(डॉ एल एन वैष्णव)
सनातन धर्म में ‘शक्ति’ की उपासना का विशेष महत्व है। आदि अनादि काल से भारत भूमि देवी-देवताओं की तपोस्थली रही है। इसी पावन परंपरा में मध्यप्रदेश के दमोह लोकसभा क्षेत्र से जुड़े सागर जिले की रहली तहसील में स्थित रानगिर धाम अपनी दिव्यता और चमत्कारिक आभा के लिए प्रसिद्ध है। देहार नदी के तट पर विराजित मां हरसिद्धि का यह दरबार श्रद्धालुओं के लिए आस्था, विश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बना हुआ है, जहां भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं।
सनातन परंपरा में शक्ति आराधना का महत्व
सनातन धर्म में मां भगवती को सृष्टि की सृजनकर्ता और संहारकर्ता माना गया है। शास्त्रों के अनुसार ‘शक्ति’ के बिना ‘शिव’ भी अधूरे हैं। देवी आराधना केवल पूजा-अर्चना नहीं, बल्कि भीतर की ऊर्जा को जाग्रत करने का माध्यम मानी जाती है। नवरात्रि के नौ दिन इसी शक्ति साधना का पर्व हैं, जब श्रद्धालु उपवास, संयम और मंत्र जाप के माध्यम से देवी की उपासना करते हैं।
“या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥”
पौराणिक मान्यता: सती की जंघा का पातन
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के खंड किए थे, तब रानगिर वह पवित्र स्थल बना जहां माता की जंघा (जांघ) गिरी थी। इसी कारण इस स्थान को सिद्ध शक्तिपीठ के रूप में मान्यता प्राप्त है। रहली विधानसभा और दमोह संसदीय क्षेत्र से जुड़ा यह धाम क्षेत्रीय आस्था का प्रमुख केंद्र है।
रानगिर धाम की विशेषताएं
त्रिकाल दर्शन की महिमा: मान्यता है कि मां हरसिद्धि की प्रतिमा के मुखमंडल पर दिन में तीन बार भाव परिवर्तन दिखाई देते हैं। सुबह कन्या स्वरूप, दोपहर में युवती और शाम को मातृत्व भाव के दर्शन होते हैं।
देहार नदी का पावन तट: मंदिर के समीप बहती देहार नदी प्राकृतिक सौंदर्य को बढ़ाती है। श्रद्धालु यहां स्नान कर माता के दर्शन करने पहुंचते हैं।
अखंड ज्योति का विश्वास: मंदिर परिसर में जलती अखंड ज्योति श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है। यहां की भभूत को रोगों से मुक्ति देने वाली माना जाता है।
नवरात्रि में उमड़ता आस्था का सैलाब
चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दौरान रानगिर धाम में लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। बुंदेलखंड सहित आसपास के जिलों से भक्त पदयात्रा कर माता के दरबार में पहुंचते हैं। ज्वारे चढ़ाने की परंपरा यहां विशेष महत्व रखती है। नवरात्रि के दौरान लगने वाला विशाल मेला क्षेत्रीय संस्कृति और व्यापार का बड़ा केंद्र बन जाता है।
आस्था, पर्यटन और विकास का संगम
रहली क्षेत्र में स्थित यह धाम धार्मिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रशासन द्वारा व्यवस्थाएं की जाती हैं, जिससे यह स्थान धार्मिक पर्यटन के रूप में भी विकसित हो रहा है।
रानगिर की मां हरसिद्धि केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि बुंदेलखंड की आस्था का प्रतीक हैं। जीवन की भागदौड़ से दूर शांति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा की तलाश करने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह धाम विशेष महत्व रखता है। नवरात्रि के पावन अवसर पर यहां पहुंचकर भक्त मां के दर्शन कर अपने जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
