पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगि के निर्देशन में सायबर सेल की बड़ी सफलता, मध्यप्रदेश के अन्य जिलों और प्रदेश के बाहर से भी ट्रेस किए गए मोबाइल फोन
दमोह। दीपावली के पर्व पर दमोह पुलिस ने नागरिकों को एक खास उपहार देते हुए उनके चेहरों पर मुस्कान लौटाई है। पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगि (भा.पु.से.) के नेतृत्व में दमोह पुलिस ने गुम हुए 151 मोबाइल फोन बरामद कर उनके वास्तविक मालिकों को वापस सौंपे। बरामद मोबाइल फोन की अनुमानित कीमत करीब 30 लाख रुपये बताई गई है। लंबे समय से अपने मोबाइल फोन मिलने की उम्मीद लगाए बैठे नागरिकों को जब उनके कीमती मोबाइल वापस मिले तो उनकी खुशी देखते ही बनी। दमोह पुलिस की इस कार्रवाई को दीपावली के अवसर पर नागरिकों के लिए एक बड़ी राहत और यादगार उपहार के रूप में देखा जा रहा है।
पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगि के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुजीत सिंह भदौरिया के मार्गदर्शन में सायबर सेल दमोह एवं जिले के विभिन्न थानों की पुलिस टीमों द्वारा लगातार तकनीकी एवं मैदानी प्रयास किए जा रहे थे। इन्हीं प्रयासों के परिणामस्वरूप पुलिस ने 151 गुम मोबाइल फोन खोज निकालने में सफलता प्राप्त की। बरामद मोबाइल फोन में एप्पल आईफोन, सैमसंग, वीवो, ओप्पो सहित विभिन्न कंपनियों के महंगे स्मार्टफोन शामिल हैं।
आधुनिक तकनीक से खोज निकाले गए गुम मोबाइल
दमोह पुलिस की सायबर टीम ने मोबाइल फोन की तकनीकी जानकारी, उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों एवं आधुनिक सायबर तकनीक का प्रभावी उपयोग करते हुए गुम मोबाइलों की तलाश की। मोबाइल फोन की पहचान एवं तकनीकी जानकारी के आधार पर उनकी लोकेशन तथा उपयोग से संबंधित तथ्यों का विश्लेषण किया गया। इसके बाद लगातार ट्रेसिंग करते हुए मोबाइल फोन की बरामदगी के प्रयास किए गए।
इस कार्रवाई की विशेष उपलब्धि यह रही कि दमोह जिले के बाहर उपयोग किए जा रहे मोबाइल फोन भी पुलिस ने ट्रेस किए। बरामद किए गए कुछ मोबाइल मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों तथा प्रदेश के बाहर अन्य राज्यों में उपयोग किए जा रहे थे। ऐसे मोबाइल फोन की बरामदगी के लिए संबंधित स्थानों पर पुलिस टीमों के साथ समन्वय स्थापित किया गया। तकनीकी जानकारी एवं मैदानी स्तर पर किए गए प्रयासों के माध्यम से मोबाइल फोन को खोजकर उनके वास्तविक मालिकों तक पहुंचाने की कार्रवाई की गई।
30 लाख रुपये के मोबाइल वापस मिलने से नागरिकों में खुशी
गुम हुए मोबाइल फोन केवल एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ही नहीं, बल्कि आज के समय में लोगों की व्यक्तिगत जानकारी, संपर्क, बैंकिंग सुविधाओं, डिजिटल दस्तावेजों और सोशल मीडिया खातों से भी जुड़े होते हैं। ऐसे में मोबाइल फोन गुम होने पर नागरिकों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ महत्वपूर्ण डिजिटल जानकारी के दुरुपयोग की आशंका भी बनी रहती है।
दमोह पुलिस द्वारा 151 मोबाइल फोन बरामद कर वापस लौटाए जाने से नागरिकों को बड़ी राहत मिली है। करीब 30 लाख रुपये की अनुमानित कीमत के मोबाइल फोन वापस मिलने पर लोगों ने पुलिस की इस पहल की सराहना की। मोबाइल प्राप्त करने वाले नागरिकों ने पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगि एवं सायबर सेल की टीम के प्रति आभार व्यक्त किया।दीपावली के अवसर पर मोबाइल फोन वापस मिलने से नागरिकों की खुशी और भी बढ़ गई। पुलिस की इस कार्रवाई ने यह संदेश दिया कि गुम हुई संपत्ति की तलाश में तकनीकी संसाधनों और सतत प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
सायबर सेल एवं विभिन्न थानों की टीम का सराहनीय योगदान
मोबाइल रिकवरी की इस महत्वपूर्ण कार्रवाई में सायबर सेल प्रभारी उपनिरीक्षक अभिषेक पटेल, सायबर सेल टीम के प्रधान आरक्षक 353 सौरभ टंडन, प्रधान आरक्षक 280 राकेश अठ्या, आरक्षक 31 रोहित सिंह राजपूत, आरक्षक 37 मयंक दुबे, आरक्षक 66 मनोहर कुर्मी एवं आरक्षक 633 शुभम नामदेव का महत्वपूर्ण योगदान रहा।इसके साथ ही जिले के विभिन्न थानों में पदस्थ पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भी मोबाइल फोन की तलाश एवं बरामदगी में सहयोग प्रदान किया। पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगि एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुजीत सिंह भदौरिया के निर्देशन में टीम द्वारा किए गए लगातार प्रयासों के परिणामस्वरूप यह सफलता हासिल हुई।
दमोह पुलिस की नागरिकों से अपील
दमोह पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि मोबाइल फोन गुम होने की स्थिति में तत्काल पुलिस को सूचना दें। मोबाइल का IMEI नंबर सुरक्षित रखें, ताकि मोबाइल की पहचान एवं ट्रेसिंग में सहायता मिल सके। मोबाइल फोन की सुरक्षा के प्रति सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें।पुलिस ने नागरिकों को यह भी सलाह दी है कि मोबाइल में मौजूद महत्वपूर्ण डिजिटल जानकारी, बैंकिंग खातों, सोशल मीडिया खातों एवं अन्य व्यक्तिगत जानकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। मोबाइल गुम होने की स्थिति में संबंधित खातों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएं।दमोह पुलिस की इस कार्रवाई ने दीपावली के अवसर पर 151 परिवारों को खुशी देने के साथ ही यह भरोसा भी मजबूत किया है कि तकनीकी संसाधनों और पुलिस के निरंतर प्रयासों से गुम हुई संपत्ति को खोजकर उसके वास्तविक मालिकों तक पहुंचाया जा सकता है।
