दमोह। जिला अस्पताल का ब्लड बैंक इन दिनों गंभीर रक्त संकट से गुजर रहा है। स्थिति यह है कि 600 यूनिट क्षमता वाले ब्लड बैंक में महज 19 यूनिट रक्त ही शेष बचा है, जबकि अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 25 से 30 यूनिट रक्त की आवश्यकता पड़ रही है। ऐसे में गंभीर मरीजों, गर्भवती महिलाओं, दुर्घटना पीड़ितों तथा ऑपरेशन के लिए भर्ती मरीजों की चिंता बढ़ गई है।
हाल ही में पथरिया में आयोजित रक्तदान शिविर से 25 यूनिट रक्त एकत्रित होने के कारण कुछ समय के लिए राहत अवश्य मिली, लेकिन बढ़ती मांग के सामने यह पर्याप्त साबित नहीं हो सका। वर्तमान हालात में ब्लड बैंक का संचालन काफी हद तक रक्तदाताओं की उपलब्धता पर निर्भर हो गया है।
दुर्लभ ब्लड ग्रुप की कमी बनी सबसे बड़ी चुनौती
ब्लड बैंक में सबसे अधिक परेशानी नेगेटिव ब्लड ग्रुप की कमी को लेकर सामने आ रही है। वर्तमान में एबी पॉजिटिव, एबी नेगेटिव और ओ नेगेटिव रक्त समूह का स्टॉक पूरी तरह समाप्त हो चुका है। वहीं ए पॉजिटिव, बी पॉजिटिव, ओ पॉजिटिव, ए नेगेटिव और बी नेगेटिव समूह का सीमित स्टॉक ही उपलब्ध है।
विशेषज्ञों का कहना है कि नेगेटिव ब्लड ग्रुप वाले रक्तदाताओं की संख्या सामान्यतः कम होती है, इसलिए आवश्यकता पड़ने पर मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
एक माह से बनी हुई है संकट की स्थिति
जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल का ब्लड बैंक पिछले लगभग एक माह से रक्त की कमी से जूझ रहा है। इस दौरान उपलब्ध रक्त का स्टॉक 15 से 25 यूनिट के बीच ही बना हुआ है। रविवार को कुल 19 यूनिट रक्त ही उपलब्ध था।
जिला अस्पताल में हर माह करीब 600 यूनिट रक्त की आवश्यकता होती है, लेकिन रक्तदान करने वालों की संख्या मांग के अनुरूप नहीं बढ़ पा रही है। दूसरी ओर गर्भवती महिलाओं को बिना डोनर के रक्त उपलब्ध कराने की व्यवस्था होने से भी ब्लड बैंक पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
रक्त की तलाश में भटक रहे परिजन
अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजनों का कहना है कि कई बार आवश्यक रक्त समूह उपलब्ध नहीं होने पर उन्हें स्वयं डोनर की तलाश करनी पड़ती है। एक मरीज के परिजन ने बताया कि उपचार के लिए तत्काल रक्त की आवश्यकता थी, लेकिन समान ब्लड ग्रुप का डोनर लाने के लिए कहा गया। काफी प्रयासों के बाद रक्तदाता मिलने पर मरीज का उपचार संभव हो सका।
इसी तरह एक अन्य परिवार ने बताया कि उनकी बहू को एबी पॉजिटिव रक्त की तत्काल जरूरत थी। ब्लड बैंक में स्टॉक नहीं होने की जानकारी मिलने पर परिचितों से संपर्क किया गया, जिसके बाद एक रक्तदाता आगे आया और समय पर रक्त मिलने से मरीज की जान बच सकी।
सूचना मिलते ही मदद को आगे आते हैं युवा
रक्त संकट के बीच शहर के कई युवा समूह और स्वयंसेवी संगठन जरूरतमंद मरीजों के लिए उम्मीद की किरण बने हुए हैं। सोशल मीडिया और व्यक्तिगत नेटवर्क के माध्यम से ये संगठन रक्तदाताओं से संपर्क कर मरीजों तक समय पर रक्त पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
कई युवा नियमित रूप से हर तीन माह में रक्तदान करते हैं, जबकि कुछ लोग जरूरत की सूचना मिलते ही अस्पताल पहुंच जाते हैं। हाल ही में एक गंभीर मरीज की सहायता के लिए नोहटा थाना में पदस्थ प्रधान आरक्षक प्रवीण सेन ने स्वयं रक्तदान कर मानवता का परिचय दिया।
रक्तदान शिविरों में आई कमी
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि जिले में रक्तदान शिविरों की संख्या में आई कमी भी वर्तमान संकट का प्रमुख कारण है। गर्मी के मौसम में अधिकांश सामाजिक और स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा अपेक्षित संख्या में रक्तदान शिविर आयोजित नहीं किए गए।
हालांकि स्वास्थ्य विभाग विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं स्वास्थ्य संस्थानों के माध्यम से लगातार शिविर आयोजित कर रहा है, लेकिन उनमें भी अपेक्षाकृत कम लोग रक्तदान करने पहुंच रहे हैं। पथरिया में हाल ही में आयोजित शिविर में भी स्वास्थ्य विभाग के कई कर्मचारियों ने स्वयं रक्तदान कर अभियान को सफल बनाया।
12 जून को हटा अस्पताल में लगेगा रक्तदान शिविर
ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. प्रशांत सोनी ने बताया कि लोगों को रक्तदान के प्रति जागरूक करने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। हाल ही में पथरिया में आयोजित शिविर में 25 यूनिट रक्त संग्रहित किया गया था। आगामी 12 जून को हटा अस्पताल में रक्तदान शिविर आयोजित किया जाएगा। उन्होंने आमजन से स्वेच्छा से रक्तदान कर जरूरतमंद मरीजों की सहायता करने की अपील की है।
वर्तमान रक्त उपलब्धता
| रक्त समूह | उपलब्ध यूनिट |
| ए पॉजिटिव | 04 |
| बी पॉजिटिव | 07 |
| ओ पॉजिटिव | 04 |
| एबी पॉजिटिव | शून्य |
| ए नेगेटिव | 03 |
| बी नेगेटिव | 01 |
| ओ नेगेटिव | शून्य |
| एबी नेगेटिव | शून्य |
“एक यूनिट रक्त किसी की जिंदगी बचा सकता है। वर्तमान संकट के दौर में स्वैच्छिक रक्तदान ही सबसे बड़ा जीवनदान साबित हो सकता है।”

