंचाई। सेवा कार्य में गायत्री परिवार के सदस्यों के साथ समाजसेवियों, अधिवक्ताओं, पत्रकारों और आम नागरिकों ने भी बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई।
पुरुषोत्तम माह में सेवा का विशेष महत्व

सनातन परंपरा में पुरुषोत्तम माह को दान, पुण्य, सेवा और आध्यात्मिक साधना का विशेष काल माना जाता है। इसी भावना को आत्मसात करते हुए गायत्री शक्तिपीठ दमोह ने रेलवे स्टेशन पर आने-जाने वाले यात्रियों के लिए निःशुल्क जलसेवा का संकल्प लिया।एक माह तक प्रतिदिन स्टेशन पर पहुंचकर सेवादारों ने यात्रियों को आरओ का शुद्ध एवं शीतल जल उपलब्ध कराया। गर्मी के मौसम में यह पहल यात्रियों के लिए बड़ी राहत साबित हुई। लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों ने इस सेवा को राहत और संवेदनशीलता का प्रतीक बताया।
समापन दिवस पर हलुआ प्रसाद का वितरण
पुरुषोत्तम माह के समापन और जलसेवा अभियान के अंतिम दिन गायत्री परिवार की महिला सदस्यों ने विशेष उत्साह और श्रद्धा के साथ स्वयं हाथठेलों पर प्रसाद रखकर रेल यात्रियों के बीच सूजी के हलुए का वितरण किया।कागज के दोने और लकड़ी की चम्मच के साथ वितरित किए गए प्रसाद को यात्रियों ने श्रद्धापूर्वक ग्रहण किया। गोंडवाना एक्सप्रेस और हीराकुंड एक्सप्रेस सहित विभिन्न ट्रेनों के यात्रियों ने गायत्री परिवार के इस सेवा कार्य की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे अभियान समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं।

सेवा कार्य में शामिल हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुभाष सोलंकी
अभियान के अंतिम दिन जिले के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुभाष सोलंकी भी दमोह रेलवे स्टेशन पहुंचे और सेवादारों के साथ मिलकर यात्रियों को शीतल जल एवं प्रसाद वितरित किया।उन्होंने गायत्री परिवार के इस सेवा अभियान की सराहना करते हुए कहा कि भीषण गर्मी में प्यासे यात्रियों को शीतल जल उपलब्ध कराना मानवता की सबसे बड़ी सेवाओं में से एक है।
जल संरक्षण का दिया संदेश
अपने संबोधन में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुभाष सोलंकी ने कहा कि वर्तमान समय में जल संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। प्रत्येक व्यक्ति को जल की एक-एक बूंद बचाने का संकल्प लेना चाहिए।उन्होंने कहा कि केवल मनुष्यों के लिए ही नहीं, बल्कि पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं के लिए भी पानी की व्यवस्था करना हमारी सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी है। जल बचाने और प्यासों तक पानी पहुंचाने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को आगे आना चाहिए।उन्होंने गायत्री शक्तिपीठ दमोह द्वारा चलाए गए इस अभियान को अनुकरणीय बताते हुए कहा कि ऐसे सेवा कार्य समाज में सकारात्मक ऊर्जा और संवेदनशीलता का संचार करते हैं।
समाज के विभिन्न वर्गों ने निभाई सक्रिय भूमिका
इस सेवा अभियान में शहर के वरिष्ठ अधिवक्ताओं, समाजसेवियों, पत्रकारों और गणमान्य नागरिकों ने सक्रिय सहभागिता निभाई।वरिष्ठ अधिवक्ता भगवती श्रीवास्तव, चंद्रमोहन गुरु, ओ.पी. श्रीवास्तव, अधिवक्ता संघ के उपाध्यक्ष सुरेश खत्री, राकेश रायजादा सहित अनेक अधिवक्तागण पूरे उत्साह के साथ सेवा कार्य में जुटे रहे।इसके अलावा गायत्री परिवार के सैकड़ों पीत वस्त्रधारी परिजनों ने प्रतिदिन स्टेशन पहुंचकर यात्रियों को जल वितरण किया और सेवा कार्य को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सेवादारों के लिए समाजसेवियों ने की विशेष व्यवस्था
जलसेवा अभियान में लगे सेवादारों की सुविधा के लिए अनेक समाजसेवियों ने चाय, नाश्ता और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराईं।सेवादारों ने बताया कि समाज के विभिन्न वर्गों के सहयोग और सामूहिक प्रयासों के कारण ही इस अभियान को सफलतापूर्वक संचालित किया जा सका।
गोंडवाना और हीराकुंड एक्सप्रेस के साथ संपन्न हुआ अभियान
सोमवार को गोंडवाना एक्सप्रेस और हीराकुंड एक्सप्रेस के यात्रियों को जल एवं प्रसाद वितरित करने के साथ ही एक माह तक चला यह सेवा अभियान संपन्न हुआ।गायत्री परिवार के सदस्यों ने बताया कि भविष्य में भी विभिन्न सामाजिक और जनसेवा गतिविधियों के माध्यम से जरूरतमंद लोगों की सहायता का यह क्रम निरंतर जारी रहेगा।
मानव सेवा का दिया प्रेरक संदेश
गायत्री शक्तिपीठ दमोह द्वारा चलाया गया यह अभियान केवल जल वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने समाज को सेवा, सहयोग और संवेदनशीलता का संदेश भी दिया।एक माह तक निरंतर चलाए गए इस अभियान ने यह सिद्ध कर दिया कि जब समाज के विभिन्न वर्ग एकजुट होकर सेवा का संकल्प लेते हैं, तो छोटी-छोटी पहल भी बड़े सामाजिक बदलाव का माध्यम बन जाती हैं। पुरुषोत्तम माह के समापन पर दमोह रेलवे स्टेशन से दिया गया यह संदेश दूर तक जाएगा कि मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारी केवल शब्दों से नहीं, बल्कि सेवा और समर्पण से पूरी होती है।
