दमोह। जिला कलेक्टर कार्यालय में मंगलवार को आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई में जिलेभर से बड़ी संख्या में नागरिक अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे। कलेक्टर प्रताप नारायण यादव की अध्यक्षता में आयोजित इस जनसुनवाई में विभिन्न विभागों से संबंधित कुल 313 आवेदन पंजीकृत किए गए, जबकि बिना पंजीकरण पहुंचे आवेदकों को शामिल करते हुए लगभग 350 से अधिक प्रकरणों पर सुनवाई की गई।
जनसुनवाई के दौरान राजस्व, बिजली, पंचायत, सामाजिक न्याय, नगर पालिका, खाद्य, शिक्षा और पुलिस विभाग से जुड़ी शिकायतें सामने आईं। कलेक्टर ने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्राप्त आवेदनों का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित किया जाए।
वरिष्ठ अधिकारियों की रही मौजूदगी
जनसुनवाई में अपर कलेक्टर प्रवीण फुलपगारे, डिप्टी कलेक्टर आर.एल. बागरी, एसडीएम सौरभ गंधर्व सहित विभिन्न विभागों के जिला अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने कई मामलों की मौके पर ही सुनवाई कर संबंधित विभागों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए।
अनुपस्थित अधिकारियों को फोन-व्हाट्सएप से दिए निर्देश
जनसुनवाई में अधिकांश विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। जिन अधिकारियों की किसी कारणवश उपस्थिति नहीं हो सकी, उन्हें कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने फोन और व्हाट्सएप के माध्यम से तत्काल निर्देश जारी किए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी शिकायत के निराकरण में अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कलेक्टर ने विशेष रूप से ऐसे मामलों, जिनमें तत्काल हस्तक्षेप आवश्यक है, उनका निराकरण एक सप्ताह के भीतर करने के निर्देश दिए।
सीमांकन के मामलों की बढ़ी संख्या, “पहले आवेदन-पहले निराकरण” की व्यवस्था लागू
जनसुनवाई में सबसे अधिक शिकायतें राजस्व विभाग से संबंधित प्राप्त हुईं, जिनमें भूमि सीमांकन और नामांतरण के मामले प्रमुख रहे। कलेक्टर ने बताया कि सीमांकन प्रकरणों के निष्पक्ष और पारदर्शी निराकरण के लिए प्रशासन ने “पहले आवेदन, पहले निराकरण” की व्यवस्था लागू की है।
उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से किसी भी प्रकार के पक्षपात की आशंका समाप्त होगी और सभी आवेदकों को समान अवसर मिलेगा।
बिजली बिलों में गड़बड़ी पर प्रशासन सख्त
जनसुनवाई के दौरान बिजली विभाग से जुड़ी शिकायतों ने भी प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। कई उपभोक्ताओं ने गलत बिलिंग और अत्यधिक बिजली बिल जारी किए जाने की शिकायत दर्ज कराई।
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने एक मामले का उल्लेख करते हुए बताया कि एक उपभोक्ता का लगभग चार लाख रुपये का बिजली बिल उपभोक्ता फोरम की सुनवाई के बाद घटकर डेढ़ लाख रुपये रह गया। उन्होंने इस पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए विद्युत विभाग के अधिकारियों को फील्ड स्टाफ की नियमित निगरानी करने और वास्तविक खपत के आधार पर ही बिल जारी करने के निर्देश दिए।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि लापरवाही और गलत बिलिंग के मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
जनसुनवाई में गरमाया बिजली कनेक्शन काटने का मामला
जनसुनवाई के दौरान उस समय माहौल कुछ देर के लिए गर्मा गया, जब आनंद सिंह नामक एक व्यक्ति, जिन्होंने स्वयं को शिक्षक बताया, कलेक्टर के समक्ष अपनी शिकायत लेकर पहुंचे। उन्होंने ऊंची आवाज में आरोप लगाया कि उनका घरेलू बिजली कनेक्शन काट दिया गया है और बिजली बिल में अनियमितता बरती गई है। उन्होंने मामले में तत्काल हस्तक्षेप और कार्रवाई की मांग की।
इस पर उपस्थित विद्युत मंडल के अधिकारी मोतीलाल साहू ने कलेक्टर के समक्ष विभाग का पक्ष रखते हुए कहा कि संबंधित उपभोक्ता के खिलाफ विभाग द्वारा नियमानुसार कार्रवाई की गई है और बकाया राशि जमा किए बिना बिजली कनेक्शन पुनः जोड़ा जाना संभव नहीं है।
अधिकारी ने यह भी जानकारी दी कि संबंधित व्यक्ति द्वारा पूर्व में विभागीय कर्मचारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार किया गया तथा शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने का प्रयास किया गया। इस संबंध में विभाग की ओर से पुलिस को लिखित शिकायत दी गई है।
मोतीलाल साहू ने जनसुनवाई के दौरान एक वीडियो भी प्रस्तुत किया, जिसमें कथित तौर पर संबंधित आवेदक और विद्युत विभाग के कर्मचारियों के बीच हुई बातचीत और विवाद का घटनाक्रम दर्ज है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
हालांकि, जिला प्रशासन की ओर से वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है। मामले की जांच जारी है और पुलिस में प्रस्तुत शिकायत के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
अनुभाग स्तर पर भी शुरू हुई जनसुनवाई
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने बताया कि जिला मुख्यालय के साथ-साथ अब अनुभाग स्तर पर भी नियमित जनसुनवाई आयोजित की जा रही है। इसका उद्देश्य लोगों को स्थानीय स्तर पर ही त्वरित समाधान उपलब्ध कराना और जिला मुख्यालय पर बढ़ते दबाव को कम करना है।
उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि वे अपनी समस्याओं के समाधान के लिए पहले अपने स्थानीय अनुभाग कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में आवेदन प्रस्तुत करें, ताकि उन्हें अनावश्यक रूप से जिला मुख्यालय तक न आना पड़े।
कलेक्टर ने कहा कि जिला प्रशासन की प्राथमिकता प्रत्येक नागरिक की समस्या का पारदर्शी, संवेदनशील और समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करना है।
