उमरिया | 16 अप्रैल 2026 मध्यप्रदेश के विश्वप्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व में बाघों की लगातार हो रही मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक बार फिर संदिग्ध परिस्थितियों में एक बाघ शावक की मौत हो गई है, जिससे वन्यजीव संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
📍 पनपथा कोर क्षेत्र में मिला मृत शावक
प्राप्त जानकारी के अनुसार 15 अप्रैल 2026 को टाइगर रिज़र्व के पनपथा कोर क्षेत्र की बघडो बीट में एक बाघ शावक (लिंग अज्ञात) मृत अवस्था में पाया गया। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग हरकत में आया और NTCA प्रोटोकॉल के तहत तत्काल कार्रवाई शुरू की गई।
🔍 जांच के नाम पर औपचारिकताएं पूरी

क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय के अनुसार वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में डॉग स्क्वॉड, मेटल डिटेक्टर और कैंप हाथियों की मदद से क्षेत्र की सघन सर्चिंग कराई गई। इसके बाद वन्यप्राणी स्वास्थ्य अधिकारी और मानपुर के पशु चिकित्सा अधिकारी की टीम द्वारा शावक का पोस्टमार्टम किया गया।
पोस्टमार्टम के बाद अधिकारियों, NTCA प्रतिनिधि और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में शावक का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
⚠️ फिर वही “आपसी संघर्ष” की थ्योरी
वन विभाग ने प्रारंभिक जांच में शावक की मौत का कारण “आपसी संघर्ष” बताया है। हालांकि यह कोई पहली बार नहीं है—हर बार बाघों की मौत के बाद यही कारण सामने रखा जाता रहा है।

❗ उठते सवाल, जवाब नदारद लगातार एक ही कारण बताए जाने से अब कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं— आखिर यह “आपसी संघर्ष” किससे हुआ?
क्या दूसरे बाघ या वन्यजीव को चोट नहीं आई?
यदि चोट आई, तो उसकी तलाश और उपचार क्यों नहीं किया गया? क्या हर मामले में एक ही वजह बताकर जांच को सीमित कर दिया जाता है?
स्थानीय लोगों और वन्यजीव प्रेमियों का मानना है कि इन घटनाओं की निष्पक्ष और गहन जांच आवश्यक है, ताकि वास्तविक कारण सामने आ सके।
📉 बढ़ती मौतें, संरक्षण पर खतरा
बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व देश के प्रमुख टाइगर रिज़र्व में शामिल है, जहां बाघों की घनी आबादी पाई जाती है। ऐसे में बार-बार हो रही मौतें न केवल वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही हैं, बल्कि टाइगर संरक्षण की प्रभावशीलता पर भी चिंता बढ़ा रही हैं।
🔎 जारी है सर्च ऑपरेशन
वन विभाग द्वारा क्षेत्र में लगातार सर्चिंग कराई जा रही है और मामले की जांच जारी है। लेकिन जब तक पारदर्शिता और ठोस कार्रवाई नहीं दिखेगी, तब तक “आपसी संघर्ष” का यह दावा लोगों के गले नहीं उतर पाएगा।
