दमोह : 19 अगस्त 2026/जिले में चल रहे विकास कार्यों की प्रगति, केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन और आमजन से जुड़े विषयों की समीक्षा को लेकर जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति की बैठक आयोजित की गई। सांसद राहुल सिंह लोधी की अध्यक्षता में हुई बैठक में जिले की सड़क कनेक्टिविटी, मेडिकल कॉलेज, पेयजल, रोजगार, कृषि आधारित उद्योग, रेलवे सुविधाओं, मत्स्य पालन, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और ग्रामीण अधोसंरचना सहित अनेक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में सांसद राहुल सिंह लोधी ने कहा कि दमोह-जबलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग को टू-लेन से फोरलेन में बदलने के लिए लगातार प्रयास किए गए हैं। सिंग्रामपुर क्षेत्र में करीब 3.5 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड रोड का प्रस्ताव भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। एलिवेटेड मार्ग बनने से वाहनों की आवाजाही सुगम होने के साथ वन्यजीवों के लिए भी रास्ता उपलब्ध रहेगा और उनके आवागमन में बाधा कम होगी।
सांसद ने बताया कि बकस्वाहा की ओर से आने वाले मार्ग, सागर-दमोह मार्ग तथा जबलपुर-सागर फोरलेन को बेहतर तरीके से जोड़ने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। इन मार्गों की कनेक्टिविटी मजबूत होने से दमोह सहित आसपास के क्षेत्रों में आवागमन और व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि ‘दिशा’ की बैठक हर तीन माह में आयोजित होती है। इसका उद्देश्य केंद्र सरकार की योजनाओं की जमीनी स्थिति की समीक्षा करने के साथ उन योजनाओं की कमियों को चिन्हित करना है, जिनका लाभ अपेक्षित रूप से लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है। अधिकारियों से कहा गया कि योजनाओं की प्रगति केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि उसका प्रत्यक्ष लाभ ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के पात्र लोगों को मिलना चाहिए।
मेडिकल कॉलेज को लेकर भी हुई चर्चा
बैठक में दमोह मेडिकल कॉलेज की प्रगति का विषय भी प्रमुखता से उठा। सांसद ने बताया कि कॉलेज में पानी से जुड़ी समस्या का समाधान किया जा चुका है और परियोजना अब पूर्णता की ओर है। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज शुरू होने के बाद जिले के लोगों को उपचार के लिए बड़े शहरों पर निर्भरता कम होगी और स्थानीय स्तर पर आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी। कॉलेज के शुभारंभ को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के संभावित कार्यक्रम की भी जानकारी दी गई।
दमयंती चना बनेगा स्थानीय अर्थव्यवस्था का आधार
‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ के तहत दमोह के प्रसिद्ध दमयंती चना को लेकर भी बैठक में महत्वपूर्ण चर्चा हुई। सांसद ने कहा कि जिले में चना प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने की दिशा में प्रयास जारी हैं। यूनिट स्थापित होने से स्थानीय स्तर पर चने का प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन बढ़ेगा तथा किसानों को अपने उत्पाद के लिए बेहतर बाजार मिलने की संभावना बनेगी।
इसके साथ ही टमाटर के प्रसंस्करण और सॉस निर्माण से जुड़े छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। इच्छुक युवाओं और उद्यमियों को ऋण एवं सरकारी योजनाओं के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराने की बात कही गई, ताकि जिले में स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर तैयार हो सकें।
स्टार्टअप इंडिया और रोजगार मेलों की गतिविधियों की समीक्षा करते हुए सांसद ने कहा कि युवाओं को केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाने की दिशा में भी प्रयास किए जाने चाहिए।
मत्स्य पालन की योजनाओं को गांव-गांव पहुंचाने पर जोर
बैठक में मत्स्य विभाग की योजनाओं की भी समीक्षा की गई। सांसद ने कहा कि मछली पालन को केवल तालाब में मछली उत्पादन तक सीमित समझने की जरूरत नहीं है। इस क्षेत्र में केंद्र सरकार की कई योजनाएं संचालित हैं, जिनसे रोजगार और आय के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाने के लिए कार्यशालाएं और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। पात्र लोगों को योजना, अनुदान, ऋण और अन्य सुविधाओं की जानकारी देकर अधिक से अधिक हितग्राहियों को इससे जोड़ने का प्रयास किया जाए।
करैया में रैक प्वाइंट से बढ़ेंगी रेलवे सुविधाएं
रेलवे से जुड़े विषय पर सांसद ने बताया कि करैया में लगभग 800 मीटर लंबा रैक प्वाइंट तैयार हो गया है। इसके बाद दमोह का रैक प्वाइंट करैया स्थानांतरित होने पर गेहूं, चना और यूरिया जैसी सामग्री की एक साथ लोडिंग की सुविधा मिल सकेगी।
उन्होंने कहा कि इससे शहर के भीतर भारी वाहनों की आवाजाही कम करने में भी मदद मिल सकती है। संपर्क क्रांति और गोंडवाना एक्सप्रेस से यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए बारिश के दौरान शेड की समस्या का भी समाधान किया जाएगा। आगामी एक से डेढ़ वर्ष में शेड सहित यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में काम किए जाने की बात कही गई।
‘दिशा’ की बैठक विकास की निगरानी का महत्वपूर्ण माध्यम : जिला पंचायत अध्यक्ष
जिला पंचायत अध्यक्ष रंजीता गौरव पटेल ने कहा कि ‘दिशा’ की बैठक केवल योजनाओं की समीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से जिले के विकास की प्राथमिकताएं तय करने और योजनाओं के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति सामने लाने का अवसर मिलता है।
उन्होंने कहा कि बैठक में उठाए गए विषयों पर गंभीरता से काम हुआ तो इसका सीधा लाभ जिले की जनता को मिलेगा। यह बैठक दमोह के विकास को नई दिशा और नई दशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
गुणवत्ता से समझौता नहीं, लापरवाही पर कार्रवाई : कलेक्टर
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने बैठक में कहा कि विकास कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के साथ उनकी गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कई बार नई इमारतों में ही पानी टपकने लगता है या कुछ वर्षों में भवन खराब स्थिति में पहुंच जाते हैं। ऐसी स्थिति में सरकारी राशि का अपेक्षित उपयोग नहीं हो पाता और आमजन को परेशानी उठानी पड़ती है।
उन्होंने निर्माण एजेंसियों और संबंधित अधिकारियों को गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों सहित अन्य निर्माण कार्यों में लापरवाही मिलने पर जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई करने की बात कही गई।
सड़क और नल-जल योजनाओं की धीमी रफ्तार पर नाराजगी
बैठक में सड़क निर्माण में हो रही देरी का मुद्दा भी सामने आया। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि जब विकास कार्यों के लिए राशि उपलब्ध कराई जा रही है तो परियोजनाओं को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखा जाना चाहिए। अधिकारियों को समय-सीमा के भीतर कार्य पूर्ण कराने के निर्देश दिए गए।
तेन्दूखेड़ा क्षेत्र में नल-जल योजना के लिए पाइपलाइन बिछाने के बाद सड़कों और अन्य स्थानों पर खोदे गए गड्ढों को समय पर नहीं भरने का विषय भी उठाया गया। कलेक्टर ने संबंधित एजेंसी को निर्देश दिए कि कार्य समाप्त होते ही गड्ढों को भरकर लोगों के आवागमन को सुगम बनाया जाए।
सड़क पर घूमते गौवंश को गौशालाओं तक पहुंचाने के निर्देश
सड़क दुर्घटनाओं में आवारा गौवंश के कारण उत्पन्न होने वाली स्थिति को देखते हुए भी बैठक में चर्चा हुई। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सड़कों पर मिलने वाले गौवंश को सुरक्षित तरीके से नजदीकी गौशालाओं तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाए। इससे पशुओं की सुरक्षा के साथ वाहन चालकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकेगी।
ग्रामीण रोजगार और अधोसंरचना योजनाओं की जानकारी
सीईओ जिला पंचायत प्रवीण फुलपगारे ने वीबी राम जी राम योजना के संबंध में बैठक में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों की वैधानिक मजदूरी रोजगार गारंटी का प्रावधान है। योजना के तहत जल सुरक्षा, ग्रामीण अधोसंरचना, आजीविका से जुड़े अधोसंरचनात्मक कार्य और मौसम आधारित आपदाओं से निपटने वाले कार्यों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में शासन द्वारा विभिन्न प्रकार के कार्यों को प्रारंभ करने की अनुमति दी गई है। इनमें कंटूर ट्रेंच, बोल्डर चेक, गैबियन संरचना, रूफटॉप वाटर हार्वेस्टिंग, कूप पुनर्भरण, बोरवेल एवं हैंडपंप के आसपास सोकपिट या रिचार्ज पिट, ‘एक बगिया मां के नाम’, गंगोत्री हरित परियोजना, नर्मदा परिक्रमा पथ पर पौधरोपण, वन विभाग की नर्सरी, लघु पशु शेड, मुर्गी शेड, बकरी शेड और सुगम संपर्क सड़क निर्माण जैसे कार्य शामिल हैं।
बैठक के अंत में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि शासन की योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने के लिए विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाया जाए। साथ ही पूर्व बैठकों में लिए गए निर्णयों की प्रगति की नियमित निगरानी करने और लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने पर जोर दिया गया।
बैठक में समिति के सदस्यों के अलावा विभिन्न विभागों के अधिकारी और संबंधित जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
