70 वर्षीय मरीज को जूनियर डॉक्टर ने बताया मृत, मृत्यु की पावती पर भी कराए हस्ताक्षर; कलेक्टर के निर्देश पर जांच शुरू
रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा स्थित संजय गांधी अस्पताल से चिकित्सा व्यवस्था को लेकर हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां उपचार के दौरान एक 70 वर्षीय मरीज को जूनियर डॉक्टर द्वारा मृत घोषित किए जाने की जानकारी सामने आई है। इतना ही नहीं, मरीज की मृत्यु संबंधी पावती तैयार कर उस पर चिकित्सक और परिजनों के हस्ताक्षर भी करा लिए गए। परिवार जब अंतिम संस्कार की तैयारी में मरीज को शव वाहन की ओर ले जा रहा था, तभी उसके शरीर में हलचल महसूस हुई। इसके बाद परिजनों ने करीब से जांच की तो बुजुर्ग की सांसें चलती मिलीं।
मरीज के जीवित होने का पता चलते ही परिजनों में हड़कंप मच गया। उन्हें तत्काल वापस संजय गांधी अस्पताल ले जाया गया, जहां आईसीयू में भर्ती कर उपचार शुरू किया गया। उपचार के बाद उनकी हालत में सुधार होने पर उन्हें जनरल वार्ड में शिफ्ट किए जाने की जानकारी सामने आई है।
सीधी से इलाज के लिए रीवा लाए गए थे मरीज
जानकारी के अनुसार सीधी जिले के वार्ड क्रमांक-8 निवासी गिरिजा प्रसाद गुप्ता को उपचार के लिए रीवा के श्याम शाह मेडिकल कॉलेज से संबद्ध संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शनिवार को उपचार के दौरान उनकी हालत गंभीर बताई गई। इसी दौरान अस्पताल में मौजूद एक जूनियर डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मरीज को मृत घोषित किए जाने के बाद अस्पताल की ओर से मृत्यु की पावती तैयार की गई। बताया गया है कि इस पावती पर चिकित्सक और मरीज के परिजनों के हस्ताक्षर भी करा लिए गए। इसके बाद परिजन अंतिम संस्कार की तैयारी में जुट गए और बुजुर्ग को शव वाहन की ओर ले जाने लगे।
शव वाहन तक पहुंचने से पहले हुई शरीर में हलचल

परिजनों के अनुसार जब वे मरीज को अंतिम संस्कार के लिए शव वाहन की ओर लेकर जा रहे थे, तभी उन्हें बुजुर्ग के शरीर में हलचल महसूस हुई। इसके बाद उन्होंने ध्यान से देखा तो बुजुर्ग की सांसें चल रही थीं। यह देखकर परिजन घबरा गए और तत्काल अस्पताल के चिकित्सकों को इसकी जानकारी दी।इसके बाद मरीज को दोबारा अस्पताल के अंदर ले जाया गया। उन्हें आईसीयू में भर्ती कर तत्काल उपचार शुरू किया गया। उपचार के बाद उनकी स्थिति में सुधार होने की बात सामने आई है। बाद में मरीज को जनरल वार्ड में शिफ्ट किए जाने की जानकारी दी गई।
घटना से अस्पताल की व्यवस्थाओं पर उठे सवाल
इस घटना के सामने आने के बाद संजय गांधी अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था और गंभीर मरीजों की निगरानी को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि मरीज को किस आधार पर मृत घोषित किया गया और मृत्यु प्रमाण संबंधी प्रक्रिया किस स्तर पर पूरी की गई।मामले में यह भी सवाल उठ रहा है कि गंभीर स्थिति वाले मरीज की जांच के दौरान वरिष्ठ चिकित्सक की मौजूदगी और निगरानी किस स्तर पर थी। हालांकि, घटना में वास्तविक चूक किस स्तर पर हुई, इसका स्पष्ट पता प्रशासनिक जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा।
कलेक्टर के निर्देश पर जांच शुरू
मामला सामने आने के बाद रीवा कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने इसे गंभीरता से लिया और पूरे घटनाक्रम की जांच के निर्देश दिए। कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम अनुराग तिवारी संजय गांधी अस्पताल पहुंचे और मामले की जानकारी ली।एसडीएम ने अस्पताल के संबंधित अधिकारियों और चिकित्सकों से घटना के संबंध में जानकारी जुटाई। उन्होंने मरीज के उपचार और उसे मृत घोषित किए जाने से संबंधित परिस्थितियों की भी जानकारी ली। प्रशासन की ओर से जांच प्रतिवेदन तैयार कर कलेक्टर को सौंपा जाएगा।
एसडीएम ने बताया कि कलेक्टर के निर्देश पर वे संजय गांधी अस्पताल पहुंचे थे। उनके अनुसार प्रथम वर्ष के मेडिकल छात्र द्वारा जीवित मरीज को मृत घोषित किए जाने की जानकारी सामने आई है। उन्होंने कहा कि संबंधित डॉक्टर से बातचीत की गई है और पूरे मामले की जांच के बाद प्रतिवेदन कलेक्टर को सौंपा जाएगा।
जांच के बाद तय होगी जिम्मेदारी
प्रशासनिक जांच में यह देखा जाएगा कि मरीज की चिकित्सकीय जांच किस तरीके से की गई, उन्हें मृत घोषित करने से पहले किन प्रक्रियाओं का पालन किया गया और मृत्यु की पावती किस आधार पर जारी की गई। साथ ही यह भी जांच का विषय होगा कि इस दौरान वरिष्ठ चिकित्सक की निगरानी थी या नहीं।मरीज के जीवित पाए जाने के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही जिम्मेदारी तय होने की संभावना है।
परिजनों के लिए बेहद तनावपूर्ण रहा घटनाक्रम
मरीज के परिजनों के लिए यह पूरा घटनाक्रम बेहद तनावपूर्ण रहा। जिस बुजुर्ग को वे मृत समझकर अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे, उसके जीवित होने की जानकारी मिलने के बाद उन्हें तत्काल वापस अस्पताल लाना पड़ा। फिलहाल मरीज का उपचार जारी है और उनकी स्थिति में सुधार होने की जानकारी सामने आई है।घटना ने गंभीर मरीजों के उपचार, चिकित्सकीय निगरानी और मृत्यु घोषित करने की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच की रिपोर्ट पर है, जिसके आधार पर यह स्पष्ट होगा कि मरीज को मृत घोषित करने में किस स्तर पर चूक हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
