मुख्य सड़कों पर कचरे के ढेर, नगर पालिका की व्यवस्था पर उठे सवाल
दमोह। स्वच्छता और सुंदरता के दावों के बीच शहर की जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है। शहर के विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर लगातार नए-नए डंपिंग प्वाइंट उभर रहे हैं, जबकि पुराने कचरा स्थलों का भी समुचित प्रबंधन नहीं हो पा रहा है। नतीजतन मुख्य सड़कों, शैक्षणिक संस्थानों और व्यावसायिक क्षेत्रों में कचरे के ढेर शहर की छवि को धूमिल कर रहे हैं।
शहर के सबसे व्यस्त इलाकों में शामिल सीएसपी कार्यालय के मुख्य गेट के सामने, विशाल मेगा मार्ट के आसपास, रानी दुर्गावती कन्या विद्यालय के समीप तथा पुराना थाना क्षेत्र की ताम्रकार गली में नियमित रूप से कचरे के ढेर देखे जा रहे हैं। जिन स्थानों पर कभी साफ-सुथरी सड़कें और व्यवस्थित आवागमन नजर आता था, वहां अब दुर्गंध और गंदगी का आलम है।

भीड़भाड़ वाले इलाकों में बढ़ रही परेशानी
जिन स्थानों पर खुले में कचरा डाला जा रहा है, वे शहर के अत्यंत व्यस्त क्षेत्र हैं। इन मार्गों से प्रतिदिन हजारों लोगों का आवागमन होता है। आसपास स्कूल, धार्मिक स्थल और व्यावसायिक प्रतिष्ठान मौजूद हैं। इसके बावजूद कई स्थानों पर दोपहर तक कचरे के ढेर सड़क किनारे पड़े रहते हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पालिका द्वारा कचरा उठाने के बाद भी नियमित निगरानी नहीं की जाती। कई जगहों पर सफाई होने के कुछ ही घंटों बाद दोबारा कचरा जमा हो जाता है। इससे न केवल दुर्गंध फैलती है, बल्कि राहगीरों, विद्यार्थियों और आसपास रहने वाले लोगों को भी गंभीर असुविधा का सामना करना पड़ता है।
पुराना थाना क्षेत्र में सीएसपी कार्यालय के मुख्य गेट के सामने नया डंपिंग प्वाइंट बन गया है। वहीं, पालीवाल मंदिर से लगभग 50 मीटर दूर ताम्रकार गली में सड़क किनारे फैला कचरा स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है।
कंटेनर हटे, सड़कें बनीं कचरा घर
कुछ वर्ष पहले तक शहर के चिन्हित कचरा स्थलों पर बड़े कंटेनर रखे जाते थे, जिनमें नागरिक घरेलू कचरा डालते थे। इससे सड़कों पर गंदगी फैलने से बचाव होता था।
लेकिन पिछले दो-तीन वर्षों में नगर पालिका ने धीरे-धीरे इन कंटेनरों को हटाना शुरू कर दिया। बताया जाता है कि पुराने कंटेनर आग लगने, टूट-फूट और जंग लगने के कारण अनुपयोगी हो गए थे। हालांकि, उन्हें हटाने के बाद नए कंटेनरों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई।
दूसरी ओर कई वार्डों में समय पर कचरा वाहन नहीं पहुंचने से लोग मजबूरी में सड़क किनारे और खाली स्थानों पर कचरा फेंकने लगे हैं। इससे शहर की स्वच्छता व्यवस्था लगातार प्रभावित हो रही है।
लाखों खर्च के बावजूद नहीं दिखे नए कंटेनर
नगर पालिका के सफाई विभाग द्वारा फिल्टर प्लांट परिसर में पुरानी सामग्री से नए कंटेनर तैयार कराने के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जाने की चर्चा है, लेकिन शहर में ऐसे कंटेनर कहीं दिखाई नहीं दे रहे हैं।
वर्तमान में केवल कुछ प्रमुख चौराहों पर तीन अलग-अलग रंगों के छोटे प्लास्टिक डस्टबिन लगाए गए हैं, जो बढ़ती आबादी और बढ़ते कचरे के दबाव के सामने नाकाफी साबित हो रहे हैं। जिन क्षेत्रों में बड़े कंटेनरों की आवश्यकता है, वहां अब तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है।
स्वच्छता अभियान पर उठ रहे सवाल
एक ओर नगर पालिका स्वच्छता को लेकर जागरूकता अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर शहर के प्रमुख स्थलों पर फैली गंदगी उसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
स्थानीय निवासी अमित अग्रवाल, सूरज नामदेव, विजय नामदेव और अंकित चौरसिया का कहना है कि शहर की सफाई व्यवस्था की नियमित निगरानी की जानी चाहिए। साथ ही, जिम्मेदार कर्मचारियों और अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए, ताकि दमोह की पहचान गंदगी नहीं, बल्कि एक स्वच्छ और सुंदर शहर के रूप में स्थापित हो सके।
क्या कहते हैं जिम्मेदार?
इस संबंध में नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारी ने कहा, “मैं इस संबंध में स्वास्थ्य प्रभारी से बात करता हूं। जहां भी नए कचरा प्वाइंट बने हैं, उन्हें हटवाया जाएगा।”
