सुरक्षा नियमों की उड़ रही धज्जियां, मान्यता देने से लेकर निरीक्षण तक पूरी व्यवस्था सवालों के घेरे में
दमोह। “बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है”—यह वाक्य शासन और प्रशासन की बैठकों, आदेशों और सरकारी दस्तावेजों में अक्सर सुनाई देता है। लेकिन दमोह में जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आ रही है। शहर में ऐसे निजी स्कूल संचालित हो रहे हैं, जहां मासूम बच्चे रोजाना अपनी जान जोखिम में डालकर पढ़ने पहुंच रहे हैं। कहीं स्कूल के ठीक ऊपर से हाईटेंशन बिजली लाइन गुजर रही है, तो कहीं बहुमंजिला स्कूल इतनी संकरी गलियों में संचालित हो रहे हैं कि किसी भी आपदा की स्थिति में दमकल वाहन तक मौके पर नहीं पहुंच सकता।
सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
हाल ही में राजकीय बालिका छात्रावास में छज्जे का प्लास्टर गिरने से आठ छात्राएं घायल हुई थीं। उस घटना ने सरकारी भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि उससे भी प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया।
वर्धमान कॉलोनी का वंडर किड स्कूल सवालों के घेरे में

लोकनाथ न्यूज़ की पड़ताल में सामने आया कि वैशाली नगर के पीछे वर्धमान कॉलोनी में संचालित वंडर किड स्कूल का भवन हाईटेंशन विद्युत लाइन के बेहद निकट स्थित है। प्रतिदिन सैकड़ों बच्चे इसी भवन में शिक्षा ग्रहण करने पहुंचते हैं। यदि बारिश, तेज हवा या तकनीकी खराबी के कारण विद्युत लाइन में फॉल्ट हो जाए, तार टूट जाए या फ्लैशओवर जैसी स्थिति बने, तो उसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।
यह केवल एक स्कूल की बात नहीं है। शहर में ऐसे कई निजी स्कूल हैं जिनकी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
विद्युत विभाग ने माना—नियमों का उल्लंघन हो सकता है
मध्य प्रदेश विद्युत मंडल के अभियंता मोतीलाल साहू ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हाईटेंशन लाइन के नीचे अथवा निर्धारित सुरक्षा दूरी के भीतर किसी भी प्रकार का निर्माण नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा—
“हाईटेंशन लाइन के नीचे और निर्धारित दूरी के भीतर निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता। हाईटेंशन लाइन तीन प्रकार की होती हैं और प्रत्येक के लिए अलग-अलग सुरक्षित दूरी निर्धारित है। ऐसे स्थान पर भवन निर्माण के साथ स्कूल का संचालन निश्चित रूप से नियमों के उल्लंघन की ओर संकेत करता है। इससे बच्चों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। मैं इस संबंध में जांच कर आवश्यक कार्रवाई अवश्य करूंगा।”
जब स्वयं विद्युत विभाग का जिम्मेदार अधिकारी संभावित नियम उल्लंघन स्वीकार कर रहा है तो सवाल यह उठता है कि अब तक संबंधित विभागों ने कार्रवाई क्यों नहीं की?
पंचायत ने भी माना—ऐसे स्थान पर अनुमति नहीं दी जानी चाहिए
ग्राम पंचायत आमचोपरा के सरपंच जयपाल सिंह यादव ने भी स्वीकार किया कि हाईटेंशन लाइन के नीचे भवन निर्माण और उसमें स्कूल का संचालन उचित नहीं है।
उन्होंने कहा—
“हाईटेंशन लाइन के नीचे भवन का निर्माण और उसमें स्कूल का संचालन ठीक नहीं है। भवन निर्माण की अनुमति ग्राम पंचायत के द्वारा दी जाती है, लेकिन ऐसे स्थानों के लिए नहीं जहां हाईटेंशन लाइन हो। मामले की जांच कराई जाएगी, वरिष्ठ अधिकारियों से मार्गदर्शन प्राप्त किया जाएगा और यदि नियमों का उल्लंघन पाया गया तो दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।”
अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि अनुमति नहीं दी जानी चाहिए थी, तो फिर निर्माण कैसे हुआ? क्या भवन निर्माण के समय किसी विभाग ने निरीक्षण नहीं किया? यदि किया था तो जिम्मेदारी किसकी है?
क्या निरीक्षण केवल फाइलों तक सीमित हैं?
निजी स्कूलों को मान्यता देने से पहले भवन की मजबूती, विद्युत सुरक्षा, अग्निशमन व्यवस्था, सुरक्षित निकासी मार्ग और अन्य सुरक्षा मानकों की जांच अनिवार्य होती है। हर वर्ष नवीनीकरण और निरीक्षण की प्रक्रिया भी अपनाई जाती है।
फिर भी यदि हाईटेंशन लाइन के नीचे स्कूल संचालित हो रहे हैं और संकरी गलियों में बहुमंजिला स्कूल चल रहे हैं तो यह पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
- क्या निरीक्षण केवल कागजी औपचारिकता बनकर रह गए हैं?
- क्या मान्यता देते समय सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई?
- क्या संबंधित विभागों ने अपनी जिम्मेदारी निभाई?
- और यदि नहीं निभाई, तो जवाबदेही किसकी तय होगी?
प्रशासन ने दिए जांच के संकेत
मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने जांच के संकेत दिए हैं।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) प्रवीण फुलपगारे ने कहा कि जिले में संचालित स्कूल भवनों की जांच कराई जाएगी। यदि किसी भी विद्यालय में बच्चों की सुरक्षा के लिए खतरा पाया जाता है तो संबंधित संस्था के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
वहीं जिला शिक्षा अधिकारी सत्यम चौरसिया ने भी कहा कि संबंधित स्कूल की जांच कराई जाएगी। यदि निरीक्षण के दौरान भवन, विद्युत सुरक्षा, अग्निशमन व्यवस्था अथवा अन्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी पाई जाती है तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
अब सिर्फ जांच नहीं, जवाबदेही भी तय होनी चाहिए
जांच के आश्वासन पहले भी कई मामलों में दिए गए हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या इस बार केवल नोटिस जारी होंगे या वास्तव में उन लोगों पर भी कार्रवाई होगी जिन्होंने नियमों की अनदेखी कर बच्चों की सुरक्षा को खतरे में डाला?
यदि जांच में यह सामने आता है कि हाईटेंशन लाइन के नीचे या निर्धारित सुरक्षा मानकों के विपरीत स्कूल संचालित हो रहे हैं, तो केवल स्कूल प्रबंधन ही नहीं बल्कि अनुमति देने, निरीक्षण करने और सुरक्षा प्रमाणित करने वाले संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
लोकनाथ न्यूज़ का सवाल
बच्चों की जिंदगी किसी सरकारी फाइल, निरीक्षण रिपोर्ट या औपचारिक कार्रवाई से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। प्रशासन को चाहिए कि पूरे जिले के सभी निजी विद्यालयों का भवन सुरक्षा, विद्युत सुरक्षा और अग्निशमन व्यवस्था का विशेष सुरक्षा ऑडिट तत्काल कराया जाए और उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
क्योंकि हादसे के बाद कार्रवाई करना प्रशासनिक प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन हादसे से पहले उसे रोकना ही सुशासन की असली पहचान है।
आज सवाल केवल वंडर किड स्कूल का नहीं है, बल्कि पूरे दमोह जिले के उन सभी स्कूलों का है जहां बच्चों की सुरक्षा से समझौता किया जा रहा है।
