आदि कवि महर्षि वाल्मीकि के सम्मान में प्रतिमा स्थापना और चौराहे के नामकरण की मांग, समाज ने कहा— सांस्कृतिक विरासत को मिले उचित सम्मान
दमोह। भारतीय संस्कृति, साहित्य और आध्यात्मिक परंपरा के आधार स्तंभ माने जाने वाले आदि कवि महर्षि वाल्मीकि के सम्मान में दमोह शहर में उनकी भव्य प्रतिमा स्थापित करने तथा किसी प्रमुख चौराहे का नाम “महर्षि वाल्मीकि चौक” रखने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। इसी मांग को लेकर मंगलवार को वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन को विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की।
ज्ञापन सौंपने पहुंचे समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि केवल एक महान ऋषि ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के ऐसे महापुरुष हैं, जिन्होंने मानवता को आदर्श जीवन का मार्ग दिखाया। उन्होंने विश्वविख्यात महाकाव्य रामायण की रचना कर भारतीय साहित्य को अमूल्य धरोहर प्रदान की। उनके जीवन का संदेश आज भी समाज को सत्य, करुणा, समानता और नैतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
दमोह में स्थायी स्मारक बनाने की मांग
समाज के पदाधिकारियों ने प्रशासन से मांग की कि दमोह नगर के किसी प्रमुख और व्यस्त चौराहे पर महर्षि वाल्मीकि की आकर्षक एवं भव्य प्रतिमा स्थापित की जाए। साथ ही उस चौराहे का नाम “महर्षि वाल्मीकि चौक” घोषित किया जाए, जिससे नगर की सांस्कृतिक पहचान को नई दिशा मिले और महर्षि वाल्मीकि के योगदान से नई पीढ़ी भी परिचित हो सके।
प्रतिनिधियों का कहना था कि महापुरुषों का सम्मान केवल जयंती मनाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उनके विचारों और योगदान को स्थायी रूप से समाज के सामने स्थापित करना भी आवश्यक है। सार्वजनिक स्थानों पर उनकी प्रतिमाएं और उनके नाम से चौक एवं मार्ग समाज में सकारात्मक संदेश देने का कार्य करते हैं।
सामाजिक समरसता का प्रतीक हैं महर्षि वाल्मीकि
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि महर्षि वाल्मीकि का जीवन संघर्ष, आत्मपरिवर्तन और ज्ञान का अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने अपने जीवन से यह संदेश दिया कि व्यक्ति अपने कर्मों और ज्ञान के बल पर महान बन सकता है। यही कारण है कि देशभर में उनके प्रति गहरी आस्था और सम्मान का भाव है।
समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि युवा पीढ़ी को महर्षि वाल्मीकि के जीवन दर्शन से जोड़ने के लिए ऐसे स्मारकों का निर्माण किया जाए, जो उन्हें भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों से प्रेरित करें।
देश के कई शहरों में हैं महर्षि वाल्मीकि के नाम पर चौक और स्मारक
प्रतिनिधियों ने प्रशासन का ध्यान इस ओर भी आकर्षित किया कि देश के अनेक शहरों में महर्षि वाल्मीकि के नाम पर चौक, मार्ग, पार्क और प्रतिमाएं स्थापित हैं। दमोह जैसे ऐतिहासिक नगर में भी उनके सम्मान में एक भव्य स्मारक बनाया जाना चाहिए। इससे न केवल समाज की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी होगी, बल्कि नगर की सांस्कृतिक पहचान भी मजबूत होगी।
प्रशासन से शीघ्र निर्णय लेने का आग्रह
समाज के लोगों ने जिला प्रशासन से आग्रह किया कि जनभावनाओं का सम्मान करते हुए उनकी मांग पर गंभीरता से विचार किया जाए और प्रतिमा स्थापना तथा चौराहे के नामकरण की प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ की जाए। प्रशासनिक अधिकारियों ने ज्ञापन प्राप्त कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।
बड़ी संख्या में शामिल हुए समाजजन
ज्ञापन सौंपने के दौरान वाल्मीकि समाज के वरिष्ठजन, सामाजिक कार्यकर्ता, युवा एवं महिलाएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहीं। सभी ने एक स्वर में महर्षि वाल्मीकि के सम्मान में प्रतिमा स्थापना और “महर्षि वाल्मीकि चौक” के नामकरण की मांग का समर्थन किया। समाज के लोगों ने उम्मीद जताई कि प्रशासन उनकी भावनाओं को समझते हुए जल्द सकारात्मक निर्णय लेगा।
