बाल श्रम और बाल विवाह मुक्त भारत के निर्माण का लिया संकल्प, विशेषज्ञों ने बताए कानून, अधिकार और सामाजिक जिम्मेदारियां
दमोह /विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर दमोह जिला कलेक्टर कार्यालय स्थित जनसुनवाई कक्ष में श्रम विभाग एवं संकल्प समाजसेवी संस्था के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बाल श्रम एवं बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध जनजागरूकता बढ़ाना, संबंधित कानूनों की जानकारी देना तथा समाज को इन बुराइयों के उन्मूलन के लिए सक्रिय भागीदारी हेतु प्रेरित करना रहा।
कार्यशाला में जिले के विभिन्न विभागों के अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि, छात्र-छात्राएं तथा नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत बाल अधिकारों और बच्चों के सुरक्षित भविष्य के विषय पर परिचर्चा के साथ हुई, जिसमें वक्ताओं ने कहा कि किसी भी राष्ट्र का भविष्य उसके बच्चों पर निर्भर करता है और यदि बच्चे शिक्षा के स्थान पर श्रम करने के लिए मजबूर होंगे तो देश के विकास की गति प्रभावित होगी।
बाल श्रम बच्चों के अधिकारों का हनन
कार्यक्रम में उपस्थित विषय विशेषज्ञों ने बताया कि बाल श्रम केवल आर्थिक शोषण का विषय नहीं है, बल्कि यह बच्चों के शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अधिकारों का भी गंभीर उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि आज भी अनेक बच्चे गरीबी, अशिक्षा और सामाजिक परिस्थितियों के कारण होटलों, ढाबों, कारखानों, दुकानों, निर्माण कार्यों तथा घरेलू कामों में लगे हुए हैं, जिससे उनका बचपन प्रभावित हो रहा है।
विशेषज्ञों ने विस्तार से बताया कि बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम के तहत 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से किसी भी व्यवसाय या प्रतिष्ठान में कार्य कराना प्रतिबंधित है। वहीं 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग के किशोरों को खतरनाक उद्योगों और जोखिमपूर्ण कार्यों में नियोजित नहीं किया जा सकता। कानून का उल्लंघन करने वाले नियोक्ताओं के विरुद्ध कठोर दंडात्मक प्रावधान हैं।
बाल श्रम की पहचान और रेस्क्यू पर विशेष चर्चा
कार्यशाला में इस बात पर भी विशेष चर्चा की गई कि आम नागरिक किस प्रकार बाल श्रम की पहचान कर सकते हैं और ऐसे मामलों की सूचना संबंधित विभागों तक पहुंचा सकते हैं। वक्ताओं ने कहा कि यदि किसी दुकान, होटल, फैक्ट्री, वाहन मरम्मत केंद्र, ईंट भट्टे या अन्य स्थान पर बालक या बालिका कार्य करते हुए दिखाई दें तो इसकी जानकारी तत्काल श्रम विभाग, पुलिस, चाइल्ड हेल्पलाइन अथवा जिला प्रशासन को दी जानी चाहिए।
विशेषज्ञों ने बताया कि रेस्क्यू के बाद बच्चों को केवल कार्यस्थल से मुक्त कराना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उनका पुनर्वास, शिक्षा से जोड़ना तथा परिवार को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाना भी उतना ही आवश्यक है। इसी उद्देश्य से शासन विभिन्न योजनाओं का संचालन कर रहा है।
बाल विवाह सामाजिक विकास में बड़ी बाधा
कार्यक्रम में बाल विवाह के विषय पर भी गंभीर चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि बाल विवाह न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह बालिकाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य को भी प्रभावित करता है। कम उम्र में विवाह होने से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर बढ़ने की संभावना रहती है तथा बालिकाओं को शिक्षा और आत्मनिर्भरता के अवसरों से वंचित होना पड़ता है।
विशेषज्ञों ने बताया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत बाल विवाह कराना, उसमें सहयोग करना या उसका आयोजन करना दंडनीय अपराध है। समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि ऐसी घटनाओं की सूचना प्रशासन को दें और बाल विवाह रोकने में सहयोग करें।
सरकारी योजनाओं की दी जानकारी
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने बच्चों और उनके परिवारों के लिए संचालित योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य, छात्रवृत्ति, सामाजिक सुरक्षा एवं स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं के माध्यम से बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। गरीबी और संसाधनों की कमी के कारण बाल श्रम की ओर बढ़ने वाले परिवारों को भी सरकारी योजनाओं से लाभान्वित कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है।
संकल्प संस्था ने साझा किए अनुभव
कार्यक्रम के आयोजक एवं संकल्प समाजसेवी संस्था के प्रतिनिधि देवेंद्र दुबे ने संस्था द्वारा जिले में किए जा रहे सामाजिक कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्था लंबे समय से बाल अधिकार संरक्षण, शिक्षा प्रोत्साहन, बाल श्रम उन्मूलन और बाल विवाह रोकथाम के क्षेत्र में कार्य कर रही है। संस्था द्वारा गांवों और शहरी क्षेत्रों में नियमित रूप से जागरूकता अभियान, संवाद कार्यक्रम और जनसंपर्क गतिविधियां आयोजित की जाती हैं।
उन्होंने कहा कि बाल श्रम और बाल विवाह जैसी समस्याओं का समाधान केवल कानून से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज की सोच में बदलाव और सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है।
अधिकारियों और विशेषज्ञों ने रखे विचार
कार्यक्रम में बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष दीपक तिवारी, महिला एवं बाल विकास विभाग के सहायक संचालक संजीव मिश्रा, श्रम विभाग की अधिकारी सुश्री आशा, विभिन्न विषय विशेषज्ञों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। सभी वक्ताओं ने बच्चों के अधिकारों की रक्षा, शिक्षा के महत्व और सामाजिक जागरूकता की आवश्यकता पर बल दिया।
वक्ताओं ने कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक अपने आसपास होने वाली बाल श्रम और बाल विवाह की घटनाओं के प्रति सजग हो जाए तो इन कुरीतियों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। इसके लिए प्रशासन, सामाजिक संस्थाओं और आम नागरिकों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
बाल श्रम मुक्त एवं बाल विवाह मुक्त दमोह बनाने की ली शपथ
कार्यक्रम के समापन अवसर पर उपस्थित सभी अधिकारियों, कर्मचारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं नागरिकों ने बाल श्रम और बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ संघर्ष जारी रखने तथा दमोह जिले को बाल श्रम मुक्त एवं बाल विवाह मुक्त बनाने का सामूहिक संकल्प लिया। सभी ने शपथ लेते हुए बच्चों के अधिकारों की रक्षा और उन्हें सुरक्षित, शिक्षित एवं सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने के लिए हर संभव सहयोग देने का वचन दिया।
कार्यक्रम का सफल संचालन समाजसेवी खुशबू तिवारी द्वारा किया गया। अंत में उपस्थित सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का समापन किया गया।
