हटा से पटेरा, हिंडोरिया और समन्ना होते हुए दमोह पहुंची रथ यात्रा, जगह-जगह भव्य स्वागत, रामानंदाचार्य के संदेश से जातिगत भेदभाव मिटाने का आह्वान, मंच पर भारी भीड़ के बीच सुरक्षा व्यवस्थाओं की खुली पोल
डॉ. एल.एन. वैष्णव
दमोह, मंगलवार 13 अक्टूबर 2026/बुंदेलखंड की धरती पर सनातन हिंदू एकता का संदेश लेकर निकले बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की रथ यात्रा मंगलवार को दमोह जिला मुख्यालय पहुंची। यात्रा के स्वागत में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। जगह-जगह स्वागत और धार्मिक जयघोष के बीच पॉलिटेक्निक कॉलेज मैदान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित हुए। पंडित शास्त्री ने विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए सप्त संकल्पों के माध्यम से सनातन समाज को संगठित करने, सामाजिक समरसता स्थापित करने और जातिगत भेदभाव समाप्त करने का संदेश दिया।धर्मसभा में जहां एक ओर श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह दिखाई दिया, वहीं दूसरी ओर भारी भीड़ के कारण मंच और आयोजन स्थल पर कई बार अव्यवस्था की स्थिति भी निर्मित हुई। पंडित शास्त्री के निकट पहुंचने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने की होड़ में पुलिस तथा सुरक्षा कर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। कई बार भीड़ को नियंत्रित करने के प्रयास अपेक्षित रूप से सफल होते दिखाई नहीं दिए।
12 अक्टूबर को जिले में प्रवेश, हटा में रात्रि विश्राम और दिव्य दरबार
सनातन हिंदू एकता रथ यात्रा 12 अक्टूबर को दमोह जिले की सीमा में प्रवेश कर गई थी। हटा नगर में यात्रा का स्वागत किया गया। यहां रात्रि विश्राम के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने पहुंचे।हटा में आयोजित कार्यक्रम में पंडित शास्त्री ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया और सनातन हिंदू एकता यात्रा के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। इस दौरान दिव्य दरबार का भी आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।मंगलवार 13 अक्टूबर की सुबह रथ यात्रा हटा से रवाना हुई और पटेरा, हिंडोरिया तथा समन्ना होते हुए दमोह जिला मुख्यालय पहुंची। यात्रा मार्ग पर अनेक स्थानों पर श्रद्धालु स्वागत के लिए उपस्थित रहे। धार्मिक जयघोष और स्वागत के बीच रथ यात्रा पॉलिटेक्निक कॉलेज के विशाल मैदान में पहुंची, जहां पहले से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।
सप्त संकल्पों के माध्यम से समाज को संगठित करने का आह्वान
पॉलिटेक्निक कॉलेज मैदान में आयोजित विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि सनातन हिंदू एकता रथ यात्रा केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को जागरूक और संगठित करने के उद्देश्य से निकाली जा रही है।उन्होंने यात्रा के सप्त संकल्पों का उल्लेख करते हुए बिंदुवार उनके उद्देश्यों की जानकारी दी। पंडित शास्त्री ने अपने संबोधन में सनातन समाज के भीतर एकता, आपसी सहयोग और सामाजिक समरसता की आवश्यकता पर जोर दिया।उन्होंने कहा कि समाज में जातिगत भेदभाव और आपसी दूरियां समाप्त हों, तभी एकता का उद्देश्य सार्थक हो सकेगा। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से सामाजिक एकता के संदेश को अपने जीवन और व्यवहार में अपनाने का आह्वान किया।
रामानंदाचार्य के संदेश से जातिगत भेदभाव समाप्त करने की बात

पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने संबोधन में भगवान रामानंदाचार्य के विचारों का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लगभग 1400 वर्ष पूर्व रामानंदाचार्य ने समाज को जातिगत भेदभाव से ऊपर उठने का संदेश दिया था।
उन्होंने प्रसिद्ध पंक्तियां दोहराईं—
“जात-पात पूछे नहीं कोई, हरि को भजे सो हरि का होई।”
इस संदेश का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान की भक्ति और समाज की एकता के बीच जाति-पाति की दीवारें नहीं होनी चाहिए।धर्मसभा में उन्होंने सामाजिक समरसता को सनातन हिंदू एकता के लिए आवश्यक बताया। उनका कहना था कि जब समाज के लोग जातिगत भेदभाव से ऊपर उठकर एक-दूसरे के साथ खड़े होंगे, तभी एकजुटता का संकल्प व्यापक रूप ले सकेगा।
युवतियों को संबोधित करते हुए दिया चर्चित बयान
धर्मसभा के दौरान पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने युवतियों को संबोधित करते हुए धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा एक बयान भी दिया।उन्होंने कहा, “दुर्गा बनना, काली बनना, पर कभी ना बुर्के वाली बनना।”उनका यह कथन महिलाओं की वेशभूषा और धार्मिक पहचान से संबंधित होने के कारण विशेष ध्यान आकर्षित करने वाला रहा। पंडित शास्त्री ने इसे अपने संबोधन में धार्मिक और सांस्कृतिक संदेश के रूप में प्रस्तुत किया। हालांकि ऐसे वक्तव्य को अलग-अलग सामाजिक और धार्मिक दृष्टिकोणों से देखा जा सकता है।
मंच पर पहुंचने की होड़, बार-बार प्रभावित हुई व्यवस्थाएं
दमोह में आयोजित धर्मसभा का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा रहा। पॉलिटेक्निक कॉलेज मैदान में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बीच मंच के आसपास लगातार दबाव बना रहा।पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के निकट पहुंचने, उनके दर्शन करने और आशीर्वाद प्राप्त करने के प्रयासों के कारण कई बार मंच के आसपास अव्यवस्था की स्थिति बनती दिखाई दी।कुछ श्रद्धालुओं द्वारा मंच तक पहुंचने के प्रयास किए जाने से पुलिस और सुरक्षा कर्मियों को उन्हें रोकने तथा पीछे हटाने के लिए मशक्कत करनी पड़ी। भीड़ का दबाव बढ़ने पर कई बार स्थिति को व्यवस्थित करने में कठिनाई हुई।आयोजन स्थल पर मौजूद सुरक्षा कर्मियों द्वारा व्यवस्था बनाए रखने के प्रयास लगातार किए जाते रहे, लेकिन भारी जनसमूह के बीच मंच के आसपास भीड़ को पूरी तरह नियंत्रित करना चुनौती बना रहा।
आस्था के साथ सुरक्षा भी जरूरी, व्यवस्थाओं पर उठे गंभीर सवाल
इतने बड़े धार्मिक आयोजन में श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। विशेष रूप से जब हजारों की संख्या में लोग किसी धार्मिक गुरु के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने पहुंचते हैं, तब मंच की सुरक्षा, प्रवेश व्यवस्था, आपातकालीन निकास और भीड़ नियंत्रण के लिए प्रभावी इंतजाम आवश्यक हो जाते हैं।दमोह के आयोजन में सामने आई अव्यवस्थाओं ने कई सवाल खड़े किए हैं। क्या आयोजन से पहले संभावित भीड़ का सही आकलन किया गया था? क्या मंच तक पहुंचने के लिए पर्याप्त नियंत्रण व्यवस्था थी? क्या श्रद्धालुओं और मंच के बीच सुरक्षा घेरा प्रभावी था? और सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह कि यदि अचानक भीड़ का दबाव बढ़ जाता, तो उससे निपटने की तैयारियां कितनी पर्याप्त थीं?इन प्रश्नों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि किसी भी विशाल धार्मिक आयोजन में थोड़ी सी लापरवाही गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार आयोजन के दौरान किसी बड़ी अप्रिय घटना की पुष्टि सामने नहीं आई है, लेकिन बार-बार प्रभावित होती व्यवस्थाएं भविष्य के आयोजनों के लिए महत्वपूर्ण संकेत अवश्य देती हैं।
सनातन एकता का संदेश और श्रद्धालुओं का उत्साह बना आकर्षण
दमोह पहुंची सनातन हिंदू एकता रथ यात्रा में श्रद्धालुओं की बड़ी भागीदारी ने यह स्पष्ट किया कि पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के कार्यक्रमों को लेकर लोगों में व्यापक उत्साह है।हटा से दमोह तक यात्रा मार्ग में स्वागत और पॉलिटेक्निक कॉलेज मैदान में विशाल जनसमूह की उपस्थिति इस आयोजन के प्रमुख आकर्षण रहे।पंडित शास्त्री ने अपने संबोधन में सप्त संकल्पों, सामाजिक समरसता और सनातन एकता को प्रमुखता दी। वहीं युवतियों को लेकर दिए गए बयान और मंच पर भीड़ के कारण उत्पन्न अव्यवस्थाएं भी कार्यक्रम के महत्वपूर्ण पहलू रहीं।कुल मिलाकर दमोह में सनातन हिंदू एकता रथ यात्रा आस्था, उत्साह और सामाजिक एकता के संदेश के बीच संपन्न हुई। लेकिन इस आयोजन ने एक बार फिर यह प्रश्न सामने रखा कि विशाल धार्मिक कार्यक्रमों की सफलता केवल श्रद्धालुओं की संख्या से नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा और सुव्यवस्थित आयोजन से भी तय होती है।
भारी भीड़ के बीच चेन, मंगलसूत्र और पर्स चोरी की शिकायतें, दो लोगों को पकड़ा गया

धर्मसभा में उमड़ी भारी भीड़ के बीच चेन, मंगलसूत्र और पर्स चोरी की अनेक शिकायतें भी सामने आईं। कार्यक्रम में पहुंचे कई श्रद्धालुओं ने अपने कीमती सामान गायब होने की बात कही। इसी दौरान दो लोगों को पकड़े जाने की जानकारी भी सामने आई है। मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि पकड़े गए दोनों व्यक्ति भी चोरी की घटनाओं में शामिल हो सकते हैं। हालांकि इन आरोपों की पुलिस द्वारा पुष्टि और दोनों व्यक्तियों की वास्तविक संलिप्तता की जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है।इतने बड़े धार्मिक आयोजन में चोरी की शिकायतें सामने आना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। एक ओर मंच पर भारी भीड़ को नियंत्रित करने में पुलिस और सुरक्षा कर्मियों को मशक्कत करनी पड़ रही थी, वहीं दूसरी ओर श्रद्धालुओं के कीमती सामान की सुरक्षा भी चिंता का विषय बन गई। अब सवाल यह है कि चोरी की कितनी शिकायतें पुलिस तक पहुंचीं, कितने मामले दर्ज किए गए और पकड़े गए दोनों व्यक्तियों के संबंध में जांच में क्या सामने आया? इन सवालों के जवाब पुलिस की जांच और आधिकारिक जानकारी के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
