श्रवण एवं वाक बाधित नागरिकों को मिली कानूनी अधिकारों, सरकारी योजनाओं और निःशुल्क सहायता की जानकारी, दस्तावेज़ीकरण एवं योजनाओं से जोड़ने की पहल भी शुरू

दमोह, 13 जून 2026/समाज के कमजोर, वंचित और विशेष आवश्यकता वाले वर्गों को न्याय एवं अधिकारों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के मार्गदर्शन में “अनुगूंज” विशेष ऑनलाइन विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम विशेष रूप से श्रवण एवं वाक बाधित दिव्यांगजनों को उनके संवैधानिक अधिकारों, शासकीय योजनाओं तथा निःशुल्क विधिक सहायता संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का ऑनलाइन शुभारंभ मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधिपति एवं मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक विवेक रूसिया ने किया। इस अवसर पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश विशाल मिश्रा, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सदस्य सचिव सुमन श्रीवास्तव, निशक्तजन कल्याण आयुक्त अजय खेमरिया, वरिष्ठ मध्यस्थता प्रशिक्षक अनुजा सक्सेना सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में प्रदेश के सभी जिलों की सहभागिता सुनिश्चित की गई, जिससे बड़ी संख्या में दिव्यांगजन ऑनलाइन माध्यम से जुड़े। दमोह जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष सुभाष सोलंकी, विशेष न्यायाधीश उदय सिंह मरावी, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी स्नेहा सिंह, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रवीण फूलपगारे, महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी अनिल जैन, जिला दिव्यांग एवं पुनर्वास केंद्र की प्रशासनिक अधिकारी संगीता मिश्रा, जिला विधिक सहायता अधिकारी रजनीश चौरसिया सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, पैरालीगल वालंटियर्स तथा बड़ी संख्या में श्रवण एवं वाक बाधित हितग्राही उपस्थित रहे।
दिव्यांग अधिकार अधिनियम और योजनाओं की दी विस्तृत जानकारी
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016 के तहत मिलने वाले अधिकारों और सुविधाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। प्रतिभागियों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, स्वरोजगार, सामाजिक सुरक्षा, पेंशन, छात्रवृत्ति, कौशल विकास और पुनर्वास योजनाओं की जानकारी दी गई। साथ ही बताया गया कि दिव्यांगजन अपने अधिकारों के संरक्षण और किसी भी प्रकार के भेदभाव की स्थिति में विधिक सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
वक्ताओं ने कहा कि दिव्यांग नागरिकों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व भी है। शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ तभी प्रभावी रूप से पहुंच सकेगा जब पात्र हितग्राहियों को समय पर जानकारी और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध होंगे।
निःशुल्क विधिक सहायता और मीडिएशन की जानकारी
कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली निःशुल्क विधिक सहायता, कानूनी सलाह और वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली (मीडिएशन) के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों को बताया गया कि आर्थिक या सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों को न्यायालयीन प्रक्रिया में सहायता प्रदान करने के लिए विधिक सेवा प्राधिकरण सदैव तत्पर रहता है।
दस्तावेज तैयार कर योजनाओं से जोड़ने की पहल
कार्यक्रम की विशेष उपलब्धि यह रही कि उपस्थित हितग्राहियों के यूडीआईडी कार्ड, आधार कार्ड, पेंशन एवं अन्य शासकीय योजनाओं से संबंधित आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी संकलित की गई। संबंधित मामलों को विभागीय स्तर पर आगे बढ़ाकर पात्र व्यक्तियों को योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी।
संकेत भाषा के माध्यम से हुआ संवाद
कार्यक्रम के दौरान दिव्यांग प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान संकेत भाषा के माध्यम से किया गया। इससे प्रतिभागियों को अपनी समस्याएं और प्रश्न सहजता से रखने का अवसर मिला। उपस्थित लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे दिव्यांगजनों के लिए उपयोगी और प्रेरणादायक बताया।
अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुंचाने का संकल्प
कार्यक्रम में यह संदेश प्रमुखता से दिया गया कि विधिक सेवा प्राधिकरण समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक न्याय और अधिकार पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। दिव्यांगजनों को सम्मान, अवसर और न्याय दिलाने के लिए ऐसे जागरूकता कार्यक्रम भविष्य में भी निरंतर आयोजित किए जाते रहेंगे।
