लाखों रुपये लेकर कथित फर्जी डिग्रियां उपलब्ध कराने का आरोप, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल, पुलिस जांच में सामने आ सकते हैं नए खुलासे
(डॉ.एल.एन. वैष्णव)
दमोह 21 may 2026/दमोह जिले में सामने आए कथित फर्जी डॉक्टर नेटवर्क मामले ने अब बड़ा और गंभीर मोड़ ले लिया है। पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आने लगे हैं। इस पूरे मामले में कथित मुख्य सूत्रधार माने जा रहे हीरा कौशल को भोपाल से हिरासत में लिए जाने के बाद जांच एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं।पुलिस अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक जांच में यह मामला केवल कुछ लोगों तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि इसके तार कई जिलों और संस्थानों तक जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार आरोपी को पुलिस कार्रवाई की भनक लग गई थी। इसके बाद उसने मोबाइल फोन बंद कर अपनी लोकेशन छिपाने का प्रयास किया। आरोपी तक पहुंचना पुलिस के लिए चुनौती बन गया था। दमोह पुलिस की विशेष टीम और साइबर सेल ने तकनीकी निगरानी और डिजिटल ट्रैकिंग के माध्यम से भोपाल पहुंचकर आरोपी को हिरासत में लिया।अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुजीत सिंह भदौरिया ने पुलिस कंट्रोल रूम में जानकारी साझा करते हुए बताया कि पुलिस विभिन्न बिंदुओं पर जांच कर रही है और पूरे मामले की गहन पड़ताल जारी है।
प्रारंभिक जांच में सामने आए प्रमुख बिंदु
- कथित मुख्य आरोपी हीरा कौशल को भोपाल से हिरासत में लिया गया।
- पुलिस के अनुसार आरोपी मोबाइल फोन बंद कर पुलिस से बचने का प्रयास कर रहा था।
- साइबर सेल और विशेष टीम ने तकनीकी सहायता से लोकेशन ट्रैक कर कार्रवाई की।
- कथित रूप से फर्जी डिग्री और दस्तावेज तैयार करने के नेटवर्क की जांच जारी है।
- पुलिस आर्थिक लेन-देन, बैंक खातों और अन्य वित्तीय पहलुओं की भी जांच कर रही है।
- पुलिस को संदेह है कि यह मामला एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।
- पूर्व में तीन कथित डॉक्टरों को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।
- पुलिस विभिन्न जिलों और विभागों से दस्तावेजों का सत्यापन करा रही है।
लाखों रुपये के लेन-देन की जांच
प्राथमिक जांच में पुलिस को कथित रूप से बड़ी रकम के लेन-देन की जानकारी भी मिली है। सूत्रों के अनुसार कथित फर्जी डिग्री और दस्तावेज तैयार करने के एवज में लाखों रुपये की राशि ली जाती थी। पुलिस अब बैंकिंग ट्रांजेक्शन, वित्तीय रिकॉर्ड और संपत्तियों से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रही है।जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित रूप से अर्जित रकम का उपयोग किन-किन गतिविधियों में किया गया।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य तंत्र की कार्यप्रणाली और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर हुआ और प्रक्रिया में कहीं कोई गंभीर चूक तो नहीं हुई।पुलिस अधिकारियों ने हालांकि स्पष्ट किया है कि जांच अभी जारी है और साक्ष्यों के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।
मोबाइल और दस्तावेज बन सकते हैं बड़े सबूत
जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी से जुड़े मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड, संपर्क सूची और दस्तावेज पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों का तकनीकी विश्लेषण कर रही है।सूत्रों के अनुसार कुछ अन्य नाम भी जांच के दायरे में आए हैं। विभिन्न जिलों के पुलिस अधिकारियों और संबंधित विभागों से भी संपर्क किया जा रहा है।
विशेष टीमों का गठन, जांच का दायरा बढ़ा
पुलिस ने जांच के लिए विशेष टीमें बनाई हैं। फरार लोगों की तलाश, दस्तावेज सत्यापन और कथित नेटवर्क से जुड़े लोगों तक पहुंचने के लिए अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई जारी है।दमोह पुलिस अब न्यायालयीन प्रक्रिया के माध्यम से आगे पूछताछ और साक्ष्य जुटाने की दिशा में भी काम कर रही है।जांच से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस पूरे मामले में कई और महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।फिलहाल दमोह से शुरू हुई यह जांच अब प्रदेश स्तर पर चर्चा का विषय बन चुकी है और सभी की निगाहें पुलिस जांच के अगले चरण पर टिकी हुई हैं।
