जियोमैकेनिक्स में फील्ड मॉनिटरिंग की अत्याधुनिक तकनीकों पर होगा वैश्विक मंथन, 120 से अधिक शोध-पत्र और छह अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान सम्मेलन की खासियत
इंदौर | 6 अगस्त 2026/ देश के प्रमुख तकनीकी और शैक्षणिक संस्थानों में शामिल आईआईटी इंदौर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय का केंद्र बनने जा रहा है। भू-तकनीकी और भू-पर्यावरणीय अभियांत्रिकी के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम शोध, आधुनिक फील्ड मॉनिटरिंग तकनीकों, सेंसर आधारित निगरानी प्रणाली और डाटा विश्लेषण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श के लिए पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ 6 अगस्त से इंदौर में होगा।
भारतीय भू-तकनीकी सोसायटी (आईजीएस) के इंदौर चैप्टर और आईआईटी इंदौर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होने वाला “इंटरनेशनल सिम्पोजियम ऑन फील्ड मॉनिटरिंग इन जियोमैकेनिक्स” 6 से 10 अगस्त तक रेडिसन ब्लू होटल में आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन में दुनिया के 32 देशों से आए 314 प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे, जिनमें अंतरराष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिक, शोधकर्ता, प्रोफेसर, इंजीनियर, उद्योग विशेषज्ञ और शोधार्थी शामिल होंगे।
इस वर्ष सम्मेलन की थीम “एडवांसेस इन फील्ड मॉनिटरिंग फॉर जियोमैकेनिक्स” रखी गई है। इसका उद्देश्य भू-तकनीकी इंजीनियरिंग में उपयोग होने वाली आधुनिक मॉनिटरिंग प्रणालियों, डिजिटल तकनीकों, सेंसर नेटवर्क, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित डाटा विश्लेषण और उन्नत फील्ड इंस्ट्रूमेंटेशन के क्षेत्र में हो रहे वैश्विक शोध और अनुभवों को साझा करना है।
सुरक्षित और टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर पर रहेगा विशेष फोकस
विशेषज्ञों का मानना है कि आज के समय में बड़े पुल, सुरंग, मेट्रो परियोजनाएं, ऊंची इमारतें, बांध, राजमार्ग और अन्य आधारभूत संरचनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अत्याधुनिक मॉनिटरिंग तकनीकों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। सम्मेलन में इन्हीं विषयों पर व्यापक चर्चा होगी कि किस प्रकार आधुनिक उपकरणों और रियल टाइम डाटा विश्लेषण के माध्यम से संभावित जोखिमों का पहले से आकलन कर संरचनाओं को अधिक सुरक्षित और टिकाऊ बनाया जा सकता है।
विश्व के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ साझा करेंगे अनुभव
सम्मेलन के दौरान भू-तकनीकी और इंजीनियरिंग जियोलॉजी के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विशेषज्ञ के सम्मान में प्रतिष्ठित द्वितीय डनिक्लिफ व्याख्यान आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा विश्व के विभिन्न देशों से आए छह ख्यातिप्राप्त विशेषज्ञ मुख्य व्याख्यान देंगे। इन व्याख्यानों में आधुनिक शोध, नई तकनीकों, स्मार्ट मॉनिटरिंग सिस्टम, चुनौतीपूर्ण इंजीनियरिंग परियोजनाओं और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला जाएगा।
इन व्याख्यानों के माध्यम से प्रतिभागियों को वैश्विक स्तर पर विकसित हो रही तकनीकों और उनके व्यावहारिक उपयोग की जानकारी मिलेगी, जिससे भारतीय शोधकर्ताओं और इंजीनियरों को भी नई दिशा प्राप्त होगी।
10 तकनीकी सत्रों में होंगे 120 से अधिक शोध-पत्र
पांच दिवसीय सम्मेलन के दौरान 10 विशिष्ट तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें 120 से अधिक समीक्षित शोध-पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। इन शोध-पत्रों में भू-तकनीकी अभियांत्रिकी, भू-पर्यावरण संरक्षण, ढांचागत परियोजनाओं की सुरक्षा, भूस्खलन अध्ययन, सेंसर तकनीक, डाटा विश्लेषण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित मॉनिटरिंग, रिमोट सेंसिंग तथा उभरती निगरानी प्रणालियों जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल होंगे।
इन शोध-पत्रों के माध्यम से शोधकर्ता अपने नवीन अनुसंधान, प्रयोगों और तकनीकी नवाचारों को अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के सामने प्रस्तुत करेंगे तथा उनके सुझाव प्राप्त करेंगे।
चार विशेष कार्यशालाओं में मिलेगा व्यावहारिक प्रशिक्षण
सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण चार विशेष तकनीकी कार्यशालाएं भी होंगी। इनमें आधुनिक फील्ड इंस्ट्रूमेंटेशन, स्मार्ट सेंसर टेक्नोलॉजी, एडवांस मॉनिटरिंग सिस्टम, डाटा इंटरप्रिटेशन तथा उन्नत विश्लेषण तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इन कार्यशालाओं में युवा इंजीनियरों, शोधार्थियों और तकनीकी विशेषज्ञों को आधुनिक उपकरणों के उपयोग और वास्तविक परियोजनाओं में उनकी उपयोगिता के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी।
उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच बनेगा समन्वय
सम्मेलन में देश-विदेश के शिक्षण संस्थानों के साथ-साथ उद्योग जगत के विशेषज्ञ भी भाग लेंगे। इससे शोध और उद्योग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा तथा नई तकनीकों को व्यावहारिक परियोजनाओं में लागू करने के लिए साझा रणनीति पर चर्चा की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भारत में आधुनिक इंजीनियरिंग अनुसंधान को नई दिशा देने के साथ-साथ वैश्विक सहयोग को भी मजबूत करेंगे।
सांस्कृतिक संध्या में दिखेगी भारतीय संस्कृति की झलक
तकनीकी चर्चाओं के साथ-साथ सम्मेलन में भारतीय संस्कृति का भी विशेष रंग देखने को मिलेगा। 7 अगस्त को देश-विदेश से आए प्रतिनिधियों के लिए भारतीय शास्त्रीय संगीत, लोकनृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों पर आधारित विशेष सांस्कृतिक संध्या आयोजित की जाएगी। इसका उद्देश्य विदेशी प्रतिनिधियों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना और उन्हें भारतीय परंपराओं का अनुभव कराना है।
इंदौर को मिलेगा वैश्विक पहचान का अवसर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के आयोजन से इंदौर को वैज्ञानिक और तकनीकी शोध के क्षेत्र में वैश्विक पहचान मिलेगी। साथ ही आईआईटी इंदौर और भारतीय भू-तकनीकी सोसायटी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध एवं नवाचार के नए अवसर प्राप्त होंगे। सम्मेलन में होने वाले विचार-विमर्श और शोध निष्कर्ष भविष्य की आधारभूत संरचनाओं को अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
