वीर भारत न्यास के सचिव श्रीराम तिवारी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश मेहता का दावा— आरोप झूठे और राजनीतिक; माफी नहीं मांगी तो अदालत का रुख करेंगे
भोपाल। उज्जैन की कथित 500 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन के आवंटन को लेकर मध्य प्रदेश की राजनीति में नया मोड़ आ गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद अब मामला कानूनी लड़ाई की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। वीर भारत न्यास के सचिव एवं मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार श्रीराम तिवारी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश मेहता ने जीतू पटवारी को 5 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजते हुए तीन दिन के भीतर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने का अल्टीमेटम दिया है।
भोपाल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश मेहता ने कहा कि दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान जीतू पटवारी ने श्रीराम तिवारी और वीर भारत न्यास के संबंध में जो आरोप लगाए, वे पूरी तरह असत्य, भ्रामक और तथ्यहीन हैं। उनका कहना है कि इन बयानों से श्रीराम तिवारी और वीर भारत न्यास की सार्वजनिक छवि को गंभीर क्षति पहुंची है।
3 दिन में माफी नहीं तो कोर्ट में मानहानि का मुकदमा
वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश मेहता ने कहा कि जीतू पटवारी को भेजे गए कानूनी नोटिस में तीन दिन के भीतर मीडिया के सामने आकर सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त करने और माफी मांगने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर ऐसा नहीं किया गया तो उनके खिलाफ सक्षम न्यायालय में मानहानि का दावा दायर किया जाएगा।
मेहता के अनुसार, यह कदम किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं बल्कि संस्था और उसके पदाधिकारियों की प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए उठाया गया है।
‘वीर भारत न्यास निजी ट्रस्ट नहीं, सरकार द्वारा गठित सार्वजनिक न्यास‘
प्रेस वार्ता में हरीश मेहता ने स्पष्ट किया कि वीर भारत न्यास को निजी ट्रस्ट बताना तथ्यात्मक रूप से गलत है। उन्होंने दावा किया कि यह मध्य प्रदेश शासन द्वारा गठित एक सार्वजनिक न्यास है, जिसका संचालन शासन के निर्धारित नियमों और वैधानिक प्रावधानों के अनुसार किया जाता है। इसलिए इसे निजी संस्था बताकर जनता के बीच भ्रम फैलाने का प्रयास किया गया।
इस दौरान अधिवक्ता गुंजन चौकसे ने भी कहा कि लोकतंत्र में किसी भी विषय पर सवाल उठाना और आरोप लगाना अधिकार है, लेकिन बिना पर्याप्त तथ्यों के किसी व्यक्ति या संस्था की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह भी इन आरोपों का खंडन कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि अप्रैल 2013 में मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा वीर भारत न्यास की स्थापना सार्वजनिक उद्देश्य के लिए की गई थी।
क्या थे जीतू पटवारी के आरोप?
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया था कि उज्जैन स्थित लगभग 500 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी भूमि वीर भारत न्यास से जुड़े लोगों को बेहद कम कीमत पर आवंटित की गई। उनका आरोप था कि इस मामले में मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार श्रीराम तिवारी से जुड़े ट्रस्ट को लाभ पहुंचाया गया।
हालांकि, श्रीराम तिवारी की ओर से इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए खारिज किया गया है और अब उनके पक्ष ने कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपनाया है।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल
5 करोड़ रुपये के मानहानि नोटिस और तीन दिन के अल्टीमेटम के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर इस मुद्दे पर बहस तेज होने की संभावना है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जीतू पटवारी इस नोटिस का क्या जवाब देते हैं और आगे यह मामला अदालत तक पहुंचता है या नहीं।
